Uttar Pradesh : उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के बीच सदन में कामकाज को लेकर तीखी नोकझोंक सामने आई। दोनों वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई यह बातचीत राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
क्या कहा मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने?

सदन की कार्यवाही के दौरान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को फोन कर उनके क्षेत्र से संबंधित कार्यों की मांग की थी और बाद में उन कार्यों को पूरा भी कराया गया। मंत्री का कहना था कि उन्होंने जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाया है।
उनके इस बयान के बाद सदन का माहौल कुछ समय के लिए गरमा गया।
स्पीकर सतीश महाना का जवाब
मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अगर आपको काम करवाना नहीं है तो आप वहां बैठे क्यों हैं? काम करवाया तो अच्छी बात है, लेकिन मुझे क्यों गिना रहे हैं? दूसरों को गिना दीजिए। काम करवाने के लिए ही तो आप जिम्मेदारी निभा रहे हैं।”
स्पीकर के इस जवाब को सदन में मौजूद सदस्यों ने गंभीरता से सुना। उनके वक्तव्य से यह संदेश गया कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व ही क्षेत्रीय विकास कार्यों को सुनिश्चित करना है और उसे व्यक्तिगत उपलब्धि की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं।
राजनीतिक मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संवाद केवल व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यशैली और जिम्मेदारी के सवाल को भी सामने लाता है। सदन के भीतर इस प्रकार की सीधी प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि जवाबदेही और मर्यादा दोनों ही लोकतांत्रिक व्यवस्था के अहम हिस्से हैं।
निष्कर्ष
सदन में हुई यह नोकझोंक भले ही संक्षिप्त रही हो, लेकिन इसके राजनीतिक संदेश दूरगामी माने जा रहे हैं। विकास कार्यों को लेकर श्रेय और जिम्मेदारी की बहस अक्सर राजनीति में देखने को मिलती है, किंतु विधानसभा जैसे मंच पर इस प्रकार का संवाद चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है।
यह घटनाक्रम प्रदेश की राजनीति में जवाबदेही और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर एक नई बहस को जन्म देता नजर आ रहा है।









