Operation Muskan Bhopal : पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन मुस्कान’ अभियान में भोपाल पुलिस कमिश्नरेट को बड़ी सफलता मिली है। नवंबर महीने में कुल 69 गुमशुदा नाबालिग लड़कियों और 11 नाबालिग लड़कों को सकुशल बरामद किया गया। इनमें से कई बच्चे सालों से लापता थे, तो कुछ तो महज कुछ महीने पहले घर से निकले थे। पुलिस की मेहनत और तकनीकी मदद से बच्चों को उनके परिजनों से मिलाया जा सका। आइए जानते हैं तीन खास कहानियां जो पुलिस की लगन को सलाम करती हैं।
12 साल बाद मिली बेटी, अब खुद मां बन चुकी है

साल 2013 में पिपलानी थाना क्षेत्र की एक 14 साल की लड़की 8वीं क्लास में पढ़ती थी। मां (जो खुद टीचर हैं) से पढ़ाई को लेकर झगड़ा हुआ तो गुस्से में घर से निकल गई। परिजनों ने तुरंत गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई, लेकिन 12 साल तक कोई सुराग नहीं मिला। कई टीमें अलग-अलग शहरों में तलाश करती रहीं, पर हाथ खाली रहे।
ऑपरेशन मुस्कान में इस पुराने केस को फिर उठाया गया। विशेष टीम बनी। पहले तो परिजनों-संदिग्धों से कुछ पता नहीं चला, लेकिन एक गुप्त सूचना मिली कि लड़की एक साल पहले रायसेन में अपने पति और बच्चे के साथ दिखी थी। टीम रायसेन पहुंची, लोगों पर नजर रखी, कॉल डिटेल्स खंगाले। आखिरकार पता चला कि वह चेन्नई में नौकरी करती है और अभी भोपाल आई हुई है।
पुलिस ने दबिश दी और 12 साल बाद लड़की को बरामद कर लिया। अब उसकी उम्र 26 साल है। उसने अपनी पूरी कहानी सुनाई – घर से निकलकर भोपाल स्टेशन पहुंची, गुजरात जाने वाली ट्रेन में बैठ गई, वहां काम नहीं मिला तो वापस भोपाल आई। स्टेशन पर रायसेन का एक परिचित लड़का मिला जो चेन्नई में काम करता था। उसके साथ चेन्नई चली गई। 18 साल पूरा होते ही दोनों ने शादी कर ली और अब एक बच्चा भी है। परिजनों से मिलते ही घर में खुशी की लहर दौड़ गई।
98% अंक लाने वाली बेटी घर छोड़कर भागी, इंदौर से मिली
स्टेशन बजरिया क्षेत्र की 17 साल की होनहार लड़की ने 12वीं में 98% अंक लिए थे। जनवरी 2025 में पिता से किसी बात पर अनबन हो गई और वह घर छोड़कर चली गई। परिजनों ने गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने फौरन तलाश शुरू की। दूरदर्शन और सोशल मीडिया पर खबर चलवाई, 10 हजार रुपये इनाम घोषित किया।
भोपाल रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी में लड़की गोरखपुर एक्सप्रेस में अकेले बैठी दिखी। पुलिस ने ट्रेन के पूरे रूट – बीना, ललितपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, गोरखपुर तक 13 स्टेशनों पर टीमें भेजीं। हर जगह पोस्टर चिपकाए, जीआरपी को सूचना दी, सीसीटीवी खंगाले, यात्रियों के मोबाइल नंबर तक चेक किए।
परिजनों के फोन पर नजर रखी गई। आखिरकार एक सुराग पिता के फोन से मिला। पुलिस की टीम इंदौर पहुंची और 6 नवंबर 2025 को लड़की को सकुशल बरामद कर लिया। लड़की ने बताया कि वह और पढ़ना चाहती थी, लेकिन घर में कुछ पारिवारिक दिक्कतें थीं, इसलिए भाग आई थी। भोपाल से ललितपुर गई, फिर इंदौर पहुंच गई। परिजनों को सौंपते वक्त मां-बाप की आंखों में आंसू थे।
4 साल से गायब 16 साल की बच्ची बैंगलौर से 400 किमी दूर फैक्ट्री में मिली
बागसेवनिया थाना क्षेत्र की 16 साल की लड़की करीब 4 साल पहले मां से झगड़ा करके घर से भाग गई थी। 7 नवंबर 2025 को परिजनों ने फिर से तहरीर दी। पुलिस ने नई गुमशुदगी दर्ज की और तुरंत टीमें गठित कीं।
पड़ोस के एक लड़के ने बताया कि उसने इंस्टाग्राम पर लड़की की फोटो देखी है। फोटो में बैकग्राउंड फैक्ट्री हॉस्टल जैसा था। पुलिस ने उस लड़के से मिले नंबर की लोकेशन चेक की – डिंडीगुल (तमिलनाडु) दिखी। गूगल पर सर्च किया तो लोकेशन और फोटो का बैकग्राउंड मिल गया।
पुलिस टीम बैंगलौर से 400 किमी दूर डिंडीगुल पहुंची। वहां डॉलर बनाने वाली फैक्ट्री के हॉस्टल में सघन तलाश की और लड़की को बरामद कर लिया। उसने बताया कि मां से झगड़ा हुआ तो भोपाल स्टेशन से मद्रास जाने वाली ट्रेन में बैठ गई। रास्ते में एक महिला यात्री ने डिंडीगुल में फैक्ट्री में काम दिलवा दिया। वह वहीं हॉस्टल में रहकर काम कर रही थी।
परिजनों को जब बेटी मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा।
पुलिस की मेहनत रंग लाई
पुलिस आयुक्त हरिनारायणाचारी मिश्रा, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अवधेश गोस्वामी और श्रीमती मोनिका शुक्ला के मार्गदर्शन में भोपाल पुलिस ने नवंबर महीने में ही 80 बच्चों को उनके घर वापस पहुंचाया। सीसीटीवी, कॉल डिटेल्स, सोशल मीडिया, गुप्त सूचनाएं और लगातार की जाने वाली दबिश – इन सबकी बदौलत ऑपरेशन मुस्कान भोपाल में सचमुच मुस्कान बिखेर रहा है।










