Basant Mahotsav 2026: झारखंड के बोकारो जिले में हजारी पंचायत के गैरमजरूआ बस्ती में हर साल की तरह इस बार भी सरस्वती पूजा के शुभ अवसर पर 32वां बसंत महोत्सव बहुत धूमधाम से मनाया गया। यह महोत्सव पिछले 32 साल से लगातार चल रहा है, जो इस छोटी-सी बस्ती की एक खास पहचान बन चुका है। लोग इसे बसंत महोत्सव के नाम से जानते हैं, जिसमें खेल-कूद की प्रतियोगिताओं के साथ-साथ ढेर सारे रंगीन सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। इस बार इसका शुभारंभ 23 जनवरी 2026 को हुआ और यह तीन दिन यानी 23, 24 और 25 जनवरी तक चला।
कार्यक्रम की शुरुआत बहुत ही जोश के साथ हुई। ग्राम समिति के अध्यक्ष भरत प्रजापति और सचिव त्रिभुवन दास ने मिलकर दीप प्रज्वलित करके महोत्सव का उद्घाटन किया। गांव के लोग, खासकर बच्चे और महिलाएं, सुबह से ही उत्साहित नजर आ रहे थे। पूरा माहौल रंग-बिरंगे झंडियों, फूलों और बच्चों की हंसी-खुशी से भर गया था।

खेल-कूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गूंजा पूरा मैदान
इस तीन दिवसीय महोत्सव में सबसे ज्यादा ध्यान खेल-कूद और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों पर रहा। मैदान में अलग-अलग उम्र के बच्चों और युवाओं के लिए कई तरह की खेल प्रतियोगिताएं रखी गईं। दौड़, कबड्डी, लंबी कूद, गेंद फेंक जैसी प्रतियोगिताओं में बच्चे पूरी जान लगाकर हिस्सा ले रहे थे। खेलों की देखरेख शिबू प्रजापति और अभिषेक प्रजापति ने की, जिन्होंने सब कुछ बहुत अच्छे से संभाला।
खेल के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी कम आकर्षक नहीं थे। गांव के छोटे-छोटे बच्चे मंच पर आकर गीत गाते, नृत्य करते और संगीत की धुन पर थिरकते दिखे। कई बच्चों ने मिलकर लघु नाटक भी पेश किए, जो देखने वालों के दिल को छू गए। इन नाटकों में आज की समाज की कई समस्याओं को बहुत ही सजीव तरीके से दिखाया गया। जैसे कि कुछ नाटकों में दिखाया गया कि आजकल के युवा अपने बुजुर्ग माता-पिता की कितनी उपेक्षा करते हैं, उन्हें घर में अकेला छोड़ देते हैं और वृद्धाश्रम की तरफ धकेल देते हैं। इन नाटकों में बुजुर्गों की पीड़ा, उनकी भावनाएं और परिवार के टूटते रिश्तों को इतने भावुक अंदाज में पेश किया गया कि कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं। लोगों ने बच्चों की इस कोशिश की बहुत तारीफ की और कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को सोचने पर मजबूर करते हैं।
बच्चों की प्रतिभा और महिलाओं का जोश
इस महोत्सव में बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा थी। पीहू, चाहत, मिष्टी, आयुष, अयांश, देव, सनी, भूमि, सलोजा, दीपा, वैष्णवी, अनु प्रिया, ऋषिका, दिव्यांशी, सोनल, नंदनी, त्रिशा, वेद, ओम, डमरू, कल्पना, परी, श्री और भैरवी जैसे दर्जनों बच्चे मंच पर अपनी प्रतिभा दिखा रहे थे। इन बच्चों ने न सिर्फ अपनी कला दिखाई, बल्कि पूरे गांव को गर्व महसूस करवाया।
महिलाओं की भागीदारी भी इस बार खास रही। सैकड़ों महिलाएं कार्यक्रम देखने आईं। वे बच्चों की प्रस्तुतियों को देखकर तालियां बजा रही थीं, उत्साह से चिल्ला रही थीं और अपने बच्चों पर गर्व जाहिर कर रही थीं। पूरा माहौल इतना जीवंत और प्रेरणादायक था कि हर कोई कह रहा था कि ऐसे आयोजन गांव की एकता और संस्कृति को मजबूत करते हैं।
मुख्य अतिथि ने किए पुरस्कार वितरण
महोत्सव के दूसरे दिन यानी 24 जनवरी 2026 को खास मेहमान आए। डीवीसी बोकारो थर्मल के वरिष्ठ प्रबंधक (सीएसआर) मनीष चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विभिन्न खेल और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले बच्चों और प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए। बच्चों के चेहरे पर खुशी देखते ही बनती थी। मनीष चौधरी ने आयोजन की तारीफ की और कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बहुत जरूरी हैं।
आयोजन समिति ने बताया कि आने वाले सालों में इस महोत्सव को और भी बेहतर और आकर्षक बनाने की योजना है। नए-नए आयाम जोड़े जाएंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ सकें।
सफलता के पीछे मेहनतकश टीम
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में कई लोगों का हाथ रहा। कुसुम, निकिता, माही और राखी ने बहुत मेहनत की। इन महिलाओं ने पीछे से पूरी तैयारी संभाली। मंच संचालन का जिम्मा अभिषेक और संजना ने बखूबी निभाया। दोनों ने कार्यक्रम को इतने अच्छे से चलाया कि कोई भी क्षण बोरिंग नहीं लगा।
सबसे बड़ी बात यह रही कि पूरा महोत्सव कार्यकारी अध्यक्ष बद्री प्रसाद के कुशल नेतृत्व में संपन्न हुआ। उनकी देखरेख में हर चीज व्यवस्थित और समय पर हुई।
निष्कर्ष
32वां बसंत महोत्सव सिर्फ एक उत्सव नहीं था, बल्कि गांव की एकता, बच्चों की प्रतिभा और समाज की बेहतरी के लिए एक मंच था। यह दिखाता है कि छोटे-छोटे गांव भी बड़े बदलाव ला सकते हैं, अगर सब मिलकर कोशिश करें। गैरमजरूआ बस्ती के लोग अगले साल के महोत्सव का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें और ज्यादा रंग, और ज्यादा उत्साह होगा।










