Leh Ladakh Earthquake: लेह-लद्दाख में धरती डगमगाई, 5.7 की तीव्रता से आया भूकंप, कश्मीर तक पहुंचे झटके

Leh Ladakh Earthquake: हिली धरती, लेह में 5.7 मैग्नीट्यूड भूकंप, कश्मीर घाटी में लोग बाहर निकले

Leh Ladakh Earthquake: 19 जनवरी 2026 को सोमवार का दिन लद्दाख के लेह इलाके के लिए एक डरावना अनुभव लेकर आया। सुबह करीब 11 बजकर 51 मिनट पर धरती जोर से हिली। लोग घरों, दुकानों और ऑफिसों में थे कि अचानक सब कुछ हिलने लगा। बर्तन गिरे, फर्नीचर हिला और कई लोग डर के मारे बाहर निकल आए। यह भूकंप इतना तेज था कि लेह के अलावा आसपास के इलाकों में भी झटके महसूस हुए। कुछ जगहों पर लोग दहशत में चिल्लाने लगे और सुरक्षित जगह की तलाश में भागे।

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) ने बताया कि इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.7 मापी गई। यह काफी मजबूत स्तर का भूकंप माना जाता है, जो आमतौर पर लोगों को अच्छे से महसूस होता है और कभी-कभी छोटे-मोटे नुकसान भी पहुंचा सकता है। भूकंप का केंद्र लेह-लद्दाख क्षेत्र में ही था, जहां अक्षांश 36.71° उत्तर और देशांतर 74.32° पूर्व पर स्थित था। सबसे खास बात यह कि भूकंप की गहराई जमीन से 171 किलोमीटर नीचे थी। इतनी गहराई होने की वजह से सतह पर झटके तेज तो आए, लेकिन ज्यादा विनाशकारी नहीं हुए।

कश्मीर तक पहुंचे झटके, दिल्ली में भी हल्की कंपन

यह भूकंप सिर्फ लेह तक सीमित नहीं रहा। इसके झटके कश्मीर घाटी के कई हिस्सों में भी महसूस किए गए। श्रीनगर और आसपास के इलाकों में लोगों ने हल्की से मध्यम तीव्रता के कंपन बताए। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि झटके इतने मजबूत थे कि लोग घरों से बाहर आ गए और खुले मैदानों में इकट्ठा हो गए। लद्दाख हिमालय की गोद में बसा हुआ है, जहां पहले से ही भूकंप की गतिविधियां ज्यादा रहती हैं। यह इलाका हिमालयी बेल्ट का हिस्सा है, जहां प्लेटों की टक्कर से ऐसे झटके आम हैं।

दिलचस्प बात यह है कि कुछ जगहों पर, जैसे दिल्ली-एनसीआर में भी हल्के झटके महसूस किए गए। वहां तीव्रता करीब 2.8 के आसपास बताई गई। हालांकि दिल्ली में यह बहुत हल्का था, लेकिन लेह में स्थिति अलग थी। वहां की ऊंचाई और ठंडी हवा में यह कंपन और भी डरावना लग रहा था।

नुकसान कितना है?

अच्छी खबर यह है कि अभी तक किसी बड़े नुकसान या जान-माल की हानि की कोई पुष्ट रिपोर्ट नहीं आई है। लेह के कई इलाकों में इमारतें मजबूत हैं और गहराई ज्यादा होने से ज्यादा तबाही नहीं हुई। प्रशासन ने तुरंत अलर्ट जारी किया और लोगों से कहा कि वे सतर्क रहें। घरों में भारी सामान ऊपर न रखें, आपातकालीन किट तैयार रखें और अगर झटके आएं तो टेबल के नीचे छिप जाएं या खुले स्थान पर जाएं।

लद्दाख प्रशासन ने एडवाइजरी जारी की है कि आफ्टरशॉक्स (बाद के छोटे झटके) आ सकते हैं, इसलिए लोगों को सावधान रहना चाहिए। कई जगहों पर लोग अभी भी बाहर खुले में बैठे हैं और घर में जाने से डर रहे हैं। ठंड के मौसम में यह और भी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि लेह में तापमान बहुत कम होता है।

भूकंप क्यों आते हैं और लद्दाख क्यों संवेदनशील?

हमारी पृथ्वी की सतह कई बड़ी-बड़ी प्लेटों से बनी है, जो लगातार हिलती-डुलती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, दबाव बनता है और अचानक रिलीज होने पर भूकंप आता है। लद्दाख हिमालय पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है, जहां इंडियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट की टक्कर चल रही है। इसी वजह से यहां भूकंप ज्यादा आते हैं।

5.7 तीव्रता का मतलब है कि यह मध्यम से मजबूत कैटेगरी में आता है। रिक्टर स्केल पर:

  • 5.0 से 5.9 तक: मजबूत, सामान गिर सकता है, हल्का नुकसान हो सकता है।
  • 6.0 से ऊपर: बहुत खतरनाक, इमारतें गिर सकती हैं।

इस बार गहराई ज्यादा होने से सतह पर असर कम रहा। अगर गहराई कम होती तो नुकसान ज्यादा हो सकता था।

लोगों की प्रतिक्रिया और आगे क्या?

सोशल मीडिया पर लोग अपने अनुभव शेयर कर रहे हैं। कोई कह रहा है कि “पहली बार इतना तेज झटका लगा”, तो कोई लिख रहा है “सब बाहर आ गए, बच्चे रो रहे थे”। प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे इलाकों में हमेशा तैयार रहना चाहिए।

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