Nirvani Akhara Yagna : निर्वाणी अखाड़ा यज्ञ वेदी मंदिर विवाद में नया मोड़, महंत सत्य प्रकाश दास व परिवारों के आरोप–प्रत्यारोप से मामला और जटिल

Nirvani Akhara Yagna : निर्वाणी अखाड़ा यज्ञ वेदी मंदिर को लेकर जारी विवाद लगातार नया मोड़ ले रहा है। निर्मोही अखाड़ा के महंत सत्य प्रकाश दास ने प्रेस वार्ता कर पूरे मामले की जानकारी दी और बताया कि वर्ष 1993 में रामदुलारे दास महाराज को अखाड़ा का महंत बनाया गया था। वर्ष 2009 में सत्य प्रकाश दास सेवा में जुड़े और बाद में मुख्तार-ए-आम बनाए गए। इसके बाद 2019 में चित्रकूट के विभिन्न अखाड़ों के संतों की मौजूदगी में उन्हें निर्विवाद रूप से महंत नियुक्त किया गया।

मंदिर परिसर में कुल 18 दुकानें, कुछ कमरे और पार्किंग का संचालन किया जाता है। महंत के अनुसार, महेंद्र तिवारी वर्ष 2023 से अपनी पत्नी के साथ इसी परिसर में रह रहे थे। उन्होंने दावा किया कि पार्किंग संचालन के दौरान यात्रियों से अभद्रता और नशेबाजी की शिकायतें मिलने पर तिवारी को ज़िम्मेदारी से हटाना पड़ा, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ।

महंत का आरोप है कि तिवारी और कुछ लोगों ने मिलकर मंदिर की जमीन और पद को हथियाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर फर्जी महंत बनाने की कोशिश की, जिसे प्रशासन की हस्तक्षेप से रोका गया। इसके बाद 145 की कार्रवाई कराई गई और फिर एक महिला की ओर से महंत समेत तीन लोगों पर बलात्कार के आरोप लगाए गए। महंत के अनुसार, जांच में आरोप झूठे पाए गए और मामला खारिज हुआ। हालांकि महिला ने न्यायालय से विवेचना कराने का आदेश प्राप्त किया है।

दूसरी ओर, पीड़ित महिला का कहना है कि कई वर्षों से उसके साथ जबरन शोषण हुआ और वह न्याय के लिए लगातार भटकती रही है। वह अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद रखती है।

इसी विवाद के बीच महिला के ससुर ने बताया कि महिला ने उन पर भी दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कर रखा है। उनका कहना है कि महिला अक्सर जमीन और संपत्ति के लिए विवाद करती है और परिवार पर झूठे आरोप लगाना उसकी आदत बन चुकी है। महिला के जेठ ने भी आरोप लगाते हुए कहा कि पूरा घर और संपत्ति उसके कब्जे में होने के बावजूद उसने दहेज उत्पीड़न का केस कर रखा है, जिससे परिवार परेशान है। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे और गंभीर आरोपों के चलते मामला और अधिक जटिल हो गया है। मंदिर की जमीन, पारिवारिक विवाद, फर्जी दस्तावेज़, आरोप–प्रत्यारोप और आपराधिक शिकायतों ने पूरे प्रकरण को बहुआयामी बना दिया है। प्रशासन इस संवेदनशील विवाद की निगरानी कर रहा है और आगे की कानूनी प्रक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

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