Ajit Pawar के जाने के बाद Maharashtra की सियासत में उलझन, ये 4 बड़े सवाल

Maharashtra : दादा के बिना महाराष्ट्र, अजित पवार (Ajit Pawar) की मौत से उठे 4 ऐसे सवाल जो राजनीति बदल देंगे

Maharashtra : महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में इन दिनों बड़ा सदमा है। एनसीपी के बड़े नेता और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) का अचानक निधन हो गया। बारामती के पास उनके निजी विमान के क्रैश में उनकी और चार अन्य लोगों की मौत हो गई। अजित पवार (Ajit Pawar) महज एक नेता नहीं थे, वे महाराष्ट्र के लिए ‘दादा’ थे। कई बार डिप्टी सीएम रहे, वित्त मंत्री थे और एनसीपी को मजबूत करने में उनकी बड़ी भूमिका थी। चाचा शरद पवार से अलग होकर उन्होंने अपनी अलग राह चुनी और महायुति सरकार में अहम हिस्सा बने।

अब उनकी मौत के बाद पूरे राज्य में शोक की लहर है। बारामती में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। लेकिन राजनीति रुकती नहीं। अजित पवार (Ajit Pawar) के जाने से कई बड़े पद खाली हो गए हैं और कई सवाल खड़े हो गए हैं। इनमें से चार मुख्य सवाल ऐसे हैं जो आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की सियासत की दिशा तय करेंगे। आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं।

पहला सवाल, महाराष्ट्र का अगला डिप्टी सीएम कौन बनेगा?

अजित पवार (Ajit Pawar) महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम थे। महायुति सरकार में एनसीपी को डिप्टी सीएम का पद मिला हुआ था। अब यह पद खाली है। सबसे ज्यादा नाम सुनेत्रा पवार का चल रहा है। सुनेत्रा अजित पवार की पत्नी हैं और राज्यसभा सांसद भी। एनसीपी के कई नेता और कार्यकर्ता यही चाहते हैं कि सुनेत्रा ही डिप्टी सीएम बनें। इससे पवार परिवार की विरासत बनी रहेगी और अजित पवार को श्रद्धांजलि भी मिलेगी।

लेकिन अन्य नाम भी हैं। प्रफुल पटेल का नाम काफी मजबूत है। वे एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और पार्टी के दिग्गज नेता। छगन भुजबल भी ओबीसी चेहरा होने के कारण दावेदार हैं। सुनील तटकरे के समर्थक भी उनकी बात कर रहे हैं। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महायुति के बड़े नेता किसे चुनते हैं। अगर सुनेत्रा बनीं तो परिवार की ताकत बनी रहेगी, वरना पार्टी के किसी वरिष्ठ को मौका मिल सकता है। यह फैसला महायुति गठबंधन की मजबूती भी तय करेगा।

दूसरा सवाल, महाराष्ट्र का अगला बजट कौन पेश करेगा?

अजित पवार (Ajit Pawar) सिर्फ डिप्टी सीएम नहीं, वित्त मंत्री भी थे। वे कई सालों से बजट पेश करते आए थे। अनुभवी वित्त मंत्री के रूप में उनकी पहचान थी। अब 2026 का बजट जल्द आना है। बजट की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं, लेकिन अब सवाल है कि इसे सदन में कौन रखेगा?

नियम के मुताबिक, जब कोई मंत्री नहीं रहता तो उसके विभाग अस्थायी रूप से मुख्यमंत्री के पास चले जाते हैं। ऐसे में देवेंद्र फडणवीस ही बजट पेश कर सकते हैं। लेकिन यह सिर्फ अस्थायी होगा। लंबे समय में वित्त विभाग किसी नए मंत्री को मिल सकता है। बजट महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अहम है। अगर इसमें कोई देरी हुई या कोई गड़बड़ी हुई तो सरकार की छवि पर असर पड़ सकता है।

तीसरा सवाल, बारामती का अगला विधायक कौन होगा?

बारामती विधानसभा और लोकसभा सीट पवार परिवार का गढ़ रही है। दशकों से यहां शरद पवार और फिर अजित पवार का कब्जा रहा। अजित पवार को बारामती की जनता बहुत प्यार करती थी। उनकी मौत से पूरे इलाके में मायूसी छा गई। अब सवाल है कि उनकी जगह कौन लेगा?

इसमें परिवार के सदस्यों के नाम सबसे आगे हैं। सुनेत्रा पवार, बड़े बेटे पार्थ पवार और छोटे बेटे जय पवार संभावित उम्मीदवार हैं। अजित पवार के भतीजे रोहित पवार का नाम भी आता है। युगेंद्र पवार का भी जिक्र हो रहा है, जिन्हें शरद गुट ‘नवा दादा’ कहता है। युगेंद्र पहले अजित के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन हार गए थे। बारामती में पवार परिवार की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि बाहर का कोई उम्मीदवार आसानी से नहीं जीत सकता। लेकिन परिवार में ही फैसला होगा कि कौन आगे आएगा। यह सीट एनसीपी की ताकत का प्रतीक है।

चौथा सवाल, एनसीपी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन बनेगा?

अजित पवार ने एनसीपी को नई ऊर्जा दी थी। शरद पवार से अलग होने के बाद भी उन्होंने पार्टी को मजबूत किया। कई मंत्री उनकी मेहनत से बने। अब उनकी मौत से पार्टी में बड़ा शून्य पैदा हो गया है। संगठन को संभालने के लिए मजबूत नेता की जरूरत है।

सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार के नाम आते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा प्रफुल पटेल की है। पटेल पार्टी के पुराने और अनुभवी नेता हैं। वे कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। एनसीपी के कार्यकर्ता चाहते हैं कि पटेल ही अध्यक्ष बनें और अजित पवार के सपनों को पूरा करें। कुछ लोग दोनों जिम्मेदारियां अलग-अलग रखने की बात कर रहे हैं – अध्यक्ष पटेल और डिप्टी सीएम सुनेत्रा। इससे पार्टी मजबूत रहेगी। लेकिन शरद पवार गुट के साथ विलय की पुरानी चर्चाएं भी फिर से शुरू हो सकती हैं। अंतिम फैसला शरद पवार पर निर्भर करेगा।

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