8th Pay Commission Pension Revision: डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने केंद्र सरकार के 8वें केंद्रीय वेतन आयोग में पेंशन पुनरीक्षण को शामिल न करने पर जोरदार विरोध जताया है। महासंघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि पेंशनरों के हितों को नजरअंदाज न किया जाए। अगर मांगें नहीं मानी गईं तो कर्मचारी बड़ा आंदोलन शुरू कर सकते हैं।
ज्ञापन में क्या कहा गया/8th Pay Commission Pension Revision
महासंघ के जिला सचिव ने हस्ताक्षरित ज्ञापन में साफ कहा है कि 8वें वेतन आयोग के नोटिफिकेशन में पेंशन संशोधन और अन्य पेंशन लाभों का कोई जिक्र नहीं है। इससे लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों में गुस्सा फैल रहा है। पहले 7वें वेतन आयोग (28 फरवरी 2014 के संकल्प में) स्पष्ट रूप से पेंशन पुनरीक्षण को शामिल किया गया था। उसमें कहा गया था कि आयोग पेंशन की संरचना की जांच करेगा और 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों की पेंशन में भी संशोधन करेगा, चाहे वे रिटायरमेंट से पहले या बाद में सेवानिवृत्त हों। लेकिन 8वें आयोग में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो पेंशनरों के साथ अन्याय है।

महासंघ ने चेतावनी दी है कि पेंशन को “गैर-अंशदायी और गैर-वित्त पोषित” बताने वाला क्लॉज एफ-3 हटाया जाए। पेंशन कोई दान या कृपा नहीं है, बल्कि कर्मचारी की लंबी सेवा का हक और विलंबित वेतन है। अगर यह पैसा तुरंत दिया जाता तो सरकार को फंड जुटाना पड़ता, लेकिन इसे बाद में देने से सरकार के पास बचत रहती है। इसलिए पेंशन कर्मचारी का अपना योगदान है और इसे फंडेड कहा जाना चाहिए।
वित्त विधेयक 2025 पर कड़ी आपत्ति
ज्ञापन में वित्त विधेयक 2025 के उन प्रावधानों पर भी विरोध जताया गया है, जो पेंशनरों में तारीख के आधार पर भेदभाव करते हैं। कुछ पेंशनरों को लाभ मिलेगा, कुछ को नहीं – यह गलत है। महासंघ ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक डीएस नाकरा केस (17 दिसंबर 1982) का हवाला दिया। कोर्ट की पूर्ण पीठ ने कहा था कि पेंशनरों में तारीख के आधार पर भेदभाव नहीं हो सकता। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है। पेंशन कोई भिक्षा नहीं, बल्कि सेवा का प्रतिफल है।
इसके अलावा, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के संसद में दिए बयान का जिक्र किया गया। मंत्री ने आश्वासन दिया था कि 8वें आयोग में पेंशनरों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। लेकिन नोटिफिकेशन में ऐसा कुछ नहीं है। सरकारी अधिकारियों के समाचार पत्रों में छपे बयानों का भी हवाला दिया गया, जहां दावा किया गया कि विधेयक से पेंशनरों को नुकसान नहीं होगा, लेकिन हकीकत उलट है।
महासंघ क्यों लड़ रहा है यह लड़ाई
डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ डिप्लोमा धारक छात्रों, काम कर रहे इंजीनियर्स, रिटायर्ड कर्मचारियों और उनके परिवार पेंशनरों के हितों की रक्षा करता है। महासचिव के पुराने पत्रों का जिक्र करते हुए कहा गया कि इस मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए, वरना कर्मचारियों का गुस्सा शांत नहीं होगा। हमेशा से वेतन आयोगों में पेंशन को ध्यान में रखा जाता है। वेतनमान थोड़े कम रखे जाते हैं क्योंकि रिटायरमेंट के बाद पेंशन देनी पड़ती है। अब पेंशन को अलग रखना करोड़ों कर्मचारियों के साथ धोखा है।
आंदोलन की चेतावनी
महासंघ ने साफ कहा कि अगर 8वें आयोग के नियमों में पेंशन पुनरीक्षण शामिल नहीं किया गया, वित्त विधेयक 2025 के भेदभाव वाले हिस्से हटाए नहीं गए और क्लॉज एफ-3 खत्म नहीं हुआ, तो बड़ा जनआंदोलन होगा। पूरे प्रदेश के कर्मचारी सड़कों पर उतर सकते हैं। रायबरेली में सदर तहसील कार्यालय में यह ज्ञापन सौंपा गया। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को पेंशनरों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ये लोग जीवनभर देश की सेवा करते हैं।










