बरेली हिंसा मामला: सपा प्रतिनिधिमंडल ने डीआईजी से की उच्चस्तरीय जांच की मांग, निर्दोषों को जेल से बचाने का आग्रह

बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में 26 सितंबर को ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर विवाद के बाद भड़की हिंसा के मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) ने प्रशासन पर निष्पक्षता का सवाल उठाया है। पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को डीआईजी अजय कुमार साहनी से मुलाकात कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की, साथ ही निर्दोष लोगों के खिलाफ कार्रवाई रोकने और दोषियों पर सख्त एक्शन लेने की अपील की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पूर्व मंत्री भगवत शरण गंगवार और जिला अध्यक्ष शिवचरन कश्यप ने संयुक्त रूप से किया।

घटना का पृष्ठभूमि: ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर से भड़का बवाल

26 सितंबर को बरेली के संवेदनशील इलाकों में ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे पोस्टर लगाए जाने के बाद तनाव बढ़ गया था। इस विवाद को लेकर कुछ समूहों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो जल्द ही हिंसक रूप धारण कर लिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया और हवा में गोली चलाई। इस दौरान बाजारों और मस्जिदों के आसपास तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं।

पुलिस के अनुसार, यह हिंसा पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा लग रही है। डीआईजी अजय कुमार साहनी ने बताया कि वीडियो फुटेज के आधार पर सभी उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। अब तक 15 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि कई निर्दोषों पर भी एफआईआर दर्ज होने की खबरें हैं। इस घटना के बाद शहर में तनाव बना हुआ है, और प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हिंसा पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, मौलाना को भूल गया कि उत्तर प्रदेश में किसकी सरकार है। उन्होंने चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था पर कोई समझौता नहीं होगा और दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।

सपा का अलग रुख: निष्पक्ष जांच पर जोर

सपा ने इस घटना पर शुरू से ही पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा था कि “यूपी में गुंडा राज लौट आया है। पुलिस किसी का भी हड्डी तोड़ सकती है और किसी को भी जेल भेज सकती है।” अब पार्टी ने जमीन पर उतरकर एक्शन लिया है।

मंगलवार दोपहर को सपा का प्रतिनिधिमंडल डीआईजी कार्यालय पहुंचा। इसमें पूर्व मंत्री भगवत शरण गंगवार, जिला अध्यक्ष शिवचरन कश्यप के अलावा पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने डीआईजी को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें निम्नलिखित मांगे की गईं:

  • उच्चस्तरीय जांच : घटना की पूरी जांच उच्च स्तर पर कराई जाए, जिसमें वीडियो सबूतों और गवाहों का निष्पक्ष विश्लेषण हो।
  • निर्दोषों का संरक्षण : हाल की घटना में कई निर्दोष लोगों पर कार्रवाई की खबरें हैं। ऐसे लोगों को जेल न भेजा जाए और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों की समीक्षा की जाए।
  • दोषियों पर सख्ती : असली उपद्रवियों की शिनाख्त कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
  • निष्पक्षता सुनिश्चित : जांच पूरी तरह तथ्यों पर आधारित हो, न कि राजनीतिक दबाव पर।

पूर्व मंत्री भगवत शरण गंगवार ने मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा, समाजवादी पार्टी कानून और व्यवस्था का पूरा सम्मान करती है, लेकिन निर्दोषों को परेशान करना लोकतंत्र के खिलाफ है। हमने डीआईजी से आश्वासन मांगा है कि वे हमारी अपील पर संज्ञान लेंगे और न्यायसंगत निर्णय सुनिश्चित करेंगे।” जिला अध्यक्ष शिवचरन कश्यप ने जोड़ा, “यह केवल सपा की मांग नहीं, बल्कि बरेली के आम नागरिकों की भावना है। प्रशासन को पक्षपात से ऊपर उठना चाहिए।”

राजनीतिक रंग: सपा वीएस भाजपा?

यह मुलाकात सपा की रणनीति का हिस्सा लग रही है, जो 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भाजपा पर हमलवार रुख अपना रही है। अखिलेश यादव ने हाल ही में योगी सरकार पर ‘परिवारवाद और जातिवाद’ का आरोप लगाते हुए कहा था कि यूपी का विकास रुक गया है। वहीं, भाजपा ने सपा को ‘अराजक तत्वों का समर्थन’ करने का आरोप लगाया है।

डीआईजी अजय कुमार साहनी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि जांच में किसी निर्दोष को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम वीडियो साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर रहे हैं। सपा की अपील पर विचार किया जाएगा।”

आगे की उम्मीदें

सपा नेताओं ने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो पार्टी सड़क पर उतरेगी और बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी। बरेली में शांति बहाल करने के लिए प्रशासन ने धार्मिक नेताओं से भी बातचीत की है। इस घटना ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की संवेदनशील सांप्रदायिक स्थिति को उजागर कर दिया है, जहां छोटे विवाद भी बड़े बवाल में बदल सकते हैं।

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