रायबरेली: विद्यालय प्रबंधन का गैर-जिम्मेदाराना रवैया, शिक्षक 8:40 बजे तक नहीं पहुंचे; बच्चे खुद प्रार्थना करने को मजबूर

प्राथमिक विद्यालय मनसुखमऊ में 40 मिनट तक नहीं पहुंचे शिक्षक, अभिभावकों में आक्रोश; विद्यालय प्रबंधन पर भी उठे सवाल

रायबरेली जिले के विकासखंड डलमऊ अंतर्गत विझलामऊ गांव के प्राथमिक विद्यालय मनसुखमऊ में विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही की एक और शिकायत सामने आई है। अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि स्कूल की शिक्षिकाएं नियमित रूप से देर से पहुंचती हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई और अनुशासन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

घटना का विवरण

सुबह 8:00 बजे स्कूल खुलने का निर्धारित समय है। अभिभावकों के अनुसार, बच्चे समय पर यानी 8:00 बजे स्कूल पहुंच गए और 8:15 बजे तक उन्होंने खुद ही प्रार्थना कर ली। लेकिन 8:40 बजे तक कोई शिक्षिका या अध्यापक स्कूल नहीं पहुंची। बच्चों ने बताया कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि मैडम की पुरानी रिवायत है। शिक्षिकाओं ने बच्चों को पहले से ही कह रखा है कि अगर वे लेट हों तो बच्चे खुद से प्रार्थना कर लें।

इस तरह के रवैये से बच्चों में अनुशासन की भावना कमजोर हो रही है और शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है। अभिभावक कहते हैं कि शिक्षा तो दूर की बात है, पहले तो शिक्षक समय पर विद्यालय आना शुरू करें।

खंड शिक्षा अधिकारी पर भी गंभीर आरोप

अभिभावकों ने खंड शिक्षा अधिकारी पर सरपरस्ती का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ऐसे अध्यापक और अध्यापिकाएं खुलेआम गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार कर रही हैं, लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी इनकी सरपरस्ती करते हैं। अधिकारी खुद जमीन पर उतरकर जायजा नहीं लेते और न ही ऐसे मामलों में कोई सख्त कार्रवाई करते हैं।

इस प्रकरण में स्थानीय स्तर पर काफी रोष व्याप्त है। अभिभावक मांग कर रहे हैं कि संबंधित शिक्षिकाओं के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए और स्कूल में समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्त मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की जाए।

यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा की दयनीय स्थिति को फिर से उजागर करती है, जहां बच्चों का भविष्य शिक्षकों की लापरवाही का शिकार हो रहा है।

अभिभावकों की मांग

  • शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
  • खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा फील्ड विजिट और जायजा लिया जाए।
  • दोषी शिक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।

यदि इस मामले में कोई आधिकारिक जांच या जवाब आता है तो आगे की जानकारी भी साझा की जाएगी। ग्रामीण शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए ऐसे मामलों पर सख्त नजर रखना जरूरी है।

नोट : यह खबर स्थानीय अभिभावकों की शिकायत और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है।

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