Dead Sea Facts: क्या है डेड सी? जहाँ इंसान भी तैरता है लकड़ी की तरह, लेकिन जीवन नामुमकिन

Dead Sea Facts: डेड सी का कड़वा सच, इतना नमक कि मछलियां मर जाती हैं, जानिए कारण

Dead Sea Facts: दुनिया में कई रहस्यमयी जगहें हैं, लेकिन डेड सी (मृत सागर) अपनी अनोखी विशेषताओं के कारण सबसे अलग है। यह कोई समुद्र नहीं, बल्कि एक बंद जलाशय (लैंडलॉक्ड साल्ट लेक) है, जो इजरायल और जॉर्डन की सीमा पर स्थित है। यहां पानी इतना खारा है कि सामान्य जीव-जंतु नहीं जीवित रह सकते। नाम ‘डेड सी’ इसलिए पड़ा क्योंकि यहां मछलियां, पौधे या अन्य बड़े जीव नहीं पनपते। लेकिन क्या यहां बिल्कुल भी जीवन नहीं है? और यह इतना खारा कैसे बना? आइए जानते हैं डेड सी के बारे में सब कुछ।

डेड सी की भौगोलिक स्थिति और विशेषताएं/Dead Sea Facts

डेड सी जॉर्डन रिफ्ट वैली (Syrian-African Rift Valley) में स्थित है, जो अफ्रीका और एशिया महाद्वीपों के अलग होने से बनी एक गहरी घाटी है। यह धरती पर सबसे निचला स्थान है—इसकी सतह समुद्र तल से लगभग 440 मीटर (2025 के अनुसार 439.78 मीटर) नीचे है। इसका सबसे गहरा हिस्सा 304 मीटर (997 फीट) तक है, जो दुनिया का सबसे गहरा हाइपरसलाइन लेक है।

यह जलाशय उत्तर से दक्षिण तक करीब 50 किलोमीटर लंबा और सबसे चौड़े स्थान पर 15 किलोमीटर चौड़ा है। इसका कोई आउटलेट (निकास) नहीं है—सिर्फ इनफ्लो (जॉर्डन नदी और छोटी नदियां) है। पानी वाष्पित होता है, लेकिन नमक रह जाता है, जिससे साल्ट कंसंट्रेशन बढ़ता जाता है।

इतना खारा क्यों है डेड सी का पानी?

डेड सी की साल्टिनिटी (नमक की मात्रा) 34.2% (342 ग्राम प्रति किलोग्राम) है, जो सामान्य समुद्र के पानी से 9.6 गुना ज्यादा है (समुद्र में औसतन 3.5%)। यह दुनिया के सबसे खारे जलाशयों में से एक है।

कारण:

  • कोई निकास नहीं होने से पानी वाष्पित होता है, नमक जमा होता है।
  • जॉर्डन नदी और अन्य स्रोतों से आने वाला पानी भी नमक लेकर आता है।
  • गर्म जलवायु और कम वर्षा से वाष्पीकरण तेज होता है।
  • गहराई बढ़ने पर साल्टिनिटी और बढ़ती है—नीचे तक 332 पार्ट्स पर थाउजैंड तक पहुंच जाती है।

इस वजह से पानी का डेंसिटी 1.24 kg/litre है, जिससे इंसान आसानी से तैरता है—डूबना मुश्किल है।

क्यों नहीं पनप सकता यहां जीवन?

डेड सी को ‘मृत’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी अत्यधिक साल्टिनिटी बड़े जीवों (मैक्रोस्कोपिक ऑर्गेनिज्म) के लिए घातक है। मछलियां, जलीय पौधे या अन्य जीव यहां नहीं जीवित रह सकते। जॉर्डन नदी से आने वाली मछलियां यहां पहुंचते ही मर जाती हैं। तट पर भी पौधे बहुत कम हैं—ज्यादातर हेलोफाइट्स (नमकीन मिट्टी में उगने वाले)।

लेकिन पूरी तरह निर्जीव नहीं है:

  • सूक्ष्म बैक्टीरिया और माइक्रोबियल फंगी मौजूद हैं।
  • 2011 में वैज्ञानिकों ने गहरे पानी में फ्रेशवॉटर स्प्रिंग्स के आसपास माइक्रोब्स के कॉलोनी पाए।
  • बरसात के मौसम में साल्टिनिटी कम होने पर अस्थायी रूप से जीवन सक्रिय हो जाता है।

डेड सी की अन्य अनोखी बातें

  • थेरेपी और हेल्थ बेनिफिट्स: पानी और कीचड़ में मैग्नीशियम, पोटैशियम, ब्रोमाइन आदि मिनरल्स होते हैं, जो स्किन डिसीज, आर्थराइटिस में फायदेमंद माने जाते हैं। हजारों साल से लोग यहां थेरेपी लेते आ रहे हैं।
  • इतिहास: बाइबिल में सोडोम और गोमोरा का जिक्र इसी क्षेत्र से जुड़ा है। मासाडा किला यहां है, जहां रोमन काल की कहानियां हैं।
  • पर्यटन: लोग यहां तैरने आते हैं—पानी में लेटकर पढ़ाई भी की जा सकती है। लेकिन ज्यादा समय रहने से त्वचा जल सकती है।
  • पर्यावरणीय खतरा: पानी स्तर गिर रहा है—हर साल 1 मीटर नीचे जा रहा है। कारण: जॉर्डन नदी का पानी डायवर्शन और क्लाइमेट चेंज।

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