नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और अपहरण के मामलों में हाईकोर्ट की सख्ती

हाल के दिनों में भारत के विभिन्न हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म और अपहरण के मामलों में सख्त रुख अपनाया है। ये फैसले POCSO एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act) के तहत आरोपीयों को कड़ी सजाएं सुनाने और आरोपों को बरकरार रखने पर केंद्रित हैं। ये निर्णय समाज में महिलाओं और नाबालिगों के प्रति बढ़ते अपराधों के खिलाफ मामलों में सख्त रुख अपनाया हैं।

सोनभद्र जनपद में अपहृत नाबालिग लड़की की बरामदगी न होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त हो गया है। हाईकोर्ट ने सोनभद्र के एसपी से हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। मामला बभनी थाना क्षेत्र का है, जहां नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और अपहरण का गंभीर आरोप है। लड़की की मां की ओर से दाखिल याचिका पर कोर्ट ने यह सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में पीड़ित पक्ष की पैरवी अधिवक्ता विकास शाक्य कर रहे हैं। बभनी थाना क्षेत्र की इस घटना ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब डेढ़ महीने पहले नाबालिग लड़की का अपहरण हुआ, लेकिन अब तक पुलिस उसे आरोपियों के कब्जे से मुक्त नहीं करा पाई है। लड़की की मां का आरोप है कि 9 अगस्त की रात आरोपी प्रदीप गुप्ता ने शादी का झांसा देकर उसकी नाबालिग बेटी को अपने घर ले जाकर दुष्कर्म किया। पीड़िता की ओर से बभनी थाने में तहरीर भी दी गई, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

इतना ही नहीं, जब परिवार के लोगों ने आरोपी पक्ष से बेटी को छुड़ाने की कोशिश की, तो उन्हें जातिसूचक गालियां दी गईं और मारपीट की गई। थक-हारकर पीड़िता की मां ने अधिवक्ता विकास शाक्य के जरिए हाईकोर्ट प्रयागराज का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए सोनभद्र के एसपी, सीओ और थाना प्रभारी बभनी को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि पीड़िता की बरामदगी सुनिश्चित कर पूरी रिपोर्ट अदालत में 7 अक्टूबर तक पेश की जाए।

वहीं मामले की जानकारी देते हुए अधिवक्ता विकास शाक्य ने बताया कि बभनी थाना क्षेत्र के एक गांव में जहां एक नाबालिग लड़की थी उसी गांव के रहने वाले एक लड़के न जन जातीय परिवार की एक नाबालिग लड़की थी, जिसके साथ रात्रि में घर में घुसकर दुष्कर्म किया। इस दौरान लड़की जब रोने चिल्लाने लगी तो बगल में सोए परिजन सभी जग गए। इस दौरान लड़के को पकड़ लिए और उसका एक दोस्त, जो बाहर खड़ा था वह भाग गया। बाद में लड़के के घर वाले आए और लड़के को छुड़ा लिए और जो नाबालिग लड़की थी उसे जबरन उठाकर ले गए। इस संबंध में गांव के जो मुखिया होते हैं उनके बीच पंचायत भी हुई।

अधिवक्ता ने यह भी कहा कि इस दौरान आरोपी पक्ष के लोगों द्वारा पीड़ित पक्ष के साथ मारपीट भी की गई। इसके बाद यह मामला पुलिस में गया किंतु पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज नहीं किया। फिर पास्को न्यायालय में मुकदमा दर्ज करने की अपील की गई, तो न्यायालय ने थाना बभनी से जवाब मांगा। जब थाने को यह जानकारी हुई कि मामला न्यायालय में चला गया तो जिसके बाद दूसरी घटना की तहरीर के आधार पर मुकदमा कायम किया गया और न्यायालय को रिपोर्ट दे दी गई। न्यायालय द्वारा उसे खारिज कर दिया गया। तहरीर बदलवाने की पुलिस के रवैए से क्षुब्ध होकर उच्च न्यायालय में पूरे प्रकरण को ले जाया गया। उच्च न्यायालय ने सारे प्रकरण को देखने के बाद काफी नाराजगी जाहिर की। एक नाबालिग लड़की जनजाति समुदाय की जिसे अपने बाहुबल के दम पर अपने कब्जे में रखे हुए हैं और फोटो भी वायरल किए हुए हैं शादी करके। इस पूरे प्रकरण पर पुलिस अधीक्षक सोनभद्र को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र देने का आदेश दिया गया है। साथ ही 48 घंटे के भीतर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को यह आदेश दिया है कि एसपी, पुलिस क्षेत्राधिकारी, स्टेशन अफसर को यह आदेश जारी किया जाए। लड़की के बरामदगी के संबंध में काफी गंभीर है उच्च न्यायालय।

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