UP Board Exam : डलमऊ में बोर्ड परीक्षा केंद्र पर बवाल, कॉपियां फाड़ने के आरोप से छात्रों में आक्रोश

UP Board Exam : बोर्ड परीक्षा के दौरान डलमऊ क्षेत्र स्थित भागीरथी इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब परीक्षा समाप्ति के बाद उत्तरपुस्तिकाएं जमा करते समय कुछ कॉपियों में कथित रूप से 100 और 500 रुपये के नोट मिलने की बात सामने आई। आरोप है कि इस आधार पर केंद्र व्यवस्थापन द्वारा बड़ी संख्या में छात्रों की उत्तरपुस्तिकाएं मौके पर ही फाड़ दी गईं। इस घटना से परीक्षा देकर बाहर निकले छात्र-छात्राओं में भारी आक्रोश फैल गया।

क्या है पूरा मामला?

बताया जा रहा है कि दूसरे विद्यालय के छात्र इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा देने के लिए इस केंद्र पर आए थे। परीक्षा समाप्त होने के बाद जब कॉपियां जमा की जा रही थीं, तभी कुछ उत्तरपुस्तिकाओं में रुपये मिलने की सूचना सामने आई। इसके बाद कथित तौर पर केंद्र प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए कई छात्रों की कॉपियां वहीं नष्ट कर दीं।

छात्रों का आरोप है कि यदि एक या दो छात्रों की कॉपी से रुपये मिले थे, तो बड़ी संख्या में उत्तरपुस्तिकाएं क्यों फाड़ी गईं? उन्होंने सवाल उठाया कि बिना किसी लिखित जांच, सूचना या उच्चाधिकारियों को अवगत कराए इस प्रकार कॉपियां नष्ट करना क्या परीक्षा नियमावली के अनुरूप है?

“साल भर की मेहनत पर पानी”

आक्रोशित छात्रों का कहना है कि साल भर की तैयारी के बाद बोर्ड परीक्षा उनके भविष्य की दिशा तय करती है। ऐसे में उत्तरपुस्तिका फाड़ देना सीधे-सीधे उनके शैक्षणिक भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कई छात्र भावुक होते दिखे और उन्होंने इसे करियर बर्बाद करने की कोशिश बताया।

कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि यदि किसी ने गलती की है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सामूहिक दंड देकर निर्दोष छात्रों को दंडित करना अन्याय है।

पुलिस पहुंची मौके पर, अभद्रता के आरोप

मामला बढ़ने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। छात्रों का आरोप है कि जब वे शांतिपूर्वक अपनी बात रख रहे थे, तब कुछ पुलिसकर्मियों ने तीखी भाषा का प्रयोग किया, उन्हें हटाने का प्रयास किया और अभद्र व्यवहार किया।

इस संबंध में डलमऊ कोतवाली के प्रभारी राघवन कुमार सिंह ने कहा, “आरोप तो लगते रहते हैं, फिलहाल मैं विद्यालय पॉइंट पर मौजूद हूं।” वहीं मौके पर मौजूद दरोगा राजकिशोर अग्निहोत्री ने स्थिति को नियंत्रित करने और छात्रों को शांत कराने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।

विद्यालय प्रशासन की चुप्पी से बढ़े सवाल

घटना की सूचना मिलते ही कई मीडिया प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत कर वस्तुस्थिति जानने का प्रयास किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विद्यालय प्रशासन ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और स्पष्ट प्रतिक्रिया देने से परहेज किया।

विद्यालय का आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने न आने से संदेह और गहरा गया है। स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल चर्चा में है कि यदि कार्रवाई नियमानुसार और पारदर्शी थी, तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने में झिझक क्यों?

पूर्व नियोजित साजिश का दावा

स्टाफ सूत्रों का दावा है कि यह पूरा प्रकरण पूर्व नियोजित हो सकता है। बताया जा रहा है कि जिस विद्यालय से छात्र परीक्षा देने आए थे, वह आदर्श शिक्षा निकेतन क्षेत्र का एक प्रतिष्ठित विद्यालय माना जाता है। आरोप है कि उसकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से कुछ लोगों ने बच्चों को कॉपी में पैसे रखने के लिए प्रेरित किया।

हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न ही विद्यालय प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी किया गया है।

नियम क्या कहते हैं?

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी उत्तरपुस्तिका में अनुचित सामग्री या धनराशि पाई जाती है, तो इसकी सूचना बोर्ड को देकर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। उत्तरपुस्तिका को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखा जाता है ताकि आगे जांच संभव हो सके।

ऐसे में मौके पर ही कॉपी फाड़ देना प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई में पारदर्शिता और लिखित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

निष्पक्ष जांच की मांग

घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों ने उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी छात्र ने गलती की है तो नियमानुसार कार्रवाई हो, लेकिन सामूहिक दंड देकर निर्दोष छात्रों का भविष्य न छीना जाए।

यह प्रकरण न केवल एक परीक्षा केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पारदर्शिता और संवाद की कमी किस प्रकार एक साधारण घटना को बड़े विवाद में बदल सकती है।

अब निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस पूरे मामले की जांच किस प्रकार करते हैं और क्या प्रभावित छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।

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