उत्तर प्रदेश के रायबरेली शहर में सड़कों की खराब स्थिति लंबे समय से एक बड़ी समस्या बनी हुई है। नगर पालिका परिषद के अंतर्गत आने वाली गल्ला मंडी नहरिया रोड पर बीचों-बीच बने एक बड़े गड्ढे ने व्यापारियों, स्थानीय निवासियों और राहगीरों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। कई वर्षों से यह गड्ढा बना हुआ था, जिसके कारण व्यापारियों की गाड़ियां, बैटरी ऑटो रिक्शा और अन्य वाहन बार-बार पलट चुके हैं। इस हादसे में कई लोग गंभीर रूप से चोटिल भी हो चुके हैं। लेकिन अब स्थानीय समाजसेवियों और नेताओं के संयुक्त प्रयासों से इस गड्ढे को भर दिया गया है, जिससे इलाके में राहत की सांस चली है।
स्थानीय निवासी जानकी देवी, जो गड्ढे के बगल में रहती हैं, ने बताया, “यह गड्ढा वर्षों से यहीं पड़ा था। नगर पालिका या किसी अधिकारी ने इसकी सुध नहीं ली। रोजाना सैकड़ों वाहन इस रोड से गुजरते हैं, खासकर गल्ला मंडी के व्यापारी जो अनाज और अन्य सामान लादकर आते-जाते हैं। बैटरी रिक्शा चालक तो सबसे ज्यादा परेशान रहते थे। कई बार तो गाड़ियां पलट गईं और लोग घायल हो गए। हमने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।” जानकी देवी ने आगे कहा कि इस समस्या को हल करने के लिए स्थानीय समाजसेवी राकेश गुप्ता ने पहल की, जिसके बाद अन्य लोगों ने भी हाथ बंटाया।

इस मुहिम का नेतृत्व समाजसेवी राकेश गुप्ता ने किया, जिन्होंने विभिन्न समुदायों के लोगों को एकजुट किया। उनके साथ भाजपा नेता संतोष पांडे, मोहम्मद अयाज भाई, मोहम्मद शारिक, राजू भाई, आशीष पाठक और पल्लू मिश्रा ने सक्रिय सहयोग दिया। इन सभी ने श्रमदान के माध्यम से गड्ढे को मिट्टी, बजरी और अन्य सामग्री से भरवाया। राकेश गुप्ता ने कहा, “शहर की सड़कें हमारी साझा जिम्मेदारी हैं। जब प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठा, तो हमने खुद आगे आकर यह काम किया। जानकी देवी जैसे बुजुर्गों की परेशानी देखकर चैन नहीं पड़ता था। अब यह गड्ढा पूरी तरह भर चुका है, और यातायात सुगम हो गया है।”
यह घटना रायबरेली में सड़क मरम्मत की व्यापक समस्या को उजागर करती है। जिले में हाल ही में कई जगहों पर गड्ढों के कारण हादसे हुए हैं। उदाहरण के लिए, ऊंचाहार क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने गड्ढे को भरवाने के लिए स्थानीय मीडिया की खबर का असर हुआ था, जहां एसडीएम ने मात्र दो घंटे में कार्रवाई की। इसी तरह, डलमऊ कोतवाली क्षेत्र में एनएच 32 पर गड्ढों के कारण स्थानीय लोगों ने धान की रोपाई तक कर दी थी, जिससे लोक निर्माण विभाग पर दबाव बना। अमेठी के जायस क्षेत्र में भी रायबरेली-सुल्तानपुर रोड पर गड्ढों से राहगीर परेशान हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि जिले भर में सड़कों की मरम्मत एक जरूरी मुद्दा है।
समाजसेवियों ने केवल इस गड्ढे को भरने तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने ‘श्रमदान का संकल्प’ नामक एक अभियान शुरू किया है, जिसके तहत शहर की अन्य सड़कों पर बने गड्ढों को भरने का काम निरंतर जारी रहेगा। संतोष पांडे ने बताया, “यह शुरुआत है। गल्ला मंडी नहरिया रोड के अलावा शहर के अन्य इलाकों जैसे डलमऊ-जगतपुर मार्ग, झरहा रोड और आसपास के क्षेत्रों में भी गड्ढे हैं। हम हर सप्ताह श्रमदान आयोजित करेंगे और स्थानीय लोगों को जोड़ेंगे। प्रशासन से भी अपील है कि वे स्थायी समाधान करें, लेकिन तब तक हम खुद जुटे रहेंगे।”
मोहम्मद अयाज भाई और मोहम्मद शारिक ने हिंदू-मुस्लिम एकता का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी समस्याएं सांप्रदायिक सीमाओं से परे हैं। “हम सब एक ही शहर के निवासी हैं। गड्ढा किसी का नहीं, सबका दुश्मन है। आशीष पाठक, राजू भाई और पल्लू मिश्रा जैसे युवाओं का सहयोग सराहनीय है।” इस अभियान से स्थानीय व्यापारियों में उत्साह है। एक अनाज व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “अब हम बेफिक्र होकर माल लादकर आ-जा सकेंगे। उम्मीद है कि यह मुहिम पूरे शहर को गड्ढामुक्त बना देगी।”
नगर पालिका परिषद रायबरेली के अधिकारियों से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि वे सड़क मरम्मत के लिए बजट की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रयासों का स्वागत है। यह घटना न केवल एक गड्ढे को भरने की कहानी है, बल्कि सामुदायिक सहयोग की मिसाल भी है। रायबरेली के निवासी उम्मीद कर रहे हैं कि यह संकल्प शहर को एक सुरक्षित और सुगम यातायात वाला स्थान बना देगा।










