Odisha Plastic Bottle Petrol Ban Violation : ओडिशा सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल को प्लास्टिक की बोतलों या अनधिकृत कंटेनरों में बेचने पर सख्त प्रतिबंध लगाया है। यह फैसला जन सुरक्षा, आग लगने के खतरे और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर लिया गया था, खासकर कुछ हिंसक घटनाओं के बाद। लेकिन राज्य के भद्रक जिले में एक पेट्रोल पंप इस आदेश को खुलेआम तोड़ रहा है। यहां कर्मचारी प्लास्टिक के ड्रम में ईंधन भरकर बेच रहे हैं, जो न केवल सरकारी नियमों की अवहेलना है, बल्कि आम लोगों की जान-माल के लिए बड़ा खतरा भी पैदा कर रहा है। पत्रकार राजीव कुमार दास ने इस मुद्दे को उजागर किया है और सवाल उठाया है कि प्रशासन इस उल्लंघन पर चुप क्यों है?
सरकार का क्या आदेश?

जुलाई 2025 में ओडिशा सरकार ने फूड सप्लाईज एंड कंज्यूमर वेलफेयर विभाग के माध्यम से पूरे राज्य में पेट्रोल-डीजल की प्लास्टिक बोतलों में बिक्री, भंडारण और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। आदेश में स्पष्ट कहा गया कि पेट्रोल पंप केवल अधिकृत कंटेनरों जैसे टिन के डिब्बे या कांच की बोतलों में ही ईंधन बेच सकते हैं, और वह भी मुख्य रूप से कृषि कार्यों (जैसे घास काटने वाली मशीनें, जनरेटर) के लिए लाइसेंसधारकों को।
सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए कि वे नियमित चौकसी और सरप्राइज जांच सुनिश्चित करें। उल्लंघन करने वालों पर पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माना, लाइसेंस रद्द करना और कानूनी मुकदमा शामिल है। पेट्रोल पंपों पर बोर्ड लगाने का भी आदेश दिया गया: “पेट्रोल/डीजल प्लास्टिक बोतलों या अनधिकृत कंटेनरों में नहीं बेचा जाएगा। उल्लंघनकर्ताओं पर कानूनी कार्रवाई होगी।”
यह प्रतिबंध इसलिए जरूरी था क्योंकि प्लास्टिक कंटेनरों में ईंधन भरने से स्थिर विद्युत (स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी) बन सकती है, जो आग लगने का कारण बनती है। साथ ही, प्लास्टिक रासायनिक प्रतिक्रिया से ईंधन की गुणवत्ता खराब हो सकती है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। राज्य में पहले भी ऐसी घटनाएं हुईं, जिनमें प्लास्टिक बोतलों में रखे पेट्रोल से आग लगने के मामले सामने आए।
भद्रक जिले में खुला उल्लंघन: बिदेईपुर का मामला
भद्रक जिले के बसुदेवपुर ब्लॉक के बिदेईपुर इलाके में स्थित एक पेट्रोल पंप पर यह नियम धज्जियां उड़ाए जा रहे हैं। यहां कर्मचारी खुले तौर पर प्लास्टिक के बड़े-बड़े ड्रम में पेट्रोल और डीजल भरकर ग्राहकों को बेच रहे हैं। एक कर्मचारी तपस जेना के नाम का भी जिक्र सामने आया है, जो इस अवैध गतिविधि में शामिल बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह काम दिनदहाड़े हो रहा है और पंप मालिक व कर्मचारी मिलकर इसे अंजाम दे रहे हैं। ग्राहक आसानी से प्लास्टिक ड्रम में ईंधन खरीद ले जाते हैं, बिना किसी रोक-टोक के। यह न केवल सरकारी आदेश की अवहेलना है, बल्कि पेट्रोलियम नियमों का भी उल्लंघन है, क्योंकि अनधिकृत कंटेनरों में ईंधन का भंडारण और परिवहन खतरनाक है।
प्रशासन की चुप्पी: सवालों के घेरे में नया कानी डीह पुलिस
इस गंभीर उल्लंघन के बावजूद स्थानीय पुलिस प्रशासन, खासकर नया कानी डीह थाना क्षेत्र की पुलिस, पूरी तरह चुप है। कोई छापेमारी, कोई जांच या कोई कार्रवाई की खबर नहीं है। राज्य स्तर पर जहां सख्ती बरती जा रही है और कई जगहों पर जुर्माने वसूले जा रहे हैं, वहीं भद्रक के इस इलाके में नियमों को ताक पर रखा गया लगता है।
कई सवाल उठ रहे हैं:
- क्या स्थानीय स्तर पर राजनीतिक या अन्य दबाव काम कर रहा है?
- जिला प्रशासन और पुलिस को इस उल्लंघन की जानकारी है या नहीं?
- यदि जानकारी है, तो कार्रवाई में देरी क्यों?
- क्या यह सिर्फ एक पंप तक सीमित है या राज्य के अन्य हिस्सों में भी ऐसा हो रहा है?
पत्रकार राजीव कुमार दास ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि सरकार का आदेश कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीन पर लागू होना जरूरी है। आम जनता की सुरक्षा दांव पर लगी है, और ऐसे उल्लंघन से बड़ा हादसा हो सकता है।
निष्कर्ष
ओडिशा सरकार ने जन सुरक्षा के लिए जो कदम उठाया, वह सराहनीय है, लेकिन यदि नियमों का पालन नहीं हो रहा तो इसका क्या मतलब? भद्रक जिले के इस मामले की तत्काल जांच होनी चाहिए। संबंधित पेट्रोल पंप के खिलाफ सख्त कार्रवाई, लाइसेंस रद्द करने और जुर्माने के साथ-साथ पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठने चाहिए।










