पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी: 26 साल पुराने देवरिया प्लॉट घोटाले में पुलिस का शिकंजा, ट्रेन से उतारकर हिरासत में लिया

देवरिया : उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के चर्चित पूर्व आईपीएस (IPS) अधिकारी अमिताभ ठाकुर को लखनऊ पुलिस ने रातों-रात गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी 1999 के देवरिया (Deoria) जिले के एक औद्योगिक प्लॉट आवंटन से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में हुई है। ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने देवरिया के एसपी रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग कर पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर फर्जी दस्तावेजों से सरकारी प्लॉट हथियाया था। गिरफ्तारी के दौरान ड्रामेटिक सीन देखने को मिला, जब दिल्ली जा रही ट्रेन से उन्हें शाहजहांपुर में उतार लिया गया। ठाकुर ने कोर्ट में पेशी के दौरान कहा, “मेरी हत्या कराई जा सकती है, यह योगी सरकार का षड्यंत्र है।” पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह कानूनी कार्रवाई है और कोई राजनीतिक बदला नहीं।

घटना का पूरा विवरण: ट्रेन से गिरफ्तारी का फिल्मी अंदाज

9-10 दिसंबर की रात करीब 2 बजे, अमिताभ ठाकुर लखनऊ से दिल्ली जा रही ट्रेन नंबर 12429 (लखनऊ-नई दिल्ली एसी एक्सप्रेस) के एम-3 कोच में सवार थे। शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रुकी ही थी कि सादे कपड़ों में वेशभूषा वाले पुलिसकर्मी कोच में घुस आए। कुछ वर्दी में, तो कुछ सिविल ड्रेस में। चश्मदीदों के मुताबिक, ठाकुर ने कारण पूछा, लेकिन पुलिस ने उन्हें जबरन उतार लिया। गिरफ्तारी से पहले उन्होंने विरोध जताया और कहा, “अगर मुझे मारना है तो यहीं मार दीजिए, मैं नहीं जाऊंगा।” उनका सामान और जूते भी पुलिस ने जब्त कर लिए।

पुलिस ने बताया कि यह स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की कार्रवाई थी, जो लखनऊ के डीसीपी (पश्चिम) विश्वजीत श्रीवास्तव के नेतृत्व में गठित की गई थी। गिरफ्तारी के बाद ठाकुर को सितापुर-महोली बॉर्डर से उठाकर देवरिया ले जाया गया। बुधवार सुबह उन्हें देवरिया सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां जमानत याचिका खारिज हो गई। पुलिस ने कहा कि अपराध देवरिया में हुआ, इसलिए कोर्ट के समक्ष पेशी जरूरी थी। गिरफ्तारी की सूचना ठाकुर की पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर को तालकटोरा थाने के प्रभारी ने फोन पर दी।

मामला क्या है? 1999 का प्लॉट फर्जीवाड़ा

यह मामला 26 साल पुराना है, जब अमिताभ ठाकुर देवरिया के सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसपी) थे। शिकायतकर्ता संजय शर्मा (राजाजीपुरम, लखनऊ) ने 12 सितंबर 2025 को तालकटोरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई। आरोप है कि ठाकुर ने पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर फर्जी पहचान—”नूतन देवी” (पत्नी का नाम), “अभिजात/अभिताप ठाकुर” (पति का फर्जी नाम), और सितामढ़ी (बिहार) का गलत पता—उपयोग कर देवरिया डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्रीज सेंटर से प्लॉट नंबर बी-2 आवंटित कराया।

फर्जी दस्तावेजों में शामिल थे

  • आवेदन फॉर्म,
  • एफिडेविट,
  • ट्रेजरी चालान,
  • ट्रांसफर डीड।

इनके जरिए सरकारी विभागों, बैंकों और अन्य पक्षों को वर्षों तक धोखा दिया गया। बाद में प्लॉट को असली पहचान से बेच दिया गया। ठाकुर पर अपने पद का दुरुपयोग कर इस फर्जीवाड़े को संरक्षण देने का आरोप है। एफआईआर आईपीसी की धाराओं 419 (धोखाधड़ी), 420 (छल), 467/468 (जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग), 34 (साझा आशय) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज हुई।

एसआईटी ने देवरिया और बिहार में सत्यापन किया, गवाहों से पूछताछ की और दस्तावेज इकट्ठे किए। पर्याप्त सबूत मिलने पर गिरफ्तारी की गई। डीसीपी श्रीवास्तव ने कहा, “यह पारदर्शी जांच का नतीजा है। कोई राजनीतिक दबाव नहीं।”

अमिताभ ठाकुर का बैकग्राउंड: विवादों से घिरा सफर

अमिताभ ठाकुर 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे, जिन्हें 2021 में “अक्षमता” और “जनहित में अनुपयुक्त” बताकर जबरन रिटायर कर दिया गया। वे आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और भ्रष्टाचार, पुलिस सुधार व नागरिक अधिकारों पर मुखर रहे। 2015 में सपा सरकार के खिलाफ ऑडियो क्लिप जारी कर मुलायम सिंह यादव पर धमकी का आरोप लगाया था। 2021 में बलिया रेप पीड़िता के सुसाइड केस में आत्महत्या भड़काने के आरोप में गिरफ्तार हुए थे। हाल ही में उन्होंने योगी सरकार पर ठाकुरवाद के आरोप लगाए थे। उनके समर्थक इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” बता रहे हैं।

प्रतिक्रियाएं: षड्यंत्र या कानूनी कार्रवाई?

  • ठाकुर पक्ष : आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को शिकायत भेजी। आरोप लगाया कि गिरफ्तारी में पारदर्शिता नहीं, परिवार को सूचना नहीं दी गई, और उनके व उनकी पत्नी के एक्स अकाउंट सस्पेंड कर दिए गए। मांग: मेडिकल जांच, परिवार से मिलने की अनुमति, और सीबीआई जांच। ठाकुर ने कोर्ट में कहा, “यह षड्यंत्र है, मेरी जान को खतरा है।” वीडियो वायरल हो गया।
  • पुलिस और सरकार पक्ष : डीसीपी श्रीवास्तव ने कहा, “26 साल पुराना मामला हो या नया, कानून सबके लिए बराबर है। ठाकुर ने जांच में असहयोग किया, इसलिए गिरफ्तारी जरूरी थी।” भाजपा समर्थक इसे “ईमानदार छवि का काला सच” बता रहे, याद दिलाते हुए कि 2021 के रेप केस में भी गंभीर आरोप थे।
  • सोशल मीडिया पर बहस : एक्स पर #AmitabhThakur ट्रेंड कर रहा। कुछ यूजर्स इसे “रामराज्य का संदेश” बता रहे, तो कुछ “आवाज दबाने की कोशिश”। एक पोस्ट में कहा गया, “जब कानून के रखवाले ही फर्जीवाड़े करें, तो सिस्टम खोखला हो जाता है।”

आगे क्या? कोर्ट में रिमांड, जांच तेज

ठाकुर को पुलिस रिमांड में भेजा गया है। देवरिया कोतवाली को छावनी बना दिया गया है। एसआईटी पूछताछ जारी रखेगी। यदि सबूत मजबूत रहे, तो चार्जशीट दाखिल हो सकती है। ठाकुर के वकील जमानत के लिए हाईकोर्ट जा सकते हैं। एनएचआरसी की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

यह गिरफ्तारी यूपी की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है, खासकर ठाकुर की मुखरता को देखते हुए। क्या यह पुराने घोटाले का हिसाब है या नई साजिश? समय बताएगा।

Other Latest News

Leave a Comment