Indian Citizenship Exodus: भारत (India) से नागरिकता छोड़ने का सिलसिला बीते कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है और अब यह एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक बहस का विषय बन गया है। केंद्र सरकार (Central Government) ने संसद में जो आंकड़े पेश किए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। कोविड महामारी (Covid Pandemic) के बाद हर साल दो लाख से अधिक भारतीय नागरिकता त्याग रहे हैं। यह सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि बदलती आकांक्षाओं, वैश्विक अवसरों और नीतिगत सीमाओं की तस्वीर भी है। सवाल उठता है कि आखिर लोग भारत छोड़ने को मजबूर क्यों हो रहे हैं, किन देशों को वे अपना नया ठिकाना बना रहे हैं और क्या यह ‘ब्रेन ड्रेन’ से आगे बढ़कर किसी नई प्रवृत्ति का संकेत है? इन सवालों के जवाब आंकड़ों और बयानों में छिपे हैं, तो चलिए इस बेहद गंभीर विषय को समझने की कोशिश करते हैं…
नागरिकता छोड़ने के बढ़ते आंकड़े/Indian Citizenship Exodus
विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2011 से 2024 के बीच करीब 20.6 लाख भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी है। इनमें से 9 लाख से अधिक लोग सिर्फ पिछले पांच वर्षों में भारत छोड़ चुके हैं। पहले करीब एक दशक तक हर साल औसतन 1.2 लाख से 1.45 लाख लोग नागरिकता त्यागते थे। कोविड-19 के दौरान 2020 में यह संख्या घटकर लगभग 85 हजार रह गई, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर पाबंदियां थीं। लेकिन महामारी के बाद हालात बदले और 2022 से हर साल यह आंकड़ा 2 लाख के पार पहुंच गया। यह रुझान दर्शाता है कि पोस्ट-कोविड दौर में प्रवासन (Migration) ने नई गति पकड़ ली है।

लोग क्यों छोड़ रहे हैं भारतीय नागरिकता?
केंद्र सरकार का कहना है कि नागरिकता छोड़ने के कारण पूरी तरह व्यक्तिगत होते हैं और हर व्यक्ति की परिस्थिति अलग होती है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अधिकतर लोग ‘व्यक्तिगत सुविधा’ और वैश्विक कार्यक्षेत्र के बेहतर अवसरों के लिए विदेशी नागरिकता लेते हैं। भारत में दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) की अनुमति नहीं है। नागरिकता अधिनियम 1955 (Citizenship Act 1955) की धारा 9 के तहत, विदेशी नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है। हालांकि ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड वीजा-फ्री यात्रा और कुछ आर्थिक अधिकार देता है, लेकिन वोटिंग, चुनाव लड़ने और सरकारी पदों जैसे राजनीतिक अधिकार नहीं देता, जो विदेशी नागरिकता में उपलब्ध होते हैं।
विदेशी अवसर और अमीरों का पलायन
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ नौकरी की तलाश नहीं, बल्कि जीवन की स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा का सवाल भी है। लेखक संजय बारू (Sanjaya Baru) ने अपनी किताब ‘सेसेशन ऑफ द सक्सेसफुल: द फ्लाइट आउट ऑफ न्यू इंडिया’ में इसे प्रवासन की चौथी लहर बताया है, जिसमें अमीर वर्ग, हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और प्रभावशाली लोग देश छोड़ रहे हैं। मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) के आंकड़ों के मुताबिक, 2014 के बाद से करीब 23 हजार भारतीय मिलियनेयर भारत छोड़ चुके हैं। पहले की लहरों में मजदूर और फिर डॉक्टर-इंजीनियर विदेश गए थे, लेकिन अब यह ट्रेंड आर्थिक रूप से सफल वर्ग में ज्यादा दिख रहा है।
कौन से देश बन रहे हैं पहली पसंद
आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों की पहली पसंद अमेरिका (United States), ब्रिटेन (United Kingdom), कनाडा (Canada) और ऑस्ट्रेलिया (Australia) हैं। इन देशों के पासपोर्ट वैश्विक स्तर पर ज्यादा ताकतवर माने जाते हैं और वहां नौकरी, शिक्षा, सोशल सिक्योरिटी व स्थायी निवास की बेहतर सुविधाएं मिलती हैं। सरकार का कहना है कि वह ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था और वैश्विक गतिशीलता को समझती है, लेकिन यह प्रवृत्ति लंबे समय में भारत के लिए चुनौती भी बन सकती है। आने वाले वर्षों में यह देखना अहम होगा कि नीति सुधार और अवसर सृजन इस पलायन को कितना संतुलित कर पाते हैं।










