Chandausi Madrasa Gosul Alam Independence Day: चंदौसी में भारत के 77वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर चंदौसी शहर में मदरसा गोसुल आलम ने एक खास और यादगार कार्यक्रम आयोजित किया। यहां के लोग, बच्चे और शिक्षक सबने मिलकर इस दिन को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया। मदरसा संचालक और ऑल इंडिया उलेमा व मशाईख बोर्ड के सदस्य शाह आलम मंसूरी ने इस कार्यक्रम को संयुक्त रूप से आयोजित किया। पूरा मदरसा परिसर देशभक्ति के रंग में रंग गया था। तिरंगा फहराने से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रम और दुआ तक, हर पल में देश के प्रति प्यार और सम्मान झलक रहा था।
झंडा फहराने का भावुक पल/Chandausi Madrasa Gosul Alam Independence Day
सुबह का समय था। मदरसे के मैदान में बड़ी संख्या में बच्चे, उनके माता-पिता, शिक्षक और स्थानीय लोग जमा हो गए थे। सबसे पहले शाह आलम मंसूरी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। जैसे ही तिरंगा हवा में लहराया, सबने जोर से राष्ट्रगान गाया। “जन गण मन…” की धुन के साथ सबके हाथ तिरंगे की तरफ उठे और आंखों में गर्व की चमक थी। यह पल सिर्फ एक रस्म नहीं था, बल्कि देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले शहीदों को याद करने का मौका था। शाह आलम मंसूरी ने कहा कि हमारा देश विविधता में एकता का प्रतीक है और मदरसे जैसे संस्थान भी देशभक्ति सिखाने में कोई कमी नहीं रखते।

बच्चों ने चुराया सबका दिल
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण था बच्चों का सांस्कृतिक प्रोग्राम। छोटे-छोटे बच्चे स्टेज पर आए और देशभक्ति से भरे गीत, नारे और नृत्य पेश किए। कुछ बच्चों ने हिंदी में भाषण दिए, तो कुछ ने उर्दू में देश की एकता और अखंडता पर बात की। एक बच्चे ने कहा, “हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जान देकर हमें आजादी दी, अब हमारा फर्ज है कि हम इस देश को और मजबूत बनाएं।” गीतों में “सारे जहां से अच्छा…” और “वंदे मातरम” जैसे गाने गूंजे, जिससे पूरा माहौल भावुक हो गया। बच्चे तिरंगे के रंगों में सजे हुए थे और उनके चेहरे पर उत्साह साफ दिख रहा था।
शहीदों को याद कर दुआ मांगी
प्रोग्राम के अंत में सभी ने मुल्क की तरक्की, शांति और खुशहाली के लिए खास दुआ की। शाह आलम मंसूरी और अन्य उलेमा ने कहा कि भारत हमारा घर है और यहां हर धर्म के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। उन्होंने बच्चों को बताया कि स्वतंत्रता दिवस सिर्फ छुट्टी नहीं, बल्कि याद दिलाने का दिन है कि हम सब एक हैं। दुआ में देश के विकास, गरीबी-भुखमरी से मुक्ति और हर नागरिक की सुरक्षा की कामना की गई।
भारी भीड़ ने बनाया कार्यक्रम यादगार
इस मौके पर भारी तादाद में लोग मौजूद रहे। मदरसे के बच्चे तो थे ही, साथ में हाफिज मतीन, अशरफी शाह, आलम मंसूरी, नजर मोहम्मद, हाफिज मोहम्मद, कैफ हाफिज अमजद जैसे कई सम्मानित लोग भी शामिल हुए। स्थानीय लोग, पड़ोसी और अभिभावक भी आए और बच्चों के प्रदर्शन को देखकर तालियां बजाईं। पूरा मदरसा परिसर खुशी और जोश से भरा हुआ था। लोग कह रहे थे कि ऐसे कार्यक्रम देखकर दिल को सुकून मिलता है और देश के प्रति प्यार बढ़ता है।
मदरसा गोसुल आलम की खासियत
मदरसा गोसुल आलम चंदौसी में शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां न सिर्फ धार्मिक शिक्षा दी जाती है, बल्कि बच्चों को देशभक्ति, एकता और अच्छे नागरिक बनने की ट्रेनिंग भी मिलती है। शाह आलम मंसूरी जैसे लोग यहां सक्रिय हैं, जो पहले भी व्यापारी संगठनों में सक्रिय रहे हैं और अब मदरसे के माध्यम से समाज सेवा कर रहे हैं। ऐसे आयोजन दिखाते हैं कि मदरसे भी राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं।
देशभक्ति का संदेश हर तरफ
यह कार्यक्रम सिर्फ चंदौसी तक सीमित नहीं रहा। लोग इसे सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐसे उत्सव देखकर गर्व होता है। बच्चे जब बड़े होंगे, तो इन्हें याद रहेगा कि उन्होंने बचपन में ही देश के लिए कुछ किया। स्वतंत्रता दिवस का मतलब सिर्फ तिरंगा फहराना नहीं, बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी महसूस करना है।










