DRDO Plan Sudarshan Chakra Mission: भारत ने अपनी वायु रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठा लिया है। DRDO ने ‘Project Kusha’ नाम के हाइपरसोनिक एयर डिफेंस सिस्टम (Hypersonic Air Defense System) पर काम शुरू किया है, जो आने वाले समय में देश की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकता है। यह प्रणाली मैक 5.5 यानी करीब 6,800 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकेगी और 350 किलोमीटर दूर तक के हवाई खतरों को खत्म करने की ताकत रखेगी। इस सिस्टम को भारत के ‘सुदर्शन चक्र मिशन’ का अहम हिस्सा बताया जा रहा है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2025 को लॉन्च किया था। तो चलिए जानते हैं- आखिर क्या है इस हाई-टेक सिस्टम की खासियत और कैसे बदलेगा भारत का एयर डिफेंस गेम?
भारत का नया सुदर्शन चक्र ‘Project Kusha’/DRDO Plan Sudarshan Chakra Mission
‘Project Kusha’ एक Surface-to-Air Missile System (SAM) है, जिसे DRDO ने देश की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विकसित करना शुरू किया है। यह प्रणाली दुश्मन के बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज़ मिसाइल, हाइपरसोनिक व्हीकल्स और स्टील्थ फाइटर जेट्स को इंटरसेप्ट करने में सक्षम होगी। DRDO का दावा है कि यह सिस्टम 350 किलोमीटर दूर से आने वाले खतरों को भी नष्ट कर सकता है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और आने वाले वर्षों में यह भारत को दुनिया के टॉप एयर डिफेंस नेटवर्क्स (Air Defense Networks) में शामिल कर सकता है। विशेषज्ञ इसे भारत का ‘सुदर्शन चक्र’ (Sudarshan Chakra) कह रहे हैं, जो किसी भी हवाई खतरे को जमीन से ही खत्म करने में सक्षम होगा।

M1, M2 और M3, हर लेवल पर सुरक्षा
DRDO ‘कुशा’ सिस्टम को तीन वेरिएंट्स— M1, M2 और M3 में विकसित कर रहा है। इनमें से M3 को मुख्य इंटरसेप्टर माना जा रहा है, जो ऊंचाई पर आने वाले लक्ष्यों को सटीकता से निशाना बनाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सिस्टम 4 किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से आती बैलिस्टिक मिसाइल को भी इंटरसेप्ट करने की क्षमता रखता है। यह 2,500–3,000 किलोमीटर रेंज वाली मिसाइलों को उनके re-entry phase में ही खत्म कर सकेगा। इससे F-35 और Su-57 जैसे स्टील्थ जेट, जो आमतौर पर रडार से बच निकलते हैं, अब इस सिस्टम की पकड़ में आ जाएंगे। यानी, भारत के पास अब दुश्मनों की ‘इनविज़िबल’ टेक्नोलॉजी से निपटने का हथियार भी होगा।
हाई-टेक फीचर्स और ‘हिट-टू-किल’ तकनीक
‘Project Kusha’ को DRDO ने दुनिया के सबसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम्स (Advanced Air Defence Systems) की तर्ज पर डिजाइन किया है। इसमें ड्यूल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर, थ्रस्ट-वेक्टर कंट्रोल, और RF व IR सीकर जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं। सबसे खास बात है इसकी ‘हिट-टू-किल’ तकनीक, जिसके तहत मिसाइल लक्ष्य से सीधे टकराकर उसे पूरी तरह नष्ट करती है — केवल विस्फोटक वॉरहेड पर निर्भर नहीं रहती। इससे सिस्टम की सफलता दर 80–90% तक बढ़ जाती है। यह तकनीक हाइपरसोनिक व्हीकल्स, फाइटर जेट्स और क्रूज़ मिसाइल जैसे हाई-स्पीड टारगेट्स को भी सटीकता से गिरा सकती है, जिससे भारत की एयर डिफेंस स्ट्रैटेजी में क्रांतिकारी बदलाव आने वाला है।
S-500 जैसी ताकत और मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम में नई जान
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ‘कुशा’ सिस्टम की क्षमता रूस की S-500 Prometey प्रणाली के बराबर है। यह भारत के मल्टी-लेयर एयर डिफेंस नेटवर्क का हिस्सा बनेगा, जिसमें पहले से मौजूद S-400 ट्रायम्फ और स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। तीनों सिस्टम मिलकर भारत को तीन स्तरों पर सुरक्षा देंगे-
नजदीकी रेंज (आकाश, MRSAM),
मीडियम रेंज (S-400),
और लॉन्ग रेंज (Kusha)।
DRDO के लिए यह प्रोजेक्ट तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि हाइपरसोनिक गति पर मिसाइल को कंट्रोल करना और लक्ष्य पर सटीक वार करना आसान नहीं। हालांकि DRDO पहले ही HSTDV (Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle) का सफल परीक्षण कर चुका है, जिससे इस मिशन की नींव मजबूत हो चुकी है।
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