Paras HEC Hospital : पारस एचईसी हॉस्पिटल का ‘स्पोर्ट्स इंजरी कॉन्क्लेव’ आयोजित

Paras HEC Hospital : पारस एचईसी अस्पताल में स्पोर्ट्स इंजरी क्लिनिक की लॉन्चिंग

Paras HEC Hospital : खेल के दौरान होने वाली चोटें अब खिलाड़ियों के करियर में बाधा नहीं बनेंगी। इसी उद्देश्य के साथ होटल बीएनआर चाणक्य में पारस एचईसी हॉस्पिटल, रांची के तत्वावधान में ‘स्पोर्ट्स इंजरी कॉन्क्लेव’ (Sports Injury Conclave) का आयोजन किया गया। इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य खेल से जुड़ी चोटों की समय पर पहचान, आधुनिक इलाज और सुरक्षित वापसी को लेकर खिलाड़ियों को जागरूक करना था। कॉन्क्लेव में पारस एचईसी अस्पताल में स्पोर्ट्स इंजरी क्लिनिक की लॉन्चिंग की गई।

यह क्लीनिक हर शुक्रवार को सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक चलेगा। क्लिनिक में परामर्श शुल्क 200 रूपये एवं सीटी स्कैन, एमआरआई और 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी। वहीं, फिजियोथैरेपी पर 50 प्रतिशत और सर्जरी पर 30 प्रतिशत की छूट मिलेगी।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव ने कहा कि खेल के दौरान चोट लगना स्वाभाविक है, लेकिन सही समय पर उचित इलाज और वैज्ञानिक रिहैब से खिलाड़ी न केवल तेजी से स्वस्थ हो सकता है, बल्कि सुरक्षित रूप से अपने खेल में भी वापसी कर सकता है। ऐसे आयोजनों से खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को आधुनिक खेल चिकित्सा की महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है, जो आज के प्रतिस्पर्धी खेल जगत में अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम में पारस एचईसी हॉस्पिटल के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक्स विशेषज्ञों ने खेल चोटों के आधुनिक उपचार, वैज्ञानिक रिहैबिलिटेशन और तेज़ रिकवरी पर विस्तृत जानकारी साझा की।

ऑर्थोपेडिक्स विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ निर्मल कुमार ने कहा कि खेल के दौरान लगने वाली चोटों को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर समस्या का कारण बन सकता है। यदि चोट की समय पर सही पहचान हो जाए और आधुनिक इलाज के साथ वैज्ञानिक फिजियोथेरेपी अपनाई जाए, तो खिलाड़ी पूरी फिटनेस के साथ सुरक्षित रूप से मैदान में वापसी कर सकता है। आधुनिक तकनीकों ने खेल चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं।

ऑर्थोपेडिक्स कंसल्टेंट डॉ विवेक कुमार डेविड ने कहा कि हर खेल चोट के लिए सर्जरी आवश्यक नहीं होती। कई मामलों में सही समय पर नॉन-सर्जिकल उपचार, आधुनिक रिहैब तकनीक और नियमित फिजियोथेरेपी से बेहतरीन परिणाम मिलते हैं। खिलाड़ी की उम्र, खेल की प्रकृति और चोट की गंभीरता के अनुसार उपचार योजना बनाना बेहद जरूरी है।

ऑर्थोपेडिक्स कंसल्टेंट डॉ अवकाश कुमार ने कहा कि इलाज के साथ-साथ सही रिहैब और कंडीशनिंग खिलाड़ियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जल्दबाजी में मैदान पर वापसी करने से दोबारा चोट का खतरा बढ़ जाता है। वैज्ञानिक तरीके से तैयार चरणबद्ध रिहैब प्रोग्राम से खिलाड़ी सुरक्षित रूप से अपनी पुरानी प्रदर्शन क्षमता हासिल कर सकता है।

हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ नीतेश कुमार ने कहा कि पारस एचईसी हॉस्पिटल, रांची का उद्देश्य केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों को चोट से बचाव, समय पर उपचार और संपूर्ण रिकवरी के प्रति जागरूक करना भी है। ‘स्पोर्ट्स इंजरी कॉन्क्लेव’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से खेल चिकित्सा में उपलब्ध आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञ सेवाओं को समाज तक पहुंचाया जा रहा है।
कॉन्क्लेव में चोट की जल्द पहचान, आधुनिक रिहैब और फिजियोथेरेपी के नए तरीके, व्यक्तिगत उपचार पद्धति और वैज्ञानिक तरीके से खेल में वापसी की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई।

इस कार्यक्रम में पारस हेल्थ के अन्य केंद्रों से डॉ रवि गुप्ता, डॉ नासिर अहमद मीर, डॉ राहुल खन्ना, डॉ मोहम्मद हसीब गनी, डॉ डी पी शर्मा एवं बड़ी संख्या में खिलाड़ी, खेल प्रशिक्षक और फिजियोथेरेपिस्ट शामिल हुए।

Other Latest News

Leave a Comment