Frequent Urination Kidney Heart: कई लोग यूरिन संबंधी छोटी-मोटी समस्याओं को उम्र बढ़ने का हिस्सा या मामूली बात मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार पेशाब आना, पेशाब करते समय जलन, यूरिन की धार कमजोर होना या रात में बार-बार उठना जैसी परेशानियां शरीर में चल रही किसी बड़ी बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकती हैं। ये लक्षण किडनी की खराबी, हार्ट प्रॉब्लम, डायबिटीज, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), किडनी स्टोन या प्रोस्टेट की समस्या से जुड़े हो सकते हैं। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो छोटी समस्या गंभीर बीमारी में बदल सकती है, यहां तक कि सेप्सिस जैसी जानलेवा स्थिति भी पैदा हो सकती है।
यूरिन से पता चलता है शरीर की कई बीमारियां/Frequent Urination Kidney Heart
शरीर का यूरिन सिस्टम कई अंगों से जुड़ा होता है। यूरिन में बदलाव या असामान्य लक्षण शरीर के अन्य हिस्सों में समस्या का संकेत देते हैं। डॉ. माधव सान्जगिरी (यूरोलॉजिस्ट) कहते हैं, “यूरिन संबंधी लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जांच से इलाज आसान, सस्ता और कम दिक्कत वाला होता है।” छोटी-सी UTI अगर अनट्रिटेड रहे तो इंफेक्शन ब्लैडर से किडनी तक फैल सकता है, जिससे किडनी में गंभीर इंफेक्शन या सेप्सिस हो सकता है।

बार-बार पेशाब आना किस बीमारी का संकेत है ?
बार-बार यूरिन आना (खासकर रात में nocturia) सबसे आम लक्षण है। यह डायबिटीज का क्लासिक संकेत होता है, क्योंकि ब्लड शुगर बढ़ने पर किडनी ज्यादा काम करती है और यूरिन की मात्रा बढ़ जाती है। लेकिन यह हार्ट फेल्योर का भी शुरुआती संकेत हो सकता है। हार्ट कमजोर होने पर शरीर में फ्लूइड जमा होता है, और लेटने पर किडनी इसे बाहर निकालने की कोशिश करती है, जिससे रात में बार-बार पेशाब आता है। हार्ट फेल्योर के 50% मरीजों में ओवरएक्टिव ब्लैडर या इनकॉन्टिनेंस की समस्या होती है। अन्य कारणों में ज्यादा पानी पीना, डाइयूरेटिक दवाएं या कैफीन/अल्कोहल शामिल हैं।
पेशाब में जलन: UTI और किडनी इंफेक्शन का अलार्म
पेशाब करते समय जलन या दर्द होना ज्यादातर UTI का संकेत होता है। महिलाओं में यह ज्यादा आम है क्योंकि यूरेथ्रा छोटा होता है। UTI बैक्टीरिया से होता है जो यूरेथ्रा से ब्लैडर में पहुंचता है। अगर समय पर इलाज न हो तो इंफेक्शन किडनी तक पहुंच सकता है (पायलोनेफ्राइटिस), जिसके लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, पीठ/बगल में दर्द, मतली और उल्टी शामिल हैं। किडनी इंफेक्शन जानलेवा हो सकता है। यूरिन में खून आना या दर्द किडनी/ब्लैडर स्टोन का भी संकेत हो सकता है, जो रुकावट और इंफेक्शन पैदा करता है।
पुरुषों में प्रोस्टेट समस्या: कमजोर धार और टपकना
पुरुषों में यूरिन शुरू करने में दिक्कत, बूंद-बूंद टपकना, कमजोर धार या रात में बार-बार उठना प्रोस्टेट एनलार्जमेंट (BPH), इंफेक्शन या प्रोस्टेट कैंसर का संकेत हो सकता है। इसे उम्र का असर समझकर इग्नोर करना खतरनाक है।
महिलाओं में ब्लैडर और नर्व संबंधी समस्या
महिलाओं में अचानक तेज पेशाब लगना, रोक न पाना या ओवरएक्टिव ब्लैडर नर्व डैमेज, पेल्विक फ्लोर समस्या या हार्ट कंडीशन से जुड़ा हो सकता है। यह डेली लाइफ, नींद और मेंटल हेल्थ पर बुरा असर डालता है।
किडनी डैमेज के शुरुआती संकेत
क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) अक्सर तब पकड़ में आती है जब काफी नुकसान हो चुका होता है। यूरिन कम आना, खून आना, झागदार यूरिन या सूजन शुरुआती संकेत हैं। हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज CKD के बड़े कारण हैं।
कब जाएं डॉक्टर के पास?
- बार-बार पेशाब, जलन, कमजोर धार, यूरिन में खून या बदबू।
- रात में बार-बार उठना, पेशाब रोक न पाना, पीठ/पेट दर्द।
- बुखार, ठंड लगना या मतली के साथ लक्षण।
एक्सपर्ट की सलाह: लक्षण दिखते ही यूरोलॉजिस्ट या नेफ्रोलॉजिस्ट से जांच कराएं। यूरिन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या ब्लड टेस्ट से समस्या जल्दी पकड़ में आ सकती है।
रोकथाम के उपाय
- पर्याप्त पानी पिएं (दिन में 2-3 लीटर)।
- UTI होने पर तुरंत इलाज कराएं।
- डायबिटीज और BP कंट्रोल रखें।
- हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं, ज्यादा नमक/चीनी से बचें।
यूरिन की समस्या को इग्नोर न करें—यह शरीर का अलार्म है। समय पर ध्यान देकर आप गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं।










