उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में मंगलवार, 23 सितंबर 2025 को एक सनसनीखेज घटना ने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया। महमूदाबाद क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय नदवा के प्रधानाध्यापक बृजेंद्र कुमार वर्मा ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अखिलेश प्रताप सिंह पर उनके ही कार्यालय में बेल्ट से हमला कर दिया। यह घटना कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस कांड के पीछे एक गहरी वजह सामने आई है, जिसमें फर्जी हाजिरी और दबाव का मामला उजागर हुआ है।
क्या है पूरा मामला?

मामला प्राथमिक विद्यालय नदवा की एक सहायक शिक्षिका अवंतिका से जुड़ा है, जो कथित तौर पर लंबे समय से स्कूल नहीं आ रही थीं। आरोप है कि BSA अखिलेश प्रताप सिंह की करीबी बताई जाने वाली इस शिक्षिका की फर्जी उपस्थिति (अटेंडेंस) मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज करने का दबाव हेडमास्टर बृजेंद्र वर्मा पर डाला जा रहा था। बेसिक शिक्षा विभाग में प्रत्येक माह की 23 तारीख तक शिक्षकों की हाजिरी लॉक की जाती है, जिसके आधार पर वेतन का भुगतान होता है। सूत्रों के अनुसार, बृजेंद्र वर्मा ने इस फर्जी हाजिरी को दर्ज करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्हें स्पष्टीकरण के लिए BSA कार्यालय बुलाया गया।
23 सितंबर को BSA कार्यालय में हुई मुलाकात के दौरान दोनों के बीच तीखी बहस हुई। BSA ने बृजेंद्र की सफाई को अस्वीकार कर दिया और कथित तौर पर उन्हें डांट-फटकार लगाई। गुस्से में आकर बृजेंद्र ने अपनी बेल्ट निकाली और BSA पर 4-5 बार प्रहार किए, जिसमें बेल्ट का लोहे का कुंडा उनके सिर पर भी लगा, जिससे उन्हें चोटें आईं। इस दौरान बृजेंद्र ने BSA का मोबाइल फोन छीनकर तोड़ दिया और कार्यालय के कुछ सरकारी दस्तावेज भी फाड़ दिए
शिक्षक की बाइट और वीडियो
हालांकि, मीडिया में अभी तक बृजेंद्र कुमार वर्मा की कोई स्पष्ट बाइट सामने नहीं आई है। कुछ समाचार रिपोर्ट्स और X पोस्ट के अनुसार, हिरासत में लिए गए बृजेंद्र ने दावा किया कि BSA एक सहायक शिक्षिका के स्कूल न आने की शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा उन पर दबाव डाल रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि BSA ने उन्हें निर्देश दिया था कि शिक्षिका की अनुपस्थिति को नजरअंदाज कर स्कूल का काम देखें, और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनकी जांच शुरू कर दी गई।
घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हो रहा है, जिसमें बृजेंद्र को BSA पर बेल्ट से हमला करते और फाइलें फेंकते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा बीच-बचाव करने की कोशिश भी दिखाई देती है।
मीडिया ने शिक्षक से बात क्यों नहीं की?
मीडिया द्वारा बृजेंद्र वर्मा से बात न करने का कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन संभावना है कि घटना के तुरंत बाद उनकी गिरफ्तारी और पुलिस हिरासत में होने के कारण पत्रकारों को उनसे संपर्क करने का अवसर नहीं मिला। इसके अलावा, इस घटना ने BSA के पक्ष को अधिक उजागर किया, क्योंकि उन्होंने पुलिस में तहरीर देकर अपनी बात सामने रखी। बृजेंद्र के दावों को कुछ X पोस्ट्स और चुनिंदा समाचारों में उल्लेख किया गया है, लेकिन मुख्यधारा की मीडिया ने अभी तक उनकी ओर से विस्तृत बयान प्रकाशित नहीं किया है।
पुलिस कार्रवाई और निलंबन
घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और बृजेंद्र वर्मा कोव हिरासत में ले लिया। BSA अखिलेश प्रताप सिंह की तहरीर के आधार पर उनके खिलाफ हत्या का प्रयास, सरकारी कार्य में बाधा, दस्तावेज नष्ट करने, और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, टूटी हुई बेल्ट, और फटे दस्तावेजों को सबूत के तौर पर जब्त किया है। देर शाम BSA ने जिला अस्पताल में अपना मेडिकल परीक्षण कराया, जिसमें उनकी चोटों की गंभीरता की जांच की जा रही है।BSA अखिलेश प्रताप सिंह ने बृजेंद्र वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पुलिस इंस्पेक्टर अनूप शुक्ला ने बताया कि मामले की गहन जांच चल रही है, और दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों और ग्रामीणों का विरोध
इस घटना ने स्थानीय समुदाय में भी हलचल मचा दी है। नदवा प्राथमिक विद्यालय के बच्चों ने स्कूल गेट पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक उनके “सर” (बृजेंद्र वर्मा) वापस नहीं आते, वे स्कूल बंद रखेंगे और किसी अन्य शिक्षक से नहीं पढ़ेंगे। ग्रामीणों ने भी बृजेंद्र का समर्थन किया, उनका दावा है कि वे समय पर स्कूल आते हैं और बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। ग्रामीणों ने बताया कि विवाद की जड़ में स्कूल न आने वाली सहायक शिक्षिका अवंतिका हैं, जिनकी फर्जी हाजिरी दर्ज करने का दबाव BSA द्वारा दबाव बनाया जा रहा था
फर्जी हाजिरी का मामला
यह मामला फर्जी हाजिरी के गंभीर मुद्दे को उजागर करता है। सूत्रों के अनुसार, शिक्षिका अवंतिका की अनुपस्थिति के बावजूद उनकी हाजिरी मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज की जा रही थी, जिसके आधार पर उन्हें वेतन मिल रहा था। बृजेंद्र ने इसका विरोध किया और एक पत्र लिखकर इसे राजनीतिक ग्रुपों में वायरल कर दिया, जिसके बाद BSA ने उनकी जांच शुरू की। इस मुद्दे ने शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को सामने ला दिया है।
सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स ने बृजेंद्र की हिंसक प्रतिक्रिया की निंदा की, तो कुछ ने उनके समर्थन में आवाज उठाई, यह कहते हुए कि दबाव और अन्याय के कारण वे ऐसा कदम उठाने को मजबूर हुए। एक X यूजर ने लिखा, “मास्टर साहब कक्षा में बच्चों को लड़ने नहीं देते, लेकिन BSA पर भड़ास निकाल रहे हैं।” वहीं, एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “शिक्षा और अनुशासन के लिए जिम्मेदार व्यक्ति का हिंसा करना गलत है, लेकिन इसके पीछे की वजह को भी समझना चाहिए।”
आगे की जांच और सवाल
यह घटना शिक्षा विभाग में गहरे असंतोष और प्रशासनिक दबाव को उजागर करती है। सवाल उठता है कि क्या फर्जी हाजिरी के मामले की गहन जांच होगी? शिक्षिका अवंतिका और BSA के कथित रिश्ते की सच्चाई क्या है? और क्या बृजेंद्र वर्मा की हिंसक प्रतिक्रिया के पीछे लंबे समय से चला आ रहा दबाव जिम्मेदार था? पुलिस और शिक्षा विभाग की जांच इस मामले में और तथ्य सामने ला सकती है। फिलहाल, यह कांड सीतापुर ही नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।










