Parakram Diwas : 23 जनवरी 2026 को पूरे देश में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पराक्रम दिवस के रूप में बड़े उत्साह से मनाई गई। झारखंड के रामगढ़ जिले में भी यह दिन खास रहा। शहर के दिल में स्थित सुभाष चौक पर नेताजी की प्रतिमा के समीप एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। यहां बड़ी संख्या में लोग, छात्र-छात्राएं, अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति जुटे। सबने नेताजी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके जीवन से प्रेरणा ली। यह कार्यक्रम नेताजी के साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति की याद दिलाने वाला था।
कार्यक्रम की शुरुआत माल्यार्पण से हुई

समारोह की शुरुआत बहुत ही भावुक तरीके से हुई। मुख्य अतिथि और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने सबसे पहले नेताजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। फूलों की मालाएं चढ़ाकर सबने उन्हें नमन किया। इस दौरान वातावरण में गहरा सम्मान और भावुकता छाई रही। लोग “जय हिंद”, “नेताजी अमर रहें” जैसे नारे लगा रहे थे। माल्यार्पण के बाद सबने दो मिनट का मौन रखकर नेताजी और सभी स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया।
मुख्य अतिथि राजीव जायसवाल का प्रेरणादायक संबोधन

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रामगढ़ जिला के सांसद प्रतिनिधि राजीव जायसवाल मौजूद थे। उन्होंने अपने संबोधन में नेताजी को सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति का जीता-जागता प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “नेताजी सुभाष चंद्र बोस केवल एक महान व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि साहस, त्याग और देशभक्ति के प्रतीक थे। आज का दिन हमें याद दिलाता है कि आजादी हमें किसी ने दान में नहीं दी, बल्कि हजारों वीरों के खून से मिली है।”
जायसवाल ने नेताजी के मशहूर नारे “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह नारा आज भी युवाओं में जोश भरता है। नेताजी ने आईसीएस जैसी बड़ी नौकरी छोड़कर देश के लिए सब कुछ त्याग दिया। इससे साबित होता है कि पद और सुविधा से बड़ा देश और स्वाभिमान होता है।
उन्होंने रामगढ़ की धरती का भी जिक्र किया। कहा कि रामगढ़ वीरता और संघर्ष की मिसाल रहा है। यहां के लोगों ने भी आजादी की लड़ाई में योगदान दिया। नेताजी की क्रांतिकारी सोच का असर रामगढ़ पर भी पड़ा। जायसवाल ने युवाओं से अपील की कि वे नेताजी के रास्ते पर चलें और देश के लिए कुछ करें।
विशिष्ट अतिथियों ने भी दिए महत्वपूर्ण संदेश
समारोह में कई विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। इनमें रेलवे के डीटीएम बरकाकाना राजहंस सिंह, एमईएस के रोहित साठे और एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, रांची के प्रभारी राजकिशोर महतो थे।
राजहंस सिंह और रोहित साठे ने नेताजी के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे नेताजी ने आजाद हिंद फौज बनाकर ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी। दोनों ने कहा कि आज के युवाओं को नेताजी के आदर्शों पर चलना चाहिए।
राजकिशोर महतो ने नेताजी को युवाओं के लिए सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि नेताजी की सोच आज भी प्रासंगिक है। युवा अगर उनके जैसे साहस दिखाएं तो देश और मजबूत होगा।
विद्यार्थियों ने जीता दिल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं

कार्यक्रम में केंद्रीय विद्यालय और आर्मी स्कूल के छात्र-छात्राओं ने खूबसूरत सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। बच्चों ने नेताजी पर गीत गाए, नृत्य किए और भाषण दिए। सबने नेताजी के जीवन से जुड़ी बातें साझा कीं।
इसके अलावा भाषण प्रतियोगिता और पेंटिंग प्रतियोगिता भी हुई। इनमें अच्छा प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र दिए गए। बच्चों के चेहरों पर खुशी और गर्व साफ दिख रहा था। ऐसे कार्यक्रम बच्चों में देशभक्ति की भावना जगाते हैं।
नेताजी की विरासत आज भी जीवित
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था। वे आजाद हिंद फौज के संस्थापक थे। उनका नारा “दिल्ली चलो” और “तुम मुझे खून दो…” आज भी लोगों को जोश देता है। सरकार ने 2021 से उनकी जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाना शुरू किया। इसका मकसद युवाओं में साहस और बलिदान की भावना जगाना है।
रामगढ़ में यह आयोजन एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया जैसे संगठनों के सहयोग से हुआ। यह दिखाता है कि छोटे शहरों में भी नेताजी का सम्मान कितना गहरा है।
निष्कर्ष
कार्यक्रम का समापन ध्वजवंदन और राष्ट्रगान के साथ हुआ। सबने एक साथ “जय हिंद” का नारा लगाया। यह दिन सिर्फ जयंती नहीं, बल्कि पराक्रम का उत्सव था। नेताजी हमें सिखाते हैं कि देश के लिए कुछ भी बड़ा नहीं। आज के समय में हमें उनके जैसे साहसी और त्यागी बनना चाहिए। रामगढ़ के इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि नेताजी अमर हैं और उनकी सोच हमेशा जीवित रहेगी।










