Raebareli: रायबरेली जिले के खीरो थाना क्षेत्र के ग्राम पाहो से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक पति अपनी पत्नी और तीन मासूम बच्चों को छोड़कर दूसरी महिला के साथ लिविंग रिलेशन में रह रहा है। इतना ही नहीं, विरोध करने पर पत्नी को लगातार मारपीट, प्रताड़ना और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। परेशान पीड़िता अपने तीनों बच्चों के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची और न्याय की गुहार लगाई।
दूसरी महिला के साथ रहने का आरोप
पीड़ित महिला सरिता जायसवाल ने पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि उसकी शादी वर्ष 2016 में खीरो थाना क्षेत्र के ग्राम पाहो निवासी गौरव जायसवाल के साथ हुई थी। शादी के बाद उनके तीन बच्चे हुए। पीड़िता का कहना है कि शुरूआत में सब कुछ ठीक रहा, लेकिन कुछ समय बाद उसका पति दूसरी महिला के संपर्क में आ गया और धीरे-धीरे पत्नी व बच्चों से दूरी बनाकर दूसरी महिला के साथ रहने लगा।

महिला थाने में हुई थी सुलह, फिर भी नहीं बदले हालात
महिला ने आरोप लगाया कि उसका पति आए दिन उसके साथ झगड़ा, गाली-गलौज और मारपीट करता था। फरवरी 2026 से प्रताड़ना और ज्यादा बढ़ गई। इस संबंध में उसने पहले महिला थाने में शिकायत भी की थी, जहां सुलह-समझौता कराया गया था। लेकिन समझौते के बाद भी पति अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और पत्नी के साथ रहने के बजाय दूसरी महिला के साथ ही रहने लगा।
“बेल्ट से पीटा, गला दबाकर मारने की कोशिश”
पीड़िता ने आज दिनाँक 22 मई 2026 दिन शुक्रवार को समय करीब 12 बजे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर बताया कि 14 मई 2026 की रात उसके पति ने उसे लात-घूंसों और बेल्ट से बेरहमी से पीटा तथा गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की। किसी तरह उसने अपनी जान बचाई। महिला का आरोप है कि उसका पति खुलेआम कहता है — “मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, जहां शिकायत करनी है कर लो।”
तीनों बच्चों के साथ दर-दर भटकने को मजबूर
अब हालत यह है कि पीड़िता अपने तीनों बच्चों के साथ दर-दर भटकने को मजबूर है। न तो उसे पति का सहारा मिल रहा है और न ही बच्चों के पालन-पोषण की कोई व्यवस्था। पीड़ित महिला ने पुलिस अधीक्षक से आरोपी पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
घरेलू हिंसा पर फिर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने एक बार फिर महिला सुरक्षा और घरेलू हिंसा को लेकर प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि आखिर सुलह-समझौते के बाद भी अगर पीड़िता सुरक्षित नहीं है, तो जिम्मेदारों की जवाबदेही कौन तय करेगा?










