रायबरेली : एम्स रायबरेली (AIIMS Raebareli) के नाक-कान-गला (ईएनटी) विभाग ने एनेस्थीसिया विभाग के सहयोग से पैरोटिड ग्रंथि और पैराफैरिंजियल स्पेस से एक साथ उत्पन्न हुए दो अत्यंत दुर्लभ ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटाकर चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
38 वर्षीय मरीज का जटिल मामला

38 वर्षीय एक मरीज बाईं पैरोटिड ग्रंथि में लगातार सूजन की शिकायत लेकर एम्स पहुंचा। विस्तृत जांच के बाद यह मामला श्वानोमा (Schwannoma) का पाया गया।
हालांकि सर्जिकल टीम के लिए चुनौती तब और बढ़ गई जब जांच में पैरोटिड ग्रंथि के डीप लोब और पैराफैरिंजियल स्पेस में दो अलग-अलग ट्यूमर पाए गए। इस प्रकार का संयोजन अत्यंत दुर्लभ माना जाता है।
तीन घंटे चली सर्जरी, नसें रहीं सुरक्षित
सर्जिकल टीम का नेतृत्व ईएनटी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरिजीत जोतदार ने किया। उनके साथ डॉ. ध्रुव कपूर, डॉ. मयूर, डॉ. आस्था, डॉ. सृष्टि और डॉ. प्रभात शामिल रहे।
एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. कालीचरण दास ने डॉ. कृष्णा और डॉ. अश्वथी के साथ किया।
करीब तीन घंटे चली सर्जरी के दौरान:
- फेशियल नर्व की सभी शाखाओं को सुरक्षित रखा गया
- कैरोटिड धमनी को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंची
- दोनों ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिए गए
सर्जरी के बाद मरीज को चेहरे की किसी प्रकार की कमजोरी या लकवे की शिकायत नहीं हुई।
क्यों है यह सर्जरी विशेष?
ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. अनन्या सोनी और डॉ. अरिजीत जोतदार ने बताया कि:
- पैरोटिड ग्रंथि से उत्पन्न होने वाला यह ट्यूमर अत्यंत दुर्लभ है
- सामान्यतः यह फेशियल नर्व से उत्पन्न होता है
- सर्जरी के दौरान फेसिअल पैरालिसिस (चेहरे का पक्षाघात) का जोखिम बना रहता है
- पैराफैरिंजियल स्पेस में स्थित ट्यूमर को हटाना और भी चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि यह महत्वपूर्ण नसों और कैरोटिड धमनी के निकट होता है
- एक साथ दो ऐसे ट्यूमर का होना अत्यंत असामान्य स्थिति है
ऑपरेशन के दौरान इंट्राऑपरेटिव नर्व मॉनिटरिंग टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया, जिसने नसों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नेतृत्व और नवाचार
एम्स, रायबरेली की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर अमिता जैन के मार्गदर्शन में संस्थान चिकित्सा नवाचार और उन्नत उपचार पद्धतियों में अग्रणी बना हुआ है।
संस्थान की अत्याधुनिक सुविधाएं और कुशल मेडिकल-सर्जिकल टीमें मरीजों को व्यापक और गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
यह सफलता न केवल एम्स रायबरेली के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।










