BFCL Green Initiative Ramgarh: BFCL की ‘हरित भविष्य’ मुहिम,रामगढ़ में पर्यावरण संरक्षण को मिली नई ताकत

BFCL Green Initiative Ramgarh: कर्मचारियों को 'ग्रीन माइंडसेट' सिखा रहा BFCL, पर्यावरण जागरूकता अभियान की शुरुआत

BFCL Green Initiative Ramgarh: झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड (BFCL) एक बड़ी औद्योगिक कंपनी है, जो फेरो एलॉय और स्पंज आयरन जैसी चीजें बनाती है। लेकिन कंपनी सिर्फ मुनाफे पर नहीं, बल्कि पर्यावरण पर भी पूरा ध्यान दे रही है। कंपनी ने ‘हरित भविष्य’ नाम से एक बड़ा रोडमैप बनाया है, जिसमें प्रशिक्षण, जागरूकता और व्यावहारिक कदमों के जरिए पर्यावरण को बचाने की कोशिश की जा रही है। कंपनी का मानना है कि अच्छी तकनीक के साथ-साथ हर कर्मचारी और आसपास के लोगों की जागरूकता जरूरी है। इसी सोच से BFCL ने हाल ही में बड़े स्तर पर प्रशिक्षण और जागरूकता सत्र शुरू किए हैं।

‘ग्रीन माइंडसेट’ बनाना, कर्मचारियों को पर्यावरण का दोस्त बनाना/BFCL Green Initiative Ramgarh

BFCL ने अपने प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए खास ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए। इन सत्रों का मकसद है कि हर व्यक्ति पर्यावरण के प्रति ज्यादा संवेदनशील बने और रोजाना के काम में इसे अपनाए। ट्रेनिंग में क्या-क्या शामिल था?

  • तकनीकी ट्रेनिंग: फैक्ट्री में धुआं और धूल कम करने के लिए इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर्स (ESP) और डस्ट कैचर जैसी मशीनों को सही तरीके से चलाने की ट्रेनिंग दी गई। इससे उत्सर्जन बहुत कम होता है।
  • पानी और कचरे का सही इस्तेमाल: पानी बचाने, बारिश के पानी को इकट्ठा करने (रैन वॉटर हार्वेस्टिंग) और कचरे को सही तरीके से निपटाने पर जोर दिया गया।
  • समाज में भूमिका: कर्मचारियों को बताया गया कि वे सिर्फ कंपनी के अंदर नहीं, बल्कि अपने गांव-शहर में भी पर्यावरण के ‘दूत’ बनकर काम करें। उन्हें प्रेरित किया गया कि वे घर-परिवार और पड़ोसियों को भी जागरूक करें।

इन सत्रों से कर्मचारी अब पर्यावरण को सिर्फ नियम की तरह नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

2025 में मिली बड़ी कामयाबियां, ठोस नतीजे सामने

ट्रेनिंग और जागरूकता के साथ BFCL ने 2025 में कई अच्छे काम किए, जो कंपनी की गंभीरता दिखाते हैं:

  • प्रदूषण रोकथाम: धूल और धुएं को काबू में रखने के लिए 5 एंटी-स्मॉग गन, 14 डस्ट कैचर और 67 वॉटर स्प्रिंकलर लगाए गए। ये उपकरण पूरे प्लांट में धूल उड़ने से रोकते हैं।
  • पारदर्शिता के लिए मॉनिटरिंग: आम लोगों को भरोसा दिलाने के लिए कंपनी ने BFCL तालाब, डीसी ऑफिस और अन्य जगहों पर रीयल-टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम (CAAQMS) लगाए। इससे हवा की गुणवत्ता की जानकारी हर कोई ऑनलाइन देख सकता है।
  • पेड़-पौधे और पानी बचत: 3.50 हेक्टेयर जमीन पर 839 देशी पौधे लगाए गए। साथ ही 54,600 क्यूबिक मीटर पानी स्टोर करने की क्षमता वाला तालाब बनाया गया, जिससे पानी का संरक्षण हो रहा है।

ये आंकड़े बताते हैं कि कंपनी सिर्फ बातें नहीं कर रही, बल्कि काम कर रही है।

2026 का बड़ा संकल्प, 1,200 पौधे लगाने का लक्ष्य

अब BFCL ने 2026 के लिए नया लक्ष्य रखा है – पूरे साल में कुल 1,200 पौधे लगाना। हर महीने कम से कम 100 पौधे लगाए जाएंगे। इसकी शुरुआत 10 जनवरी 2026 को हो चुकी है। उस दिन एक बड़ा पौधारोपण कार्यक्रम हुआ, जिसमें ट्रेनिंग ले चुके कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और 50 से ज्यादा पौधे लगाए। यह सिर्फ शुरुआत है – कंपनी चाहती है कि यह अभियान पूरे साल चले और पर्यावरण में असली बदलाव आए।

कंपनी के अधिकारी बोले,विकास और पर्यावरण एक साथ

BFCL के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। हमारा मकसद है कि हर कर्मचारी पर्यावरण के नियमों को सिर्फ फॉलो न करे, बल्कि इसे अपना नैतिक फर्ज समझे। ट्रेनिंग सत्र इसी सोच को मजबूत करने के लिए हैं।”

BFCL के बारे में थोड़ा और जानें

बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड रामगढ़ में एक प्रमुख कंपनी है, जो सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) पर जोर देती है। कंपनी तकनीक में नए-नए प्रयोग करती है और CSR के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में काम करती है। इसका मकसद है कि उद्योग चलते रहें, लेकिन पर्यावरण और समाज को कोई नुकसान न हो।

निष्कर्ष

BFCL की यह मुहिम बताती है कि बड़े उद्योग भी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार हो सकते हैं। प्रशिक्षण से कर्मचारी जागरूक हो रहे हैं, तकनीक से प्रदूषण कम हो रहा है और पौधारोपण से हरियाली बढ़ रही है। रामगढ़ जैसे औद्योगिक इलाके में ऐसी पहल जरूरी है, जहां फैक्टरियां चलती हैं लेकिन हवा-पानी साफ रहना भी उतना ही जरूरी है। BFCL का ‘हरित भविष्य’ रोडमैप न सिर्फ कंपनी के लिए, बल्कि पूरे इलाके के लिए एक अच्छी मिसाल है। उम्मीद है कि अन्य कंपनियां भी इससे प्रेरणा लेंगी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ेंगी।

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