Ramnagariya Mela : दो हफ्ते बाद भी पांचाल घाट पर कचरे का अंबार, प्रशासन की सफाई केवल ‘खानापूर्ति’

फर्रुखाबाद : ऐतिहासिक पांचाल घाट गंगा तट पर आयोजित होने वाले रामनगरिया मेले (Ramnagariya Mela) को समाप्त हुए दो सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन मेला क्षेत्र की स्थिति अब भी बदहाल बनी हुई है। प्रशासन के दावों के विपरीत, गंगा किनारे जगह-जगह कूड़े और पॉलीथिन के ढेर लगे हुए हैं, जो न केवल पर्यावरण बल्कि पतित पावनी गंगा की शुद्धता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

लाखों श्रद्धालुओं की आस्था, पर सफाई में भारी लापरवाही

बता दें कि प्रयागराज के माघ मेले की तर्ज पर आयोजित इस मेले में इस वर्ष 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने शिरकत की थी, जिनमें 50,000 से अधिक कल्पवासी शामिल थे। मेला 3 जनवरी से 3 फरवरी तक चला, लेकिन समापन के इतने दिनों बाद भी सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आ रही है।

मुख्य समस्याएँ

  • गंदगी का अंबार: मेला क्षेत्र में घास-फूस, पुआल, प्लास्टिक की बोतलें और पॉलीथिन के ढेर जस के तस पड़े हैं।
  • अवैध तरीके से कचरा जलाना: कई स्थानों पर कचरे को उठाने के बजाय वहीं जलाया गया है। यह न केवल हवा को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि प्रशासन की बड़ी लापरवाही को भी दर्शाता है।
  • गंगा तट पर प्रदूषण: कूड़ा गंगा के बिल्कुल नजदीक होने के कारण सीधे तौर पर नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचा रहा है।

प्रशासन का पक्ष

इस मामले पर मेला सचिव संजय मिश्रा ने शुक्रवार को अपना पक्ष रखते हुए बताया कि सफाई ठेकेदार द्वारा लगभग आधे हिस्से से कूड़ा हटाया जा चुका है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि वे स्वयं मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेंगे और जल्द ही पूरे मेला क्षेत्र की गहन सफाई सुनिश्चित की जाएगी।

निष्कर्ष

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और आस्था के इस केंद्र को सफाई के अभाव में छोड़ देना चिंताजनक है। देखना यह होगा कि मेला सचिव के आश्वासन के बाद जमीनी स्तर पर कब तक सुधार होता है।

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