Raebareli Ancient Idol Theft: रायबरेली के डलमऊ क्षेत्र में एक पुराने मंदिर से चोरी हुई करोड़ों रुपये की कीमत वाली अष्टधातु की मूर्तियों का मामला पुलिस ने सुलझा लिया है। पुलिस ने चोरी का मास्टरमाइंड बताए जा रहे एक कथित पत्रकार सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक मुख्य आरोपी अभी फरार है। मूर्तियां बरामद हो गई हैं और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से क्षेत्र में राहत की लहर है। यह घटना 14 दिसंबर की रात की है, जब चोरों ने मंदिर का ताला तोड़कर राम, सीता (जानकी) और लक्ष्मण की तीन प्राचीन मूर्तियां चुरा ली थीं।
चोरी की घटना कैसे हुई/Raebareli Ancient Idol Theft
डलमऊ थाना क्षेत्र के रामपुर बरारा गांव में स्थित प्राचीन जानकी शरण मंदिर (या रामपुर बरारा मंदिर) से यह चोरी हुई। मूर्तियां अष्टधातु की बनी हुई हैं और करीब 200 साल पुरानी बताई जा रही हैं। प्रत्येक मूर्ति का वजन लगभग 35 किलो था, जिसकी बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। चोर रात के अंधेरे में मंदिर में घुसे, ताला तोड़ा और तीनों मूर्तियां लेकर फरार हो गए।

सुबह जब मंदिर के पुजारी राजा राम बाजपेई पूजा करने पहुंचे तो उन्हें चोरी का पता चला। उन्होंने तुरंत डलमऊ पुलिस को सूचना दी और तहरीर दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। चोरी की यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई थी और पुलिस पर दबाव बढ़ रहा था कि एक सप्ताह से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद मामले का खुलासा नहीं हो पाया था।
पुलिस की सक्रियता और गिरफ्तारियां
कोतवाली प्रभारी श्याम कुमार पाल की अगुवाई में डलमऊ पुलिस और एसओजी टीम ने मिलकर मामले की छानबीन की। मात्र 11 दिनों में पुलिस ने बड़ा सफलता हासिल की। पुलिस ने कोतवाली क्षेत्र के पखरौली के पास छापेमारी कर आरोपियों को पकड़ा।
गिरफ्तार आरोपियों में सबसे चौंकाने वाला नाम अमन यादव का है, जो खुद को एक स्थानीय अखबार का पत्रकार बताता है। पुलिस के अनुसार, अमन यादव ही इस चोरी का मास्टरमाइंड था। वह पुलिस की हर गतिविधि पर नजर रखता था और चोरी की खबर को खुद अखबार में छपवाकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था। अमन यादव थाना गदागंज क्षेत्र के बीबनहार का रहने वाला है और पहले भी एक चोरी के मामले में शामिल रहा है।
अन्य गिरफ्तार आरोपी हैं:
- आयुष त्रिवेदी, निवासी कल्लू मिश्र का पुरवा, पोठई, थाना डीह।
- शिवांक उर्फ शिवा मिश्रा, निवासी बेहटा कला, थाना लालगंज।
- अभिषेक यादव, निवासी पूरे माधव बक्स चकबल्ली हार, थाना भदोखर।
ये सभी आरोपी पहले से एक-दूसरे को जानते थे और जुलाई महीने में भी एक चोरी की घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे।
मूर्तियां कैसे बरामद हुईं
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि चोरी की योजना अभय यादव उर्फ सरकार ने बनाई थी। अभय ने बताया था कि उसके पड़ोस के गांव में 200 साल पुरानी मूर्तियां हैं, जिन्हें गुजरात में बेचकर करोड़ों रुपये कमाए जा सकते हैं और पैसा आपस में बांट लिया जाएगा।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस को पता चला कि मूर्तियां मतौली पुर निवासी अमन यादव के मुर्गी फार्म के पीछे जमीन में गाड़कर छिपाई गई थीं। पुलिस ने वहां छापा मारकर तीनों मूर्तियां बरामद कर लीं। साथ ही आरोपियों के पास से 30 हजार रुपये नकदी भी मिली। अभय यादव उर्फ सरकार अभी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है। जल्द गिरफ्तारी की उम्मीद है।
आरोपी क्यों कर रहे थे चोरी
आरोपियों का मकसद मूर्तियों को गुजरात में ऊंचे दाम पर बेचना था। अष्टधातु की मूर्तियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत कीमती होती हैं। ये लोग पहले से चोरी की फिराक में थे और मंदिर की कमजोर सुरक्षा का फायदा उठाया। सबसे हैरानी की बात यह कि मास्टरमाइंड अमन यादव पुलिस पर नजर रखकर खुद को सुरक्षित समझ रहा था, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी से उसका प्लान फेल हो गया।
पुलिस और समाज की प्रतिक्रिया
पुलिस अधीक्षक यशवीर सिंह ने इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्राचीन धरोहरों की चोरी जैसे मामलों में पुलिस जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। डलमऊ पुलिस की इस सफलता से क्षेत्र के लोग खुश हैं और मंदिरों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
यह घटना हमें सिखाती है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा कितनी जरूरी है। पुरानी मूर्तियां सिर्फ धातु नहीं, बल्कि हमारी आस्था और संस्कृति का हिस्सा हैं। पुलिस की तारीफ करनी होगी कि इतने कम समय में उन्होंने न सिर्फ मूर्तियां बरामद कीं, बल्कि अपराधियों को भी सलाखों के पीछे पहुंचाया।










