गीता, भागवत, रामायण और महाभारत ही सत्संग के साधन

नासिक महाराष्ट्र से पधारे श्री श्री 1008 स्वामी आत्मानंद सरस्वती जी महाराज की बाबा बालेश्वर धाम में आयोजित सत्संग सभा में सैकड़ों लोगों ने प्रवचन का आनंद उठाया। स्वामी जी महाराज ने कहा कि गीता, भागवत, रामायण, महाभारत ही सत्संग के साधन है। सत्संग एक पवित्र और ज्ञानवर्धक आयोजन है। धर्म, अध्यात्म, और

Oct 07, 2025 - 13:04
Updated: 10 months ago
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नासिक महाराष्ट्र से पधारे श्री श्री 1008 स्वामी आत्मानंद सरस्वती जी महाराज की बाबा बालेश्वर धाम में आयोजित सत्संग सभा में सैकड़ों लोगों ने प्रवचन का आनंद उठाया। स्वामी जी महाराज ने कहा कि गीता, भागवत, रामायण, महाभारत ही सत्संग के साधन है।

सत्संग एक पवित्र और ज्ञानवर्धक आयोजन है। धर्म, अध्यात्म, और जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करते उन्होंने कहा कि सत्संग का उद्देश्य आत्मशुद्धि, आत्मज्ञान, और आध्यात्मिक उन्नति को बढ़ावा देना है। सत्संग के सुनने मात्र से से व्यक्ति को जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

उन्होंने कहा कि कलयुग में मानुष तन पाकर अगर आत्मा परमात्मा में मन नहीं लगाया तो जीवन निरर्थक हो जाएगा। कलियुग में भगवान नाम कीर्तन स्वाध्याय ही पर्याप्त है। गीता, रामायण, भागवत का पाठ करना चाहिए। दान ,सेवा, मंदिर दर्शन, तीर्थ दर्शन, राष्ट्र भाव और समाज सेवा से मनुष्य का भवसागर निश्चित रूप से पार हो जाता है।

राष्ट्र प्रेम को उन्होंने भगवान का विराट रूप बताया और कहा कि सनातन धर्म की शरण में जाने से शांति और सौहार्द की प्राप्ति होती है।कार्यक्रम का संचालन करते हुए पंडित झिलमिल जी महाराज ने कहा कि सत्संग के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और लोगों को एकजुट करने का प्रयास किया जाता है। यह एक ऐसा मंच है जो लोगों को एकजुट करता है और उन्हें सही दिशा में ले जाने का काम करता है। भक्तों ने स्वामी जी महाराज का माल्यार्पण और आरती पूजन से स्वागत किया।

इस अवसर पर उमाशंकर बाजपेई, रमेश मिश्रा, अरविंद उर्फ पुतई पांडे, पंडित गिरजा शंकर दीक्षित, पूर्व प्रधान उमेश सिंह, कीर्ति मनोहर शुक्ला, धीरेंद्र मिश्रा, कपिल देव तिवारी, संजू महाराज, टेनी महाराज, दिलीप शुक्ला, रमेश माली, धुन्ना सिंह, पिंटू सिंह आदि सैकड़ो भक्त मौजूद रहे।

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