Shashi Tharoor Speech in Lok Sabha: लोकसभा में शशि थरूर का तीखा हमला, ‘राम का नाम बदनाम न करो’ कहकर सरकार पर साधा निशाना

Shashi Tharoor Speech in Lok Sabha: ‘महात्मा गांधी का राम राज्य राजनीतिक नहीं था’, विधेयक पर सदन में खुलकर बरसे शशि थरूर

Shashi Tharoor Speech in Lok Sabha: लोकसभा (Lok Sabha) में मंगलवार को उस वक्त माहौल गरमा गया, जब कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने विकसित भारत–जी राम जी विधेयक 2025 (Viksit Bharat–Ji Ram Ji Bill 2025) का जोरदार विरोध किया। थरूर ने न सिर्फ इस विधेयक के नाम और भावार्थ पर सवाल उठाए, बल्कि महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के विचारों को केंद्र में रखते हुए सरकार की मंशा पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने संसद में फिल्मी गीत का सहारा लेकर सत्तापक्ष पर कटाक्ष किया, जिससे सदन में हलचल मच गई। थरूर का तर्क था कि राम और राम राज्य की अवधारणा को राजनीतिक एजेंडे से जोड़ना उसके मूल अर्थ को कमजोर करता है। आखिर थरूर ने ऐसा क्यों कहा, गांधी के राम राज्य को लेकर उनका क्या तर्क था और सरकार पर उन्होंने कौन-से गंभीर आरोप लगाए—तो चलिए जानते हैं पूरा मामला क्या है….

विधेयक पर आपत्ति और तीखी बहस/Shashi Tharoor Speech in Lok Sabha

लोकसभा में जब विकसित भारत–जी राम जी विधेयक 2025 (Viksit Bharat–Ji Ram Ji Bill 2025) पेश किया गया, तो कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने इसका खुलकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का नाम और उसकी प्रस्तुति देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संवेदनाओं से जुड़ी अवधारणाओं को राजनीतिक रंग देने का प्रयास है। थरूर के मुताबिक, संसद में किसी भी कानून को पेश करते समय उसके सामाजिक और नैतिक प्रभावों को समझना जरूरी है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि राम जैसे व्यापक और आस्था से जुड़े नाम का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए किया जाना उचित नहीं है। इस आपत्ति के साथ ही सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जिसने विधेयक को लेकर विवाद को और गहरा कर दिया।

महात्मा गांधी का राम राज्य राजनीतिक नहीं था

अपने भाषण के दौरान शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के राम राज्य की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि गांधी जी का राम राज्य कभी भी एक राजनीतिक प्रोजेक्ट नहीं था, बल्कि यह एक सामाजिक और आर्थिक ब्लूप्रिंट था। इसका मूल उद्देश्य गांवों को मजबूत बनाना और ग्राम स्वराज (Gram Swaraj) के जरिए सबसे आखिरी व्यक्ति तक विकास पहुंचाना था। थरूर ने कहा कि गांधी जी का विश्वास था कि सच्ची तरक्की जमीनी स्तर से शुरू होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मूल अधिनियम में राष्ट्रपिता का नाम शामिल कर इसी सोच को सम्मान दिया गया था, लेकिन अब उस नाम को हटाना विधेयक की नैतिकता और ऐतिहासिक वैधता दोनों को कमजोर करता है।

गांधी का नाम हटाने पर गंभीर आरोप

शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने सरकार पर आरोप लगाया कि महात्मा गांधी का नाम हटाना सिर्फ एक औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि एक गहरे वैचारिक विचलन का संकेत है। उन्होंने कहा कि गांधी जी का नाम उस सिद्धांत का प्रतीक था, जिसमें ‘अंतिम व्यक्ति पहले’ की सोच शामिल थी। रोजगार गारंटी और विकास का असली अर्थ तभी पूरा होता है, जब नीतियां सबसे कमजोर वर्ग को ध्यान में रखकर बनाई जाएं। थरूर के अनुसार, गांधी के नाम को हटाकर सरकार उस ऐतिहासिक जुड़ाव को तोड़ रही है, जिसने कानून को नैतिक आधार प्रदान किया था। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी विकास मॉडल की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि समाज के अंतिम छोर तक उसके असर से तय होती है।

फिल्मी गीत से राजनीतिक कटाक्ष

अपने भाषण के अंत में शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने सत्तापक्ष पर तीखा कटाक्ष करते हुए देव आनंद (Dev Anand) की मशहूर फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ (Hare Rama Hare Krishna) के एक गीत की पंक्ति उद्धृत की—“देखो ओ दीवानो तुम ये काम न करो, राम का नाम बदनाम ना करो।” इस टिप्पणी ने सदन का ध्यान खींच लिया और राजनीतिक संदेश को और धारदार बना दिया। थरूर का कहना था कि राम और राम राज्य जैसी अवधारणाएं आस्था, नैतिकता और सामाजिक न्याय से जुड़ी हैं, न कि राजनीतिक ब्रांडिंग से। उनका यह बयान साफ संकेत देता है कि विपक्ष इस विधेयक को सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि वैचारिक स्तर पर भी चुनौती देने के मूड में है।

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