New Cremation Rules In Hapur: श्मशान घाट में अंतिम संस्कार से पहले अब अनिवार्य होगा ID वेरिफिकेशन

New Cremation Rules In Hapur: हापुड़ में हुआ पुतले का दाह संस्कार, बदले नियम, बिना पहचान पुष्टि नहीं होगा संस्कार

New Cremation Rules In Hapur: हापुड़ (Hapur) के ब्रजघाट श्मशान घाट (Brajghat Cremation Ground) में सामने आए चौंकाने वाले मामले ने पूरे प्रशासन को सख्ती बरतने पर मजबूर कर दिया है। दिल्ली (Delhi) से आए दो युवकों द्वारा प्लास्टिक के पुतले को ‘मृतक’ बताकर उसका अंतिम संस्कार करवाने की कोशिश ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था। घटना के वायरल होने के बाद अब श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। नए नियमों के तहत किसी भी मृतक के अंतिम संस्कार से पहले पहचान पत्र और चेहरे का मिलान अनिवार्य कर दिया गया है। इससे फर्जीवाड़े और बीमा धोखाधड़ी जैसे मामलों पर रोक लगाने की उम्मीद है। आखिर कैसे पकड़ी गई यह साजिश और अब क्या हैं नए नियम? चलिए जानते हैं विस्तार से…

हापुड़ का चौंकाने वाला मामला/New Cremation Rules In Hapur

हापुड़ (Hapur) में बीते दिनों सामने आया मामला प्रशासन और स्थानीय लोगों दोनों के लिए हैरान करने वाला था। ब्रजघाट श्मशान घाट (Braj Ghat Cremation Ground) पर दिल्ली (Delhi) के दो युवक—कमल सोमानी (Kamal Somani) और आशीष खुराना (Ashish Khurana) एक कार में प्लास्टिक का पुतला लेकर पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया कि यह ‘अंशुल’ नामक शख्स का शव है जिसकी मौत दिल्ली के एक अस्पताल में हुई है। कर्मचारियों ने जब पारंपरिक तरीके से रजिस्टर में एंट्री करने की बात कही, तो दोनों युवक टालमटोल करने लगे। कर्मचारी नितिन को शव का वजन असामान्य रूप से हल्का लगा, जिससे शक और बढ़ गया। इसी शंका ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया और पूरा मामला तेजी से सामने आया। घटनाक्रम की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को नए नियम लागू करने पड़े।

प्लास्टिक का पुतला और बीमा धोखाधड़ी की पूरी साजिश

जब श्मशान कर्मचारी नितिन ने कपड़ा हटाकर ‘शव’ का चेहरा देखने की कोशिश की, तब असली राज खुला। कफन हटते ही पता चला कि अंदर कोई इंसानी शव नहीं, बल्कि प्लास्टिक का पुतला रखा हुआ था। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई और दोनों युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई। पूछताछ में कमल सोमानी (Kamal Somani) ने खुलासा किया कि वह आर्थिक संकट में डूबा हुआ था और 50 लाख रुपये के कर्ज से परेशान था। उसने अपने दोस्त अंशुल के नाम पर कराए गए बीमे की रकम हासिल करने के लिए यह योजना रची थी। पुतले को शव बताकर अंतिम संस्कार करवाने से वह बीमा कंपनी को धोखा देने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने पूरे मामले को बीमा फर्जीवाड़ा करार देते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

प्रशासन की सख्ती और नई दिशा

घटना के सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन ने तुरंत जांच तेज कर दी। हापुड़ (Hapur) पुलिस ने न केवल दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया, बल्कि पूरे मामले को बीमा धोखाधड़ी और श्मशान व्यवस्था से छेड़छाड़ के गंभीर मामले के रूप में दर्ज किया। अधिकारियों ने इस बात पर चिंता जताई कि अगर कर्मचारी की सतर्कता न होती तो यह फर्जी अंतिम संस्कार सफल हो सकता था, जिससे बीमा कंपनी को भारी नुकसान होता। स्थानीय प्रशासन ने माना कि अंतिम संस्कार प्रक्रिया में पहचान की पुष्टि न होने से ऐसे अपराधों को बढ़ावा मिलता है। इसी आधार पर सुरक्षा और सत्यापन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए। सोशल मीडिया पर घटना के वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने भी सख्त नियमों की मांग की थी।

अब श्मशान में ऐसे होगा अंतिम संस्कार

घटना के बाद प्रशासन ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत अब किसी भी मृतक का अंतिम संस्कार बिना ID वेरिफिकेशन के नहीं किया जाएगा। कर्मचारी मृतक के चेहरे का मिलान उसके आधार कार्ड, पहचान पत्र या किसी भी मान्य दस्तावेज़ से करेंगे। रजिस्टर में नाम दर्ज होने के बाद ही अंतिम संस्कार की अनुमति दी जाएगी। यह नियम सभी श्मशान घाटों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे फर्जीवाड़े, बीमा धोखाधड़ी और पहचान छुपाने वाले अपराधों पर रोक लगेगी। नई व्यवस्था से अंतिम संस्कार प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनेगी। प्रशासन ने भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए निगरानी और चेकिंग को और कड़ा करने की भी बात कही है।

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