Noida Techie Death CBI Probe: नोएडा इंजीनियर मौत केस में CBI जांच, अथॉरिटी से फाइलें लीं, 4 लोग गिरफ्तार भी हुए।

Noida Techie Death CBI Probe: सेक्टर-150 में गड्ढे में डूबकर हुई युवराज की मौत, मामला अब CBI जांच में।

Noida Techie Death CBI Probe: उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। 27 साल के युवराज मेहता की कार निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में गिर गई, जहां पानी भरा हुआ था। युवराज पानी में डूबकर मर गए। यह हादसा 16 जनवरी की रात को ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में हुआ। घटना के बाद से लोग नोएडा अथॉरिटी, बिल्डरों और प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं। अब इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एंट्री कर ली है। CBI ने नोएडा अथॉरिटी से संबंधित फाइलें जब्त कर ली हैं और जांच तेज कर दी है। पुलिस ने अब तक 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।

कैसे हुई मौत? पूरी घटना/Noida Techie Death CBI Probe

युवराज मेहता एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और नोएडा में काम करते थे। 16 जनवरी की रात वे अपनी कार से घर जा रहे थे। रास्ते में सेक्टर-150 के एक निर्माण स्थल के पास उनकी कार अनियंत्रित हो गई और बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में गिर पड़ी। गड्ढा काफी गहरा था और उसमें पानी भरा हुआ था। पानी 2021 से जमा था, क्योंकि निर्माण काम रुका हुआ था। युवराज कार से बाहर निकलने की कोशिश करते रहे, लेकिन पानी में डूब गए। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना और पानी में सांस न ले पाना बताया गया। हादसे के बाद रेस्क्यू टीम ने 2 घंटे बाद कार निकाली, लेकिन तब तक युवराज की मौत हो चुकी थी।

यह गड्ढा MZ Wiztown Planners और Lotus Greens जैसी रियल एस्टेट कंपनियों के प्रोजेक्ट से जुड़ा था। इलाके में कोई बैरिकेडिंग, साइन बोर्ड या लाइट नहीं थी। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने कहा कि यह लापरवाही की वजह से हुआ। युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने पुलिस में शिकायत की और कहा कि अगर समय पर बचाव होता तो बेटा बच सकता था।

पुलिस कार्रवाई, अब तक 4 गिरफ्तार

मामले में पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। पहले FIR में MZ Wiztown Planners और Lotus Greens के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide) की धाराएं लगाई गईं। नामजद बिल्डर अभय कुमार (MZ Wiztown के डायरेक्टर) को 20 जनवरी को गिरफ्तार किया गया। अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। बाद में दूसरी FIR में Lotus Greens के 5 अधिकारियों को नामजद किया गया। पुलिस ने अब तक कुल 4 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें अभय कुमार और अन्य शामिल हैं। Lotus Greens के कुछ लोग अभी फरार हैं लेकिन पुलिस की तलाश जारी है।

CBI की एंट्री और फाइलें जब्त

मामला इतना गंभीर हो गया कि CBI ने जांच अपने हाथ में ले ली। CBI टीम ने नोएडा अथॉरिटी से MZ Wiztown और संबंधित प्रोजेक्ट की फाइलें ले ली हैं। यह फाइलें भूमि आवंटन, निर्माण अनुमति और सुरक्षा मानकों से जुड़ी हैं। पहले से ही इस सेक्टर में स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट को लेकर CBI जांच चल रही थी, जिसमें लैंड अलॉटमेंट में अनियमितताओं का आरोप था। युवराज की मौत के बाद यह पुराना मामला फिर सुर्खियों में आ गया। CBI अब पूरी जांच करेगी कि लापरवाही कहां हुई, कौन जिम्मेदार है और भविष्य में ऐसे हादसे कैसे रोके जा सकते हैं।

योगी सरकार का सख्त रुख, CEO हटाए, SIT गठित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लिया। नोएडा अथॉरिटी के CEO लोकेश एम को उनके पद से हटा दिया गया। साथ ही ट्रैफिक सेल के एक जूनियर इंजीनियर को निलंबित किया। सरकार ने 3 सदस्यीय SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) बनाई, जिसकी अध्यक्षता ADG मेरठ जोन भानु भास्कर कर रहे हैं। SIT को 5 दिनों में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया। SIT ने नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों से पूछताछ की और साइट का दौरा किया।

लोगों में आक्रोश, कैंडल मार्च और सवाल

हादसे के बाद स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए। कैंडल मार्च निकाले गए और नोएडा अथॉरिटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। लोग कह रहे हैं कि निर्माण साइटों पर पानी जमा होना, कोई सुरक्षा नहीं होना आम बात हो गई है। कई प्रोजेक्ट सालों से अधूरे पड़े हैं और गड्ढे खतरनाक बन गए हैं। युवराज के परिवार ने कहा कि वे न्याय चाहते हैं ताकि किसी और का बेटा ऐसा न खोए।

निष्कर्ष

अब CBI की जांच से सारे राज खुलने की उम्मीद है। क्या बिल्डरों ने नियम तोड़े? क्या अथॉरिटी ने अनुमति देते समय लापरवाही बरती? क्या पुराने प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार था? ये सवाल जांच में सामने आएंगे। पुलिस और SIT भी अपनी रिपोर्ट देगी। इस मामले से साफ है कि नोएडा जैसे शहर में विकास के नाम पर सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। युवराज की मौत एक जिंदगी नहीं, बल्कि सिस्टम की खामी का प्रतीक बन गई है। उम्मीद है कि जांच से दोषियों को सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं रुकेंगी।

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