Digvijaya Singh On RSS & Congress: दिग्विजय सिंह की सफाई से कांग्रेस में हलचल, संगठनात्मक कमजोरी पर खुलकर रखी बात

Digvijaya Singh On RSS & Congress: आरएसएस की तारीफ और कांग्रेस की कमज़ोरी पर दिग्विजय सिंह का कबूलनामा! बढ़ी सियासी सरगर्मी

Digvijaya Singh on RSS & Congress: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस (Congress) के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) एक बार फिर अपने बयान को लेकर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। आरएसएस (RSS) की संगठनात्मक क्षमता की प्रशंसा और कांग्रेस की कमजोरियों पर की गई टिप्पणी ने सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और लाल कृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) की एक पुरानी तस्वीर साझा करने के बाद भाजपा (BJP) ने कांग्रेस और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर तीखा हमला बोला। वहीं, दिग्विजय सिंह ने अपने बयान को लेकर सफाई देते हुए कई अहम बातें कहीं हैं। क्या यह बयान कांग्रेस के अंदरूनी हालात की ओर इशारा करता है या सिर्फ एक वैचारिक स्पष्टता है? पूरा मामला क्या है, जानते हैं विस्तार से…

तस्वीर से शुरू हुई सियासी बहस/Digvijaya Singh on RSS & Congress

शनिवार को दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) की एक पुरानी तस्वीर साझा की। इस पोस्ट के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर राजनीतिक हमला तेज कर दिया। भाजपा नेताओं ने इसे राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से जोड़ते हुए कांग्रेस की कथनी और करनी पर सवाल खड़े किए। इस पूरे विवाद के बीच दिग्विजय सिंह के पुराने आरएसएस विरोधी रुख को लेकर भी चर्चा तेज हो गई। तस्वीर साझा करने का मकसद क्या था और इसके राजनीतिक निहितार्थ क्या हैं, इसे लेकर अलग-अलग सियासी व्याख्याएं सामने आने लगीं। यही कारण है कि यह मामला सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कांग्रेस की विचारधारा और रणनीति पर भी बहस का कारण बन गया।

विरोध के साथ संगठन की प्रशंसा

न्यूज एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत में दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने आरएसएस (RSS) को लेकर अपनी स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि वे शुरू से आरएसएस की विचारधारा के विरोधी रहे हैं और मानते हैं कि यह संगठन न तो संविधान का सम्मान करता है और न ही देश के कानूनों का। उन्होंने आरएसएस को एक गैर-पंजीकृत संगठन बताते हुए सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री लाल किले से इसे दुनिया का सबसे बड़ा गैर-सरकारी संगठन बताते हैं, तो नियम-कानून कहां गए। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे आरएसएस की संगठनात्मक क्षमता की प्रशंसा करते हैं। यही दोहरा बयान राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, जिसने कांग्रेस और भाजपा दोनों खेमों में प्रतिक्रियाएं तेज कर दीं।

कांग्रेस की कमजोरी पर बयान

कांग्रेस (Congress) की संगठनात्मक क्षमता पर पूछे गए सवाल पर दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने बेबाकी से कहा कि पार्टी में सुधार की गुंजाइश है और हर संगठन को समय-समय पर खुद को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि कांग्रेस एक आंदोलन की पार्टी रही है और आज भी किसी मुद्दे को जन आंदोलन में बदलने की क्षमता रखती है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कांग्रेस उन आंदोलनों को वोटों में बदलने में कमजोर साबित होती है। यह बयान पार्टी के भीतर आत्ममंथन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी कांग्रेस की जमीनी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

नेतृत्व और भविष्य की राजनीति

जब दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) से पूछा गया कि इतने वरिष्ठ नेता होने के बावजूद उनकी बात कांग्रेस नेतृत्व तक क्यों नहीं पहुंचती, तो उन्होंने पलटकर कहा कि अगर आप उनसे सवाल पूछ रहे हैं, तो बात जरूर पहुंचती होगी। फिलहाल, उनके इस बयान से कांग्रेस के भीतर संगठन सुधार की बहस फिर से तेज हो गई है। वहीं, भाजपा इस मुद्दे को कांग्रेस की आंतरिक कमजोरी के रूप में पेश कर रही है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इन बयानों को सिर्फ व्यक्तिगत राय मानता है या संगठनात्मक बदलाव की दिशा में कोई ठोस कदम उठाता है। फिलहाल, दिग्विजय सिंह के बयान ने सियासत में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।

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