Job Crisis in Tech Companies: भारत (India) के तेजी से बदलते टेक सेक्टर का एक चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस वीडियो में एक आईटी इंजीनियर दिखाई देता है, जो हाल तक नोएडा (Noida) की एक कंपनी में काम करता था, लेकिन हायरिंग स्लोडाउन और AI ऑटोमेशन के बढ़ते असर ने उसकी नौकरी छीन ली। पिछले दो महीनों से बेरोजगार चल रहे इस इंजीनियर के लिए EMI और घर के बढ़ते खर्च संभालना मुश्किल हो गया, जिसके बाद उसे मजबूरी में रैपिडो राइडर (Rapido Rider) के रूप में काम शुरू करना पड़ा। यह वीडियो न सिर्फ व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी बयान करता है, बल्कि देश में बढ़ती बेरोजगारी और टेक सेक्टर की अनिश्चितता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। आखिर कैसे एक इंजीनियर की जिंदगी कुछ ही महीनों में बदल गई? चलिए जानते हैं।
अचानक नौकरी जाने से बढ़ी जीवन की मुश्किलें/Job Crisis in Tech Companies
नोएडा (Noida) में काम करने वाला यह आईटी इंजीनियर (IT Engineer) अपनी आरामदायक नौकरी और स्थिर आय पर निर्भर था। लेकिन टेक सेक्टर में AI-आधारित बदलाव, प्रोजेक्ट्स का कम होना और कंपनियों में चल रहे हायरिंग स्लोडाउन ने हालात बदल दिए। दो महीने पहले उसे अचानक नौकरी से निकाल दिया गया। उम्मीद थी कि किसी बेहतर अवसर की तलाश जल्द पूरी होगी, लेकिन इंटरव्यू कॉल्स लगभग बंद हो गए। इस बीच उसकी होम लोन EMI हर महीने तय तारीख पर देनी थी, जिससे आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता गया। नोएडा जैसे महंगे शहर में रहना, किराया, खाने-पीने और रोजमर्रा के खर्च नौकरी जाने के बाद बोझ बन गए। हालात ऐसे बने कि उसे अपनी फैमिली को गांव भेजना पड़ा और खुद एक छोटे किराए के घर में शिफ्ट होना पड़ा।

वायरल वीडियो ने खोली टेक सेक्टर की सच्चाई
Nomadic Teju नाम के कंटेंट क्रिएटर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें अपने दोस्त की वास्तविक कहानी बताई। वीडियो में पता चला कि कैसे बेहतर जॉब के इंतजार में उसने पुरानी नौकरी छोड़ दी थी, लेकिन बाजार की हालत ने उसकी उम्मीदों को तोड़ दिया। महंगे फ्लैट की EMI, 30–35 हजार रुपये का किराया और रोजमर्रा के बढ़ते खर्चों ने उसे मानसिक और आर्थिक संकट में धकेल दिया। नौकरी न होने के कारण जब EMI भरना मुश्किल हुआ, तब उसने पार्ट-टाइम Rapido राइड्स देने का निर्णय लिया। यह वीडियो वायरल होते ही टेक सेक्टर में बेरोजगारी की सच्चाई और AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव पर बड़ी बहस छिड़ गई। नौकरी की कमी से जूझ रहे हजारों युवाओं ने इस कहानी से खुद को जोड़ा।
मदद के प्रयास और कड़वी वास्तविकता
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूज़र्स ने चिंता जताई और इंजीनियर के लिए नौकरी की तलाश में मदद करने की पेशकश की। एक यूज़र ने लिखा—“बताइए किस डोमेन में अनुभव है, शायद मैं रेफर कर सकूं।” वहीं कुछ ने बताया कि Rapido या Zomato जैसी ऐप-बेस्ड डिलीवरी में 20–25 हजार रुपये से ज्यादा कमाना बेहद मुश्किल है। यह प्रतिक्रियाएं स्पष्ट करती हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोग एक-दूसरे का सहयोग तो कर रहे हैं, लेकिन असली समस्या गहरी है। टेक सेक्टर में हायरिंग धीमी होने के कारण हजारों इंजीनियरों को अस्थायी, मेहनत-युक्त काम करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। बेरोजगारी का यह दौर कई परिवारों की आर्थिक स्थिति हिला रहा है।
EMI का दबाव और दोहरी कमाई की कोशिश
नौकरी की तलाश जारी रखते हुए यह इंजीनियर अब रैपिडो (Rapido) राइड्स के अलावा फ्रीलांस काम भी कर रहा है, ताकि आय के स्रोत बढ़ सकें। हालांकि इतनी मेहनत के बाद भी EMI का दबाव कम नहीं हुआ है। होम लोन समय पर चुकाना उसकी सबसे बड़ी चिंता बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत (India) की टेक इंडस्ट्री में हायरिंग स्लोडाउन अभी कुछ समय और जारी रह सकता है, जिससे कई युवाओं पर आर्थिक संकट गहराने की आशंका है। यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति की मजबूरी नहीं, बल्कि उस स्थिति का प्रतीक है जिसमें AI ऑटोमेशन, प्रोजेक्ट कमी और आर्थिक दबाव ने कई इंजीनियरों का करियर अनिश्चितता में डाल दिया है। फिलहाल यह इंजीनियर किसी स्थिर नौकरी के इंतजार में दिन-रात मेहनत कर रहा है और उम्मीद लगाए हुए है कि हालात जल्द बदलेंगे।









