रायबरेली ( Raebareli ) जिले के बेलाभेला ग्राम पंचायत के बाबा का पुरवा हनुमानगंज में ग्राम प्रधान विनय यादव और हल्का लेखपाल पंकज मौर्या द्वारा कथित अत्याचारों के खिलाफ ग्रामीणों ने एकजुट होकर आवाज उठाई है। विश्व दलित परिषद (विदप) के बैनर तले अध्यक्ष राजेश कुरील की अगुवाई में दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा, जिसमें ग्राम प्रधान और लेखपाल पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
ग्रामीणों के आरोप: धमकी और अवैध वसूली

पीड़ित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान विनय यादव और लेखपाल पंकज मौर्या ने घरौनी (घर का मालिकाना हक) बनाने, आवासीय पट्टा और कृषि पट्टा दिलाने के नाम पर प्रति व्यक्ति 20,000 रुपये की मांग की। मांग पूरी न करने पर ग्रामीणों को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली 2016 के प्रपत्र 20 (आर.सी.) के तहत बेदखली की नोटिस जारी कर जमीन से उजाड़ने की धमकी दी जा रही है। ग्रामीण राजेंद्र रैदास बाबा ने बताया कि ग्राम प्रधान के चहेते राजेंद्र यादव फौजी, सुरेंद्र यादव, दैनी यादव, शिवम यादव, लखन यादव और उनकी पत्नी ने गाटा संख्या 3797/1.157 हेक्टेयर पर जबरन कब्जा करवाकर बस्ती में बसावट कराई है। इस दौरान राजेंद्र यादव फौजी के परिवार ने लाठी-डंडों और सरियों से मारपीट कर ग्रामीणों को डराया-धमकाया।
ग्रामीणों ने बताया कि बस्ती में अधिकांश निवासी अनुसूचित जाति, दलित और पिछड़े समाज से हैं, जिनके पास कृषि कार्य के लिए पर्याप्त भूमि नहीं है। उक्त भूमि पर वर्षों से सरकारी कॉलोनी और शौचालय बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तहसील प्रशासन द्वारा बेदखली की कार्रवाई की गई, तो उन्हें गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
अवैध पट्टे और जमीन हड़पने का आरोप
विश्व दलित परिषद के नेता इंद्र बहादुर यादव ने गंभीर खुलासा करते हुए बताया कि ग्राम प्रधान विनय यादव के पिता स्वर्गीय रामानंद यादव, जो प्राथमिक विद्यालय में सरकारी शिक्षक थे, ने अपने प्रभाव और धनबल का उपयोग कर तहसील प्रशासन की मिलीभगत से हमीरगांव में स्थित सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से पट्टा हासिल किया। इन जमीनों में गाटा संख्या 2923/0.360 हेक्टेयर, 2928/0.0440 हेक्टेयर, 2929/0.0440 हेक्टेयर, 2930/0.0790 हेक्टेयर, 3419ख/0.304 हेक्टेयर और 3420 शामिल हैं, जो सरकारी अभिलेखों में मजटिया तालाब और बंजर जमीन के रूप में दर्ज हैं। इन जमीनों का पट्टा रामानंद यादव के नाम कराया गया, जो अब उनके पुत्रों ओम प्रकाश, विनय कुमार, वीरेंद्र कुमार और सुरेंद्र कुमार के नाम अवैध रूप से खतौनी में दर्ज है।
इंद्र बहादुर ने मांग की कि उच्च अधिकारियों द्वारा इन अवैध पट्टों की जांच कराकर उन्हें निरस्त किया जाए और अवैध कब्जेदारों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, इन जमीनों को जनहित और समाजहित में ग्राम समाज में निहित किया जाए।
ग्रामीणों की मांग: त्वरित कार्रवाई और सुरक्षा
ज्ञापन सौंपने वालों में रमेश गौतम, सुमन, कमला, रामदेव, राम निवास गौतम, राम कुमार, अमृत पासी, आशीष यादव सहित दर्जनों ग्रामीण शामिल थे। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि ग्राम प्रधान और लेखपाल के अत्याचारों पर तत्काल रोक लगाई जाए, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उनके अधिकारों की रक्षा की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया है कि उनकी शिकायतों की जांच की जाएगी। हालांकि, अभी तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। ग्रामीणों का कहना है कि वे प्रशासन के जवाब का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान होगा।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नेताओं की मिलीभगत के गंभीर मुद्दे को उजागर किया है। ग्रामीणों की मांग है कि न केवल इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।










