Patna: बिहार की राजधानी पटना स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यालय में सोमवार को आयोजित ‘बलिदान दिवस’ कार्यक्रम में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) ने जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें स्वतंत्र भारत के सबसे प्रभावशाली राष्ट्रवादी नेताओं में से एक बताया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता के लिए डॉ. मुखर्जी का योगदान अतुलनीय है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उनके सपनों को साकार किया गया।
सम्राट चौधरी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद यदि किसी नेता ने भारत की एकता और राष्ट्रीय स्वाभिमान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, तो उनमें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा।

“एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो विधान नहीं चलेंगे”
बलिदान दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने डॉ. मुखर्जी के उस ऐतिहासिक नारे का उल्लेख किया, जिसने जम्मू-कश्मीर की विशेष संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ जनसंघ के आंदोलन को नई दिशा दी थी।
उन्होंने कहा,
“एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो विधान नहीं चलेंगे” का नारा भारतीय जनता पार्टी की कई पीढ़ियों ने आगे बढ़ाया। यह केवल एक राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि देश की एकता और अखंडता के प्रति डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिबद्धता का प्रतीक था।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर के लिए अलग व्यवस्था का विरोध करते हुए राष्ट्रीय एकीकरण की आवाज बुलंद की थी।
अनुच्छेद 370 हटाने को बताया सपनों की पूर्ति
सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि आजादी के लगभग 79 वर्ष बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को वह अवसर मिला, जब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को साकार किया जा सका।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में सुशासन और मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा में काम शुरू हुआ। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में जनता ने भाजपा को मजबूत जनादेश दिया, जिसके बल पर संसद के दोनों सदनों में आवश्यक समर्थन प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा,
“2019 में देश की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मजबूत जनादेश दिया और उसी शक्ति के बल पर अनुच्छेद 370 को इतिहास के कूड़ेदान में डाल दिया गया।”
डॉ. मुखर्जी के योगदान को किया याद
सम्राट चौधरी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने वाले दूरदर्शी नेता थे। उन्होंने देश की अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और अपने जीवन का बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को डॉ. मुखर्जी के जीवन, उनके विचारों और देश के प्रति उनके समर्पण से प्रेरणा लेनी चाहिए।
भाजपा कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह
पटना भाजपा कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा नेता, कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई और उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों को याद किया गया।
कार्यकर्ताओं ने उनके राष्ट्रवादी विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेताओं ने भी अपने विचार रखे और डॉ. मुखर्जी के योगदान को भारतीय राजनीति का महत्वपूर्ण अध्याय बताया।
राजनीतिक महत्व भी रखता है यह बयान
सम्राट चौधरी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और आगामी चुनावों को लेकर विभिन्न दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में भाजपा अपने वैचारिक मुद्दों और राष्ट्रवाद की राजनीति को एक बार फिर प्रमुखता से सामने रखती दिखाई दे रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दे भाजपा के कोर एजेंडे का हिस्सा रहे हैं और पार्टी इन्हें अपने समर्थकों से जुड़ाव मजबूत करने के लिए लगातार उठाती रही है।
निष्कर्ष
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बलिदान दिवस के अवसर पर पटना में सम्राट चौधरी का संबोधन केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें भाजपा की वैचारिक प्रतिबद्धता और राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। उन्होंने डॉ. मुखर्जी को राष्ट्र की एकता का प्रतीक बताते हुए अनुच्छेद 370 हटाने को उनके अधूरे सपने की पूर्ति करार दिया।
अब यह बयान बिहार की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल सकती हैं।










