तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों बड़ा हलचल मचा हुआ है। अभिनेता से नेता बने टीवीके (TVK) प्रमुख विजय ने विधानसभा चुनावों में मजबूत प्रदर्शन करते हुए सरकार बनाने का दावा पेश किया है। अब सभी की नजरें राज्यपाल आर. वी. अरलेकर के फैसले और आने वाले शपथग्रहण पर टिकी हुई हैं।
विजय ने की राज्यपाल से मुलाकात
हाल ही में हुए चुनावों में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और उसने लगभग 108 सीटें जीती हैं। इसके बाद विजय ने कांग्रेस समेत कुछ दलों के समर्थन के साथ राज्यपाल से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया।

उनका कहना है कि उनके पास सरकार चलाने के लिए पर्याप्त समर्थन है और जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है। इस मुलाकात के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
राज्यपाल ने क्यों रोका शपथग्रहण?
हालांकि, राज्यपाल ने अभी तुरंत सरकार गठन की मंजूरी नहीं दी है। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने कहा है कि सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का स्पष्ट समर्थन जरूरी है (पूर्ण बहुमत)।
राज्यपाल का कहना है कि जब तक यह साबित नहीं हो जाता कि सरकार के पास स्थिर बहुमत है, तब तक शपथग्रहण संभव नहीं है।
इसी वजह से फिलहाल शपथग्रहण कार्यक्रम टल गया है।
राजनीतिक दलों में हलचल
इस फैसले के बाद तमिलनाडु की राजनीति में कई प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
- टीवीके समर्थक इसे लोकतंत्र के खिलाफ बता रहे हैं
- विपक्षी दलों का कहना है कि नियमों के अनुसार बहुमत साबित करना जरूरी है
- कुछ दलों ने राज्यपाल पर पक्षपात के आरोप भी लगाए हैं
राज्य में सरकार गठन को लेकर लगातार बातचीत और जोड़-तोड़ की राजनीति चल रही है।
कब हो सकता है शपथग्रहण?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर टीवीके जल्द ही आवश्यक संख्या में विधायकों का समर्थन दिखा देती है, तो शपथग्रहण कुछ दिनों के भीतर चेन्नई में हो सकता है।
इसके लिए संभावित जगहों पर तैयारियां भी शुरू की जा चुकी हैं, लेकिन अंतिम फैसला राज्यपाल की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। एक तरफ टीवीके दावा कर रही है कि उसके पास पर्याप्त समर्थन है, वहीं राज्यपाल बहुमत के स्पष्ट प्रमाण पर जोर दे रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि “विजय” की सरकार कब और कैसे शपथ लेगी।










