रायबरेली : महराजगंज विकासखंड के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आई है। यहां सरकार से मरीज को दी जाने वाली दवाओं को बाहर फेंके जाने के वायरल वीडियो के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है।
बताते चलें कि शनिवार को जनाई गांव में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ग्रामीणों के सामने दिखी। यहां आशा बहुओं को वितरित की जाने वाली आयरन की गोलियां और ओआरएस पैकेट जो बुखार से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के लिए निशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।

सूत्रों के हवाले से बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा गरीबों तक पहुंचने के बजाय कुओं में फेंके जा रही है दवाइयां। बताया जा रहा है कि इन दवाओं की एक्सपायरी डेट 2027 है। यानी ये अभी कई वर्षों तक उपयोगी हैं। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो गया, जिसमें दवाओं को नष्ट करते दिखाया गया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी सरकारी योजना ‘मिशन स्वास्थ्य’ की भावना को ठेंगा दिखा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को एनीमिया से बचाने के लिए ये दवाएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन विभागीय भ्रष्टाचार के चलते ये बर्बाद हो रही हैं। स्थानीय अरविंद निवासी ने बताया हमारे गांव में सैकड़ों महिलाएं इनका इंतजार करती हैं, लेकिन कर्मचारी इसे बेचने या नष्ट करने में लगे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया।
सूत्रों के हवाले से बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जांच टीम गठित की है और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, ग्रामीणों में आक्रोश है कि ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। पहले भी रायबरेली में नहरों और कूड़ेदानों में दवाएं फेंकी मिल चुकी हैं। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलती है, जहां केंद्र सरकार की योजनाएं जमीनी स्तर पर विफल हो रही हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी लापरवाही पर सख्ती बरते, ताकि गरीबों का हक सुरक्षित रहे।










