Rural School Closure Protest: रायबरेली जिले के गदागंज विकासखंड अंतर्गत दीन शाह गौरा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय गोंडा को बंद किए जाने के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों ने शनिवार को जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल के विलय के बाद बच्चों को करीब 2 किलोमीटर दूर देवगना कीरतपुर चरुहार स्थित स्कूल जाना पड़ रहा है, जिससे उनकी शिक्षा और सुरक्षा दोनों पर गहरा असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने तत्काल स्कूल दोबारा खोलने की मांग की है, जबकि खंड विकास अधिकारी ने जांच के बाद जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
स्कूल बंद होने से ग्रामीणों में आक्रोश/Rural School Closure Protest
प्राथमिक विद्यालय गोंडा लगभग 25 वर्ष पहले बनवाया गया था। यह गांव के बच्चों के लिए शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, यहां रोजाना 45 से 50 बच्चे पढ़ाई करते थे। लेकिन हाल के वर्षों में सरकारी नीति के तहत कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के विलय का सिलसिला चल रहा है, जिसके चलते इस स्कूल को भी बंद कर दिया गया और इसका विलय 2 किलोमीटर दूर देवगना कीरतपुर चरुहार के स्कूल में कर दिया गया।

इस फैसले से गांव के छोटे-छोटे बच्चे अब प्रतिदिन पैदल ही इतनी लंबी दूरी तय कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह दूरी बच्चों के लिए न केवल थकान भरी है, बल्कि खतरनाक भी साबित हो रही है। रास्ते में आवारा कुत्तों के झुंड और निराश्रित मवेशियों का खतरा बना रहता है। कई बार बच्चे डर के मारे स्कूल जाने से कतराते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरा भय व्याप्त है।
ग्रामीणों ने उठाई आवाज, किया धरना-प्रदर्शन
शनिवार को गांव के सैकड़ों ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। पूर्व प्रधान शिव मोहन त्रिवेदी, राधा कृष्ण त्रिवेदी, धीरज बाजपेई, धर्मेश तिवारी, रामबाबू शुक्ला, बृजेश मौर्य, रामबरन, सविता, अनूप त्रिवेदी, अतुल त्रिवेदी, अंशु मिश्रा, शुभम जायसवाल, महेश तिवारी, मनोज तिवारी, महाजन मिश्रा, राम जी मिश्रा, मोहित कुमार, रमाकांत त्रिवेदी सहित दर्जनों ग्रामीणों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और बैनर-तख्तियां लेकर स्कूल खोलने की मांग की। उनका साफ कहना था कि गांव में स्कूल होना बच्चों के अधिकार की बात है। दूर स्थित स्कूल जाने से न केवल समय बर्बाद होता है, बल्कि छोटी उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि स्कूल नहीं खुला तो वे और तेज आंदोलन करेंगे।
अधिकारियों का आश्वासन
प्रदर्शन के दौरान खंड विकास अधिकारी अशोक सचान मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की समस्या सुनी और कहा कि स्कूल बंद करने और विलय से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है और जल्द ही इस मामले में सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों को स्कूल दोबारा खुलवाने की उम्मीद जगी है, लेकिन वे सतर्क हैं और लगातार फॉलो-अप कर रहे हैं।
यूपी में स्कूल विलय नीति पर क्यों विवाद बढ़ रहा है
यह मामला उत्तर प्रदेश में चल रही स्कूल मर्जर नीति का हिस्सा लगता है। राज्य सरकार ने कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक और जूनियर स्कूलों को मर्ज करने का फैसला लिया है, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके। लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह नीति विवादास्पद साबित हो रही है। रायबरेली सहित कई जिलों में ऐसे दर्जनों स्कूल बंद या मर्ज किए गए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की दूरी बढ़ने से ड्रॉपआउट रेट बढ़ सकता है, खासकर लड़कियों में। छोटे बच्चों के लिए रोजाना 4-5 किमी पैदल चलना मुश्किल होता है। वहीं, सरकार का तर्क है कि इससे शिक्षकों और सुविधाओं का बेहतर वितरण होगा। लेकिन गोंडा गांव जैसे मामलों में सुरक्षा और पहुंच की समस्या प्रमुख हो गई है।
ग्रामीणों की मांग और भविष्य
ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि प्राथमिक विद्यालय गोंडा को तुरंत दोबारा शुरू किया जाए। वे चाहते हैं कि बच्चों को गांव में ही बुनियादी शिक्षा मिले, ताकि वे सुरक्षित और नियमित रूप से पढ़ सकें। प्रदर्शन के बाद उम्मीद है कि प्रशासन जल्द कार्रवाई करेगा। यदि आश्वासन पर अमल नहीं हुआ तो ग्रामीण और बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी में हैं।










