Indore contaminated water crisis: मध्य प्रदेश का इंदौर शहर, जो लगातार कई सालों से देश का सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीतता आ रहा है, इन दिनों एक बड़ी त्रासदी से जूझ रहा है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल सप्लाई होने से उल्टी-दस्त की बीमारी फैल गई। नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज हो गया और पास के पुलिस चौकी के टॉयलेट का गंदा सीवेज पानी उसमें मिल गया। इससे सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए और अब तक 10 से 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें एक 5-6 महीने का मासूम बच्चा भी शामिल है। करीब 1400 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। लोग महीनों से पानी में बदबू और गंदगी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन नगर निगम और प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।
कैसे हुआ ये हादसा/Indore contaminated water crisis
भागीरथपुरा इलाका कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र में आता है। यहां पुलिस चौकी के ऊपर टॉयलेट बना हुआ है और उसके नीचे से मुख्य पानी की पाइपलाइन गुजरती है। टॉयलेट का गंदा पानी लीक होकर पेयजल में मिल गया। लैब रिपोर्ट्स ने कन्फर्म किया कि पानी में बैक्टीरिया और दूषित तत्व थे। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने माना कि डायरिया से 10 मौतें हुई हैं, जबकि स्थानीय लोग और कांग्रेस 15 तक का आंकड़ा बता रहे हैं। सरकार ने हाईकोर्ट में सिर्फ 4 मौतें ही स्वीकारी हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच कमेटी बनाई, नगर निगम कमिश्नर को हटाया, दो अधिकारियों को सस्पेंड किया और मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने का ऐलान किया। लेकिन लोग कह रहे हैं कि ये सब देर से हुआ।

कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरा
कांग्रेस इस मामले में भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोल रही है। पार्टी का कहना है कि ये प्रशासन की लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीजा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने कहा कि इंदौर में पानी नहीं, जहर बांटा गया और प्रशासन कुंभकरण की नींद सोता रहा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे सत्ता के घमंड और करप्शन का नतीजा बताया। कांग्रेस ने अपनी जांच कमेटी भी बनाई है।
नगर निगम के बाहर उग्र प्रदर्शन
2 जनवरी 2026 को युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने नगर निगम मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। वे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान से नाराज थे, जिसमें उन्होंने मामले को हल्के में लिया था (बाद में उन्होंने माफी मांगी)। प्रदर्शनकारियों ने घंटा लेकर आए और घंटी बजाकर विरोध जताया, जैसे कह रहे हों कि सरकार को शर्म आनी चाहिए। उन्होंने मारे गए लोगों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा, मंत्री विजयवर्गीय और महापौर से इस्तीफा, और जिम्मेदार अधिकारियों पर केस दर्ज करने की मांग की।
प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि कार्यकर्ता बैरिकेडिंग तोड़ने और चढ़ने की कोशिश करने लगे। पुलिस से झूमाझटकी भी हुई। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और 21 कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। इनमें युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव मोनिका मंडरे, सीमा सोलंकी और वरेशपाल सिंह जैसे नेता शामिल थे। महू से भी कार्यकर्ता आए थे। पुलिस ने पहले घंटा जब्त कर लिया। बाद में सभी को छोड़ दिया गया, लेकिन कांग्रेस ने चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो और बड़ा आंदोलन करेंगे।
पहले भी हुए थे प्रदर्शन
इससे पहले कांग्रेस ने बाणगंगा थाने का घेराव किया और अधिकारियों पर FIR की मांग की। पोस्टर लगाए गए जिनमें लिखा था ‘मौत का पानी’ और यमराज की तस्वीरें। भोपाल में भी युवा कांग्रेस ने विजयवर्गीय का पुतला फूंका और झील में डुबोया। महिला कांग्रेस ने चूड़ियां लेकर प्रदर्शन किया। पूरे प्रदेश में कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर भाजपा को घेर रही है।
निष्कर्ष
हाईकोर्ट ने सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और साफ पानी सप्लाई करने के आदेश दिए हैं। प्रशासन अब टैंकरों से पानी बांट रहा है और पाइपलाइन ठीक कर रहा है। लेकिन लोगों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा। ये मामला दिखाता है कि स्वच्छता के अवॉर्ड जीतने के बावजूद बेसिक सुविधाओं में कितनी कमी है। गरीब इलाकों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। उम्मीद है कि जांच से सच सामने आएगा और दोषियों को सजा मिलेगी, ताकि आगे ऐसा न हो।










