रायबरेली : सदर तहसील क्षेत्र निवासी भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष पर उनके ही ग्राम सभा के रहने वाले एक व्यवसाई में जमीन कब्जा किए जाने का आरोप लगाया था, जिसको लेकर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने प्रेसवार्ता कर मीडिया को जानकारी दी है, और सभी आरोपी को खारिज किया है।
बताते चलें कि अमावां ब्लाक क्षेत्र के मखदूमपुर गांव में भूमि विवाद को लेकर पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष और वर्तमान में पार्टी के अवध क्षेत्रीय मंत्री दिलीप यादव ने शनिवार को एक निजी होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अपने ऊपर लगे जमीन कब्जे के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने इन आरोपों को उनकी सामाजिक और राजनीतिक छवि को धूमिल करने की सुनियोजित साजिश करार दिया। दिलीप यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि विवादित भूमि, जो राजस्व ग्राम मखदूमपुर की गाटा संख्या-266/436 (रकबा 1.110 हेक्टेयर) है,उनकी मां सुन्दारा को सीरदारी पट्टे पर आवंटित की गई थी।

हालांकि, राजस्व अभिलेखों में त्रुटि के कारण उनकी मां का नाम खतौनी में दर्ज नहीं हो सका था। वर्ष 2000 में ग्राम सभा के दखल के बाद यह मामला सामने आया, जिसके बाद धारा 229-बी के तहत वाद दाखिल किया गया। अदम पैरवी के कारण यह वाद खारिज हो गया था, लेकिन 2014 में लखनऊ मण्डलायुक्त के आदेश पर एसडीएम ने उनकी मां के पक्ष में निर्णय दिया। इस निर्णय के बाद उनकी मां का नाम खतौनी में दर्ज हुआ, और उत्तराधिकार के तहत दिलीप यादव और उनके चार भाइयों को इस भूमि का स्वामित्व प्राप्त हुआ।
आरोपों को बताया साजिश
दिलीप यादव ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ लगाए गए जमीन कब्जे के आरोप पूरी तरह से निराधार और राजनीति से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा,मैंने और मेरे परिवार ने एक इंच जमीन भी नहीं कब्जाई। यह सब मेरी सामाजिक और राजनीतिक छवि को खराब करने की एक सुनियोजित साजिश है।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में अमावा ब्लॉक में स्वर्गीय अखिलेश सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम में उनकी सक्रिय भागीदारी के बाद ये आरोप सामने आए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह विवाद उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है।
क्या है पूर्व जिलाध्यक्ष पर आरोप
मखदूमपुर गांव में ग्राम सभा की बंजर भूमि को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने का आरोप दिलीप यादव और उनके परिवार पर लगा था। शिकायतकर्ता विजय सिंह का दावा था कि 5 जून 2014 को कोई आदेश जारी नहीं हुआ था, फिर भी यह जमीन उनकी मां के नाम दर्ज की गई और बाद में उत्तराधिकार में दिलीप यादव और उनके भाइयों के नाम पर हो गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि उस समय दिलीप यादव के पिता सरकारी शिक्षक थे और उनके भाई धीरेंद्र यादव ग्राम प्रधान थे, जिन्होंने अपने रसूख का इस्तेमाल कर यह कथित फर्जीवाड़ा किया। इस मामले में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रफुल्ल शर्मा ने जांच के आदेश दिए हैं।










