Uttar Pradesh Name History Mughal Era: आज का उत्तर प्रदेश (यूपी) भारत का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मुगल बादशाहों के समय इस पूरे क्षेत्र को क्या नाम से पुकारा जाता था? मुगल काल (1526 से 1857 तक) में आज का यूपी कोई एक राज्य नहीं था। यह मुगल साम्राज्य का दिल था और इसे अक्सर ‘हिंदुस्तान’ कहा जाता था। मुगल बादशाह जैसे बाबर, अकबर, जहांगीर और शाहजहाँ ने आगरा और दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया। अकबर ने फतेहपुर सीकरी बसाई, शाहजहाँ ने ताजमहल बनवाया। उस समय यह क्षेत्र सूबों (प्रांतों) में बंटा था, जैसे सूबा आगरा, सूबा अवध (अयोध्या क्षेत्र), सूबा इलाहाबाद आदि। लेकिन आम बोलचाल में पूरा उत्तरी भारत, खासकर गंगा-यमुना का मैदान, ‘हिंदुस्तान’ कहलाता था। मुगलों के इतिहासकार और लोग इसे ‘हिंदुस्तान’ ही कहते थे, क्योंकि यह साम्राज्य का मुख्य भाग था।
वैदिक काल में इसे ‘ब्रह्मर्षि देश’ या ‘मध्य देश’ कहा जाता था, जहां ऋषि-मुनि तपस्या करते थे। लेकिन मुगल आने के बाद मुस्लिम शासन के तहत यह ‘हिंदुस्तान’ बन गया। मुगलों ने यहां मिश्रित संस्कृति विकसित की – हिंदू और इस्लाम का मिलन हुआ, भक्ति आंदोलन चला, कबीर, तुलसीदास जैसे संत हुए।

ब्रिटिश काल में कई बार बदला नाम/Uttar Pradesh Name History Mughal Era
मुगलों के पतन के बाद 18वीं-19वीं सदी में अवध के नवाबों का शासन रहा, लेकिन 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने पूरा नियंत्रण ले लिया। ब्रिटिशों ने इस क्षेत्र को अलग-अलग नाम दिए:
- 1833-1836 में इसे ‘नॉर्थ-वेस्टर्न प्रोविंसेज’ (उत्तर-पश्चिमी प्रांत) या ‘आगरा प्रेजिडेंसी’ कहा गया।
- 1856 में अवध (औध) को जोड़ा गया, तो नाम हुआ ‘नॉर्थ-वेस्टर्न प्रोविंसेज एंड अवध’।
- 1877 में इसे ‘आगरा एंड अवध के संयुक्त प्रांत’ कहा जाने लगा।
- 1902 में नाम छोटा करके ‘यूनाइटेड प्रोविंसेज ऑफ आगरा एंड अवध’ कर दिया गया, जिसे संक्षेप में ‘यूनाइटेड प्रोविंसेज’ या UP कहा जाता था।
- 1935 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट के बाद इसे सिर्फ ‘यूनाइटेड प्रोविंसेज’ या ‘संयुक्त प्रांत’ कहा गया।
इस समय लखनऊ राजधानी बनी और इलाहाबाद (अब प्रयागराज) प्रशासनिक केंद्र था। ब्रिटिश काल में यह क्षेत्र काफी स्थिर रहा, लेकिन 1947 में भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय भी इसका नाम यूनाइटेड प्रोविंसेज ही था। बंटवारे के दौरान पश्चिमी हिस्से में मुस्लिम बहुल इलाके पाकिस्तान जाने की बात हुई, लेकिन यूपी का ज्यादातर हिस्सा भारत में रहा।
आजाद भारत में ‘उत्तर प्रदेश’ नाम कैसे पड़ा?
1947 में आजादी के बाद यूनाइटेड प्रोविंसेज भारत का हिस्सा बना। लेकिन नाम पर बहस हुई। कुछ लोग इसे ‘आर्यावर्त’ या कोई प्राचीन नाम देना चाहते थे। लेकिन 24 जनवरी 1950 को भारत के गवर्नर जनरल ने ‘यूनाइटेड प्रोविंसेज (नाम परिवर्तन) आदेश 1950’ पारित किया। इसके तहत नाम बदलकर ‘उत्तर प्रदेश’ कर दिया गया, क्योंकि यह भारत के उत्तर में स्थित है। नए संविधान के लागू होने के साथ ही 26 जनवरी 1950 से यह आधिकारिक रूप से उत्तर प्रदेश बन गया।
1950 में ही टिहरी गढ़वाल, रामपुर जैसे कुछ रियासतों को इसमें शामिल किया गया। 2000 में पहाड़ी इलाकों से अलग होकर उत्तराखंड बना, लेकिन मुख्य यूपी की सीमाएं लगभग वही रहीं।
बंटवारे की खबरें और नाम बदलने की चर्चा
पिछले कुछ सालों में यूपी में कई शहरों-जगहों के नाम बदले गए हैं, जैसे इलाहाबाद को प्रयागराज, फैजाबाद को अयोध्या, मुगलसराय को पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर। ये बदलाव मुगल काल के नामों को हटाने और प्राचीन हिंदू नाम वापस लाने के नाम पर हुए। कुछ लोग कहते हैं कि यह मुगल इतिहास मिटाने की कोशिश है। लेकिन सरकार का कहना है कि पुराने नाम बहाल किए जा रहे हैं।
कभी-कभी बंटवारे की खबरें भी आती हैं – जैसे पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चिम प्रदेश अलग राज्य बनाने की बात। मायावती सरकार ने 2011 में विधानसभा में प्रस्ताव पास किया था कि यूपी को चार हिस्सों में बांटा जाए। लेकिन अभी तक कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। यूपी की बड़ी आबादी और राजनीतिक महत्व के कारण बंटवारा मुश्किल है।
निष्कर्ष
मुगल काल से लेकर आज तक यूपी का नाम कई बार बदला – हिंदुस्तान से यूनाइटेड प्रोविंसेज और फिर उत्तर प्रदेश। लेकिन इसकी संस्कृति, इतिहास और महत्व कभी नहीं बदला। यहां राम-कृष्ण की जन्मभूमि है, ताजमहल है, काशी-मथुरा है। बंटवारे की खबरें आती-जाती रहती हैं, लेकिन यूपी भारत का दिल बना हुआ है। नाम क्या भी हो, यह राज्य हमेशा ‘उत्तर’ में रहेगा और देश की राजनीति-संस्कृति का केंद्र बनेगा।









