रायबरेली में बेसिक शिक्षा विभाग की मनमानी और लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। यहां 30 वर्षों से एक ही जगह पर तैनात प्रिंसिपल पर शिक्षिका ने उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। अव्यवस्था पर सवाल उठाने वाली शिक्षिका को प्रिंसिपल ने विद्यालय से बाहर निकाल दिया है। जिसको लेकर शिक्षिका और प्रिंसिपल में तनातनी का माहौल बना हुआ है।
बताते चले की यहां शहर के नगर क्षेत्र के छोटी बाजार में स्थित सरकार से मान्यता प्राप्त पब्लिक जूनियर हाई स्कूल में फैली अव्यवस्था को लेकर एक शिक्षिका द्वारा सवाल उठाने पर कार्रवाई की गई हैं और 3000 की सैलरी पर भी कटौती कर ली जाती है। जानकारी के अनुसार,स्कूल में कार्यरत शिक्षिका फरानाज ने विद्यालय में व्याप्त अव्यवस्था, जैसे कि शिक्षण व्यवस्था में कमी, संसाधनों का अभाव और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर प्रिंसिपल परवीन बानो से सवाल किए। फरानाज ने स्कूल में बच्चों के हित में सुधार की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायत को गंभीरता से लेने के बजाय प्रिंसिपल परवीन बानो ने कथित तौर पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हें तत्काल स्कूल से बाहर निकाल दिया।

शिक्षिका फरानाज ने अपने बयान में कहा, मैंने स्कूल में बच्चों की पढ़ाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर सवाल उठाए थे। विद्यालय में न तो समय पर कक्षाएं संचालित हो रही हैं और न ही बच्चों को उचित संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मेरी मंशा केवल बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की थी, यहां विद्यालय में एक ही एलईडी बल्ब में 55 से 60 बच्चों को पढ़ाया जाता है। जातीय भेदभाव भी किए जाने का प्रिंसिपल पर आरोप लगा है। प्रिंसिपल ने मेरी बात सुनने के बजाय मुझे आया के कहने पर अपमानित कर स्कूल से बाहर निकाल दिया। बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यशैली पहले भी सवालों के घेरे में रही है। पहले भी इस विद्यालय पर लगा चुके हैं कई आरोप। शिक्षिका फरानाज ने कहा कि अगर इस पर विभाग कोई कार्रवाई नहीं करेगा तो वह आगे उच्च अधिकारियों से कार्रवाई की मांग करेगी।
घटना के बाद प्रिंसिपल परवीन बानो से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने इस मामले उल्टा शिक्षिका पर ही स्कूल की मान मर्यादा को खराब करने और अनुशासनहीनता का आरोप लगा दिया स्कूल के अन्य कर्मचारियों ने भी इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। इस बीच, स्थानीय अभिभावकों और शिक्षक संगठनों ने इस घटना की निंदा की है और बेसिक शिक्षा विभाग से इसकी जांच की मांग की है।
उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ ने इस घटना को शिक्षकों के साथ अन्याय करार देते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। संगठन के एक पदाधिकारी ने कहा, “शिक्षिका ने स्कूल में सुधार की बात की, लेकिन उसे अपमानित कर बाहर निकाला गया। यह न केवल शिक्षिका का अपमान है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विफलता को दर्शाता है। हम इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से इस मामले में संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई आधिकारिक बयान नहीं मिल सका।
यह घटना रायबरेली में बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, जहां पहले भी बिना मान्यता वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई के आरोप लगते रहे हैं। इस घटना ने छोटी बाजार के पब्लिक जूनियर हाई स्कूल और बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शिक्षिका फरानाज ने इस मामले को उच्च अधिकारियों और शिक्षक संगठनों के सामने उठाने की बात कही है। वहीं, स्थानीय लोग और अभिभावक इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
यह मामला न केवल स्कूल प्रशासन की मनमानी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में सुधार के लिए आवाज उठाने वालों को किस तरह दबाने की कोशिश की जाती है। इस घटना के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि बेसिक शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है।










