Ganesh Visarjan 2026: गणेश चतुर्थी के मौके पर घर-घर विराजे भगवान गणेश की पूजा के बाद अब कई परिवार बप्पा को विदाई देने की तैयारी में हैं। कुछ घरों में गणपति की स्थापना डेढ़ दिन के लिए की जाती है। ऐसे में 14 सितंबर को स्थापित किए गए गणपति का विसर्जन 15 सितंबर को किया जाएगा। विदाई से पहले पूजा की कुछ परंपराएं पूरी करना शुभ माना जाता है।
डेढ़ दिन का मतलब 36 घंटे नहीं

गणपति को डेढ़ दिन रखने को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम समय को लेकर होता है। डेढ़ दिन का अर्थ यह नहीं है कि स्थापना के ठीक 36 घंटे बाद ही मूर्ति का विसर्जन किया जाए। स्थापना के अगले दिन उत्तर पूजा और आरती के बाद स्थानीय पंचांग में बताए गए उपयुक्त समय पर विसर्जन किया जा सकता है। इसलिए केवल घंटे गिनने के बजाय स्थानीय मुहूर्त को प्राथमिकता देना बेहतर है।
विसर्जन से पहले जरूर करें उत्तर पूजा
बप्पा को विदा करने से पहले घर में विधि-विधान से पूजा करें। गणपति को दूर्वा, फूल, फल और सात्विक भोग अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद आरती करें और पूजा में जाने-अनजाने हुई किसी भूल के लिए भगवान गणेश से क्षमा मांगें। परिवार की परंपरा के अनुसार अगले वर्ष फिर घर आने का निमंत्रण देकर गणपति को विदाई देना भी कई जगहों पर किया जाता है।
बप्पा को विदा करते समय क्या रखें साथ?
विसर्जन के समय गणपति की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक चौकी या आसन से उठाया जाता है। इसके बाद परिवार के सदस्य श्रद्धा के साथ उन्हें विसर्जन स्थल तक ले जाते हैं। पूजा सामग्री को इधर-उधर फेंकने के बजाय अलग रखना बेहतर है। इससे विसर्जन स्थल पर साफ-सफाई बनी रहती है और धार्मिक सामग्री के निपटारे में भी आसानी होती है।
अचानक तारीख बदल जाए तो क्या करें?
कई बार बीमारी, यात्रा, मौसम या दूसरी पारिवारिक परिस्थितियों के कारण तय कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। श्रद्धा के साथ गणपति से क्षमा प्रार्थना कर परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा की अवधि में बदलाव किया जा सकता है। जरूरत होने पर पुरोहित या स्थानीय आचार्य से सलाह लेना भी उचित रहेगा।
घर पर विसर्जन करना हो तो रखें सावधानी
मिट्टी से बनी छोटी गणपति प्रतिमा का विसर्जन कई परिवार घर में पानी से भरे बड़े पात्र में करते हैं। मूर्ति के घुलने के बाद बची मिट्टी को पौधों या गमलों में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि प्रतिमा किस सामग्री से बनी है, इसकी जानकारी जरूर रखें। प्लास्टर ऑफ पेरिस या रासायनिक रंगों वाली मूर्तियों के मामले में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
कृत्रिम कुंड का करें इस्तेमाल
जहां नगर निकाय या प्रशासन ने गणपति विसर्जन के लिए कृत्रिम कुंड बनाए हैं, वहां उनका उपयोग करना बेहतर विकल्प है। सार्वजनिक तालाब, नदी या अन्य जलस्रोतों में विसर्जन करते समय स्थानीय नियमों का पालन करें। पूजा के फूल, कपड़े और अन्य सामग्री को जलस्रोत में डालने से बचना चाहिए।
15 सितंबर को होगी डेढ़ दिन के गणपति की विदाई
2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई गई है। डेढ़ दिन के गणपति रखने वाले परिवार 15 सितंबर को बप्पा का विसर्जन कर रहे हैं। विसर्जन का सही समय शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अंतिम रूप से अपने क्षेत्र का मुहूर्त देखकर ही विसर्जन की तैयारी करें। आखिर में सबसे अहम बात यही है कि गणपति की विदाई पूरे सम्मान, श्रद्धा और भक्ति के साथ हो।










