Morning Secrets by Premanand Maharaj: भारतीय संस्कृति में कहा गया है – “जो सोवत है, वो खोवत है।” यह केवल कहावत नहीं, बल्कि जीवन का गहरा सत्य है। हमारे ऋषि-मुनि मानते हैं कि जो व्यक्ति सूर्योदय से पहले जागता है, उसका दिन ही नहीं, भाग्य भी उज्जवल होता है। इसी विचार को संत प्रेमानंद महाराज (Premanand Ji Maharaj) ने अपने हालिया प्रवचन में एक नए दृष्टिकोण से समझाया। उन्होंने बताया कि देर तक सोना न केवल शारीरिक सुस्ती का कारण बनता है, बल्कि धीरे-धीरे मानसिक और आत्मिक ऊर्जा को भी कमजोर करता है। महाराज का कहना है कि सुबह का समय सिर्फ एक दिन की शुरुआत नहीं, बल्कि आत्मा के पुनर्जागरण का क्षण होता है। तो चलिए जानते हैं विस्तार से, आखिर देर तक सोने से जीवन पर क्या असर पड़ता है।
सुबह की पहली किरण का रहस्य/Morning Secrets by Premanand Maharaj
संत प्रेमानंद महाराज (Premanand Ji Maharaj) कहते हैं कि सूरज की पहली किरण के साथ उठना केवल अनुशासन नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ तालमेल बैठाने की साधना है। सूर्योदय के समय वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा सबसे अधिक होती है, जो हमारे शरीर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करती है। यही समय पृथ्वी की सबसे शुद्ध ऊर्जा का होता है — जब पक्षियों का कलरव, मंद हवा और लालिमा भरा आकाश मन को ताजगी और स्थिरता देता है। महाराज के अनुसार, जो लोग इस समय सोते रहते हैं, वे इस अमूल्य प्राकृतिक वरदान से वंचित रह जाते हैं। सुबह का यह क्षण शरीर, मन और आत्मा तीनों के लिए “ऊर्जा का पुनर्जन्म” होता है, जो देर तक सोने वालों के जीवन से धीरे-धीरे लुप्त हो जाता है।

घटती जीवनशक्ति और मुरझाता तेज
महाराज प्रेमानंद जी (Premanand Ji Maharaj) के अनुसार, देर तक सोने की आदत सिर्फ आलस्य नहीं, बल्कि जीवनशक्ति के ह्रास का संकेत है। ऐसे व्यक्ति के शरीर में ऊर्जा का प्रवाह कम हो जाता है और मन अस्थिर हो जाता है। सबसे पहला प्रभाव चेहरे पर दिखाई देता है— प्राकृतिक तेज और चमक धीरे-धीरे गायब होने लगती है। सुबह की ठंडी हवा और सूर्य की कोमल किरणें त्वचा की कोशिकाओं को जागृत करती हैं, जिससे शरीर में रक्त प्रवाह संतुलित रहता है। जो लोग देर तक सोते हैं, वे इस ‘नेचुरल थेरेपी’ से वंचित रहते हैं। महाराज कहते हैं, “सुबह का प्रकाश शरीर को ही नहीं, आत्मा को भी पुनर्जीवित करता है।”
समय के पीछे दौड़ता मनुष्य
प्रेमानंद महाराज (Premanand Ji Maharaj) समझाते हैं कि देर से उठने वाला व्यक्ति हमेशा समय के पीछे भागता रहता है। उसका दिन हड़बड़ी और असंतुलन में गुजरता है, जिससे आत्मविश्वास और कर्मठता दोनों कमजोर पड़ जाती हैं। जल्दी उठने वाला व्यक्ति अपने दिन पर नियंत्रण रखता है, जबकि देर से उठने वाला व्यक्ति अपने समय का दास बन जाता है। महाराज के शब्दों में, “जो व्यक्ति सूरज के साथ उठता है, वह अपने भाग्य को दिशा देता है; और जो देर तक सोता है, वह उसी भाग्य को खो देता है।” इसलिए सुबह की अनुशासित शुरुआत केवल दिनचर्या नहीं, बल्कि आत्मनियंत्रण की पहचान है।
आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से लाभकारी
संत प्रेमानंद जी (Premanand Ji Maharaj) के अनुसार, सूर्योदय (Sunrise) के समय सूर्यदेव की आराधना केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। सूर्य की किरणें शरीर में विटामिन D (Vitamin-D) का निर्माण करती हैं, जो हड्डियों और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। वहीं, प्रातःकालीन प्रकाश मस्तिष्क में सेरोटोनिन हार्मोन को सक्रिय करता है, जिससे मन प्रसन्न और स्थिर रहता है। जो व्यक्ति नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देता है, उसके जीवन में सकारात्मकता और संतोष स्वतः बढ़ता है। महाराज कहते हैं, “जो सूरज की पहली किरण को प्रणाम करता है, वह अपने भीतर एक नया सवेरा जगाता है।”









