फर्रुखाबाद के कलेक्ट्रेट सभागार में निपुण विद्यालय रंगारंग समारोह आयोजित हुआ, जिसमें 478 निपुण घोषित विद्यालयों के शिक्षकों को सम्मानित किया गया। डीएम ने शिक्षकों को प्रेरक भूमिका निभाने का आह्वान किया।
फर्रुखाबाद के फतेहगढ़ स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में रविवार को “निपुण विद्यालय रंगारंग समारोह” का आयोजन उत्साह और गरिमा के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक विधि से हुई, जहां जिलाधिकारी ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर प्रशासनिक और शिक्षा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिससे आयोजन का महत्व और बढ़ गया।

निपुण कार्यक्रम की उपलब्धियां
कार्यक्रम के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने निपुण भारत मिशन के तहत जिले में हुए कार्यों का विस्तार से विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जिले के कुल 478 विद्यालयों को निपुण घोषित किया गया है, जो प्राथमिक शिक्षा के स्तर में सुधार की दिशा में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह आंकड़ा जिले में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है।
सम्मान से बढ़ा शिक्षकों का मनोबल
समारोह का सबसे खास क्षण वह रहा जब निपुण घोषित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को जिलाधिकारी द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। मंच पर सम्मान पाकर शिक्षकों के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ झलक रहा था। इस सम्मान ने न सिर्फ उनके कार्यों को सराहा, बल्कि आगे बेहतर प्रदर्शन की प्रेरणा भी दी।
डीएम का प्रेरणादायक संदेश
अपने संबोधन में जिलाधिकारी ने शिक्षकों को शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि निपुण विद्यालय केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने विकास खंड में आदर्श विद्यालय के रूप में पहचान बनाएं और अन्य स्कूलों को भी निपुण बनाने में सहयोग करें। उनका संदेश स्पष्ट था कि गुणवत्ता शिक्षा से ही भविष्य संवर सकता है।
शिक्षा विभाग की भागीदारी
इस कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी और पुलिस उपाधीक्षक (नगर क्षेत्र) सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही, जिला समन्वयक (प्रशिक्षण) जतिन रंजन मिश्रा, सभी एसआरजी और एआरपी ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम का संचालन आकाश मिश्रा ने प्रभावशाली ढंग से किया, जिससे पूरे आयोजन में निरंतरता बनी रही।










