रायबरेली : कोतवाली नगर क्षेत्र के रहने वाले एक बुजुर्ग ने मुकदमे का दंश झेलने से आहत होकर नदी में चलांग लगा दी और खुद को मौत के हवाले कर दिया, अदालतों में लंबित मामलों और तारीख पर तारीख की लंबी प्रक्रिया ने एक और ज़िंदगी को लील लिया।
बताते चलें कि शहर कोतवाली क्षेत्र के उत्तरी दरवाज़ा निवासी 58 वर्षीय राजेंद्र शुक्ला उर्फ़ चिंटू शुक्ला ने बीती रात सई नदी में कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी और न्यायिक प्रक्रिया की सुस्ती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

18 साल से चल रहा था मुकदमा
राजेंद्र शुक्ला पर वर्ष 2007 से भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा विचाराधीन था। पिछले 18 साल से लगातार चल रही अदालती कार्रवाई और बार-बार की तारीखों ने उन्हें मानसिक और भावनात्मक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया। लंबी कानूनी लड़ाई के तनाव को और न झेल पाने के कारण उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।
सुसाइड नोट में बयां किया दर्द
सई नदी में कूदने से पहले राजेंद्र ने दो चिट्ठियां लिखीं। पहली चिट्ठी अदालत को संबोधित एक सुसाइड नोट था, जिसमें उन्होंने अपनी सह-अभियुक्त शमीमा बानो को बरी करने की गुज़ारिश की। दूसरी चिट्ठी में उन्होंने अपने परिवार को व्हाट्सएप के ज़रिए अपनी व्यथा बताई। इस चिट्ठी में उन्होंने साफ़ लिखा,18 साल से मुकदमा लड़ते-लड़ते मैं टूट गया हूँ। इन चिट्ठियों ने उनके मानसिक दबाव और हताशा को स्पष्ट रूप से उजागर किया।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और गोताखोरों की टीम सई नदी में राजेंद्र की तलाश में जुट गई। रात भर चले सर्च ऑपरेशन के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिल सका। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है, और परिजनों से पूछताछ की जा रही है। यह दर्दनाक घटना एक बार फिर न्याय प्रक्रिया की सुस्ती और इसके मानवीय दुष्परिणामों को सामने लाई है। 18 साल तक अदालत में तारीखों का सिलसिला और अनिश्चितता ने राजेंद्र शुक्ला जैसे व्यक्ति को इस हद तक हताश कर दिया कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी खत्म करने का फैसला कर लिया। इस घटना ने समाज और प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारी न्यायिक व्यवस्था में सुधार की ज़रूरत नहीं है?
राजेंद्र शुक्ला के इस कदम से उनके परिवार में शोक की लहर है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं स्थानीय लोग इस घटना से स्तब्ध हैं। उत्तरी दरवाज़ा क्षेत्र में इस घटना की चर्चा जोरों पर है, और लोग न्याय प्रक्रिया की लंबी अवधि को लेकर नाराज़गी जता रहे हैं।










