रायबरेली : कलम पर पहरा लगाने वाले व्यक्तियों पर राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद हुआ लामबद्ध

ब्यूरो रिपोर्ट वंश बहादुर सिंह वैसे तो पत्रकार स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं निडर होकर ही खबरें प्रकाशित करते हैं। जिससे समाज में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर किया जा सके और हर पीड़ित व्यक्ति की आवाज को बुलंद कर उन्हें न्याय दिला सके, परंतु समाज में ही व्याप्त कुछ ऐसे भी कुछ मनुष्य होते हैं, जिन्हें खबर के

Oct 07, 2024 - 11:40
Updated: 2 years ago
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ब्यूरो रिपोर्ट वंश बहादुर सिंह

वैसे तो पत्रकार स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं निडर होकर ही खबरें प्रकाशित करते हैं। जिससे समाज में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर किया जा सके और हर पीड़ित व्यक्ति की आवाज को बुलंद कर उन्हें न्याय दिला सके, परंतु समाज में ही व्याप्त कुछ ऐसे भी कुछ मनुष्य होते हैं, जिन्हें खबर के प्रकाशन एवं उनकी पोल खुलने से घबराते हैं, ऐसे लोग अपने रसूख एवं अच्छी पकड़ के चलते सच्चाई से रूबरू कराने वाले पत्रकारों पर भी रोक लगाने हेतु फर्जी मुकदमें कराने की कोशिश करते हैं, जिसमें वो कई बार कमियाब भी हो जाते हैं। पत्रकारों के प्रति पुलिस प्रशासन की लचर कार्यशैली एवं कुंठित सोच के चलते सच्चाई उजागर करने वाले पत्रकारों पर फर्जी मुकदमा कर उन्हें मानसिक तौर से प्रताड़ित करने के कई मामले आए दिन प्रकाश में आते हैं। जिसके चलते पत्रकार अपने कर्तव्य से वंचित एवं परेशान हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही एक मामला जनपद रायबरेली से निकलकर सामने आया। जहां पर राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद के पदाधिारियों ने अपने पत्रकार बंधुओ की समस्या को सुना एवं उनके द्वारा की गई खबर के चलते, उन पर हो रहे फर्जी मुकदमे को लेकर राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद रायबरेली जिलाध्यक्ष दुर्गेश अवस्थी के नेतृत्व में जनपद इकाई संग जिला अधिकारी महोदया एवं पुलिस अधीक्षक महोदय से मुलाकात कर पत्रकारों के खिलाफ हो रहे फर्जी मुकदमों से रूबरू कराया एवं सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ जी के द्वारा पत्रकारों के लिए कहें गए कथनों को भी याद करते हुए यह अवगत कराया की यदि हमारे साथी पत्रकार के खबर प्रकाशन के चलते कुंठित मानसिकता वाले व्यक्तियों द्वारा पुलिस प्रशासन एवं कोर्ट के द्वारा फर्जी मुकदमा कराया जाता हैं, तो ऐसे मामले में आप निष्पक्ष जांच करा कर उचित कार्रवाई करें और यदि कोई व्यक्ति हमारे पत्रकार साथियों पर ईर्ष्या दोष के चलते फर्जी मुकदमा करते हैं और वह जांच के दौरान फर्जी ज्ञात हो जाता हैं, तो ऐसे में फर्जी मुकदमा करने वाले व्यक्ति पर विधिक कार्यवाहीं की जाएं। जिससे उन्हें यह भय रहे की फर्जी मुकदमा करने पर हमें भी सजा हो सकती हैं। जिससे आए दिन पत्रकारों पर हो रहे फर्जी मुकदमे कम होंगे और पत्रकार बंधु भी अपना कर्तव्य स्वतंत्रता पूर्ण तरीके से कर सकेंगे।

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