भगवान कृष्ण हैं योगेश्वर और योग के स्वामी : प्रो. डा. प्रवेश कुमार चौधरी

योग की उत्पति प्राचीन भारत में ऋषि और योगियों की देन: प्रो. डॉ. प्रवेश कुमार चौधरी
भगवान कृष्ण ने अर्जुन को योग के माध्यम से आत्मज्ञान और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग दिखाया : राष्ट्रीय प्रवक्ता विश्व हिंदू परिषद

रायबरेली : विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रोफेसर डॉक्टर प्रवेश कुमार चौधरी का अपने गृह जनपद रायबरेली पहुंचने पर गर्मजोशी के साथ जोरदार स्वागत अभिनंदन हुआ। यह अवसर था जब रविवार को सुबह ठीक 6 बज रहे थे तभी प्रो. डा. चौधरी रायबरेली प्रयागराज फोरलेन शहर स्थित मुंशीगंज सई नदी किनारे शहीद स्मारक, राणा बेनी माधव बक्श सिंह पार्क में मातृभूमि सेवा मिशन इकाई की ओर से संचालित दैनिक नि:शुल्क योग प्रशिक्षण शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भारत मां के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण किया। मुख्य अतिथि को योग शिविर में इकाई के जिला संयोजक प्रदीप पांडेय,संरक्षक महेंद्र अग्रवाल, जिलाध्यक्ष योगाचार्य बृजमोहन, योग प्रशिक्षिका सोनम गुप्ता, मंडल अध्यक्ष भगवत प्रताप, योग साधक अजय मिश्रा और सुनील ओझा ने फूलमालाओं से जोरदार स्वागत व अभिनंदन किया। मुख्य अतिथि को प्रतीक चिन्ह में भगवान श्रीराम की छवि भेंट कर अंगवस्त्रम से सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रो डा चौधरी ने कहा कि वे मातृभूमि सेवा मिशन इकाई द्वारा पिछले तीन वर्षों से कराए जा रहे नि:शुल्क योग प्रशिक्षण शिविर से बहुत प्रेरित और प्रभावित होकर यहां तक आए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के अलावा दुनिया में कई स्थानों में जाने का अवसर मिला लेकिन उन्हें जो अपने गृह जनपद में अपने घर में जो अभूतपूर्व सम्मान मिला उससे वह बहुत अभिभूत हैं। वह बहुत थोड़ी देर के लिए भावुक भी हो गए। उन्होंने मातृभूमि सेवा मिशन धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र के संस्थापक डॉ श्री प्रकाश मिश्र के प्रयासों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे ही कार्यक्रम देश भर में निरंतर होने चाहिए जिससे लोगों का तन और मन स्वस्थ हो सके। उन्होंने योग के बारे में कहा कि योगेश्वर शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है योग और ईश्वर। भगवान कृष्ण को योगेश्वर कहा जाता है, क्योंकि वे योग के स्वामी हैं। योग का मतलब होता है जुड़ना या इकट्ठा होना, जबकि ईश्वर का अर्थ होता है भगवान या स्वामी। इसलिए योगेश्वर का अर्थ है योग के माध्यम से अपने आप को भगवान के साथ जोड़ना या वह जो योग का स्वामी हैं। उन्होंने कहा कि योग की उत्पत्ति प्राचीन भारत में हुई थी और अब इसे पूरे विश्व में भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर में पहुंचा दिया है। 21 जून को पूरे विश्व योग दिवस मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण के समय में योग एक विकसित और परिष्कृत विज्ञान था, जिसका उल्लेख भागवत गीता में भी मिलता है। भागवत गीता एक प्राचीन ग्रंथ है जिसमें भगवान कृष्ण ने अपने भक्त अर्जुन को योग के माध्यम से आत्मज्ञान और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग दिखाया है। योग शक्ति को दर्शाता है और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाता है। योग का विकास प्राचीन भारत में ऋषियों और योगियों द्वारा किया गया था। उन्होंने बताया कि पतंजलि ऋषि ने योग सूत्रों की रचना की, जो योग के मूल सिद्धांतों और तकनीक को समझने वाले एक महत्वपूर्ण ग्रंथ हैं। योग विभिन्न प्रकार के होते हैं, योग करने से व्यक्ति का तन और मन स्वस्थ होकर निरोगी होता है। योग शिविर में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चों ने भी सहभागिता की और योग के महत्व को समझा। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने डॉ. प्रवेश कुमार के विचारों से प्रेरणा ली और अपने जीवन में योग को शामिल करने का संकल्प लिया। जिला संयोजक प्रदीप पांडेय और योगाचार्य बृजमोहन और योग प्रशिक्षिका सोनम गुप्ता के द्वारा कराए जा रहे योग की डा प्रवेश ने सराहना किया। उन्होंने कहा कि संस्थाएं तो बहुत है मगर मातृभूमि सेवा मिशन राष्ट्रीय हितों में अपने मूल्य उद्देश्यों पर काम कर रहा है। ऐसे ही और संस्थाओं को आगे जाकर कार्य करना चाहिए। जिला संरक्षक एवं समाजसेवी महेंद्र अग्रवाल ने हास्य कला के जरिए योग कराया। उन्होंने हंसने हंसाने पर जोर दिया। कहा कि इसके जरिए रक्त का संचार होता है और मन प्रसन्न रहता है। कार्यक्रम का समापन भारत माता के जयघोष और वंदे मातरम से हुआ।

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