US-India Trade Deal 2026: ट्रंप की डील से US फार्मर्स अमीर होंगे? भारत के बाजार में अमेरिकी अनाज-दूध की बाढ़, किसान चिंतित!

US-India Trade Deal 2026: भारत-अमेरिका ट्रेड डील, अमेरिकी किसानों की जीत या भारतीय किसानों का नुकसान? विवाद गरमाया

US-India Trade Deal 2026: फरवरी 2026 की शुरुआत में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक भारत के साथ एक ट्रेड डील का ऐलान कर दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत और अमेरिका के बीच समझौता हो गया है। इसके तहत अमेरिका अब भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ (आयात शुल्क) को 50% या 25% से घटाकर सिर्फ 18% कर देगा।
इसके बदले भारत अमेरिकी समान पर टैरिफ कम करेगा और अन्य बाधाओं को भी कम करेगा या कुछ क्षेत्रों में बाजार खोलने की भी मंजूरी दी है । ट्रंप का दावा है कि भारत अब अमेरिका से 500 अरब डॉलर यानी करीब 46 लाख करोड़ रुपये का सामान खरीदेगा, जिसमें ऊर्जा, कोयला, तकनीक, कृषि उत्पाद और अन्य चीजें शामिल हैं।

ट्रंप ने इसे दोनों देशों के लिए बड़ा फायदा बताया। उन्होंने कहा कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा और अमेरिकी उत्पादों को ज्यादा खरीदेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्रंप को धन्यवाद दिया और कहा कि ये डील दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करेगी। लेकिन असली हंगामा तब मचा जब अमेरिका की कृषि सचिव ब्रूक रोलिंस ने इस डील पर खुशी जाहिर की।

अमेरिकी कृषि सचिव का चौंकाने वाला दावा/US-India Trade Deal 2026

अमेरिका की कृषि सचिव ब्रूक रोलिंस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि ये डील अमेरिकी किसानों के लिए बहुत बड़ी जीत है। उन्होंने लिखा, “ट्रंप का धन्यवाद कि उन्होंने एक बार फिर हमारे अमेरिकी किसानों के लिए डिलीवर किया। नई अमेरिका-भारत डील से अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत के विशाल बाजार में ज्यादा एक्सपोर्ट होंगे। इससे कीमतें बढ़ेंगी और ग्रामीण अमेरिका में पैसा आएगा।”

रोलिंस ने आगे कहा कि 2024 में अमेरिका का भारत के साथ कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर था। भारत की बढ़ती आबादी अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बहुत बड़ा बाजार है। इस डील से ये घाटा कम होगा और अमेरिकी किसान मालामाल हो जाएंगे। उनका दावा है कि अमेरिकी फार्म प्रोडक्ट्स जैसे सोयाबीन, मक्का, डेयरी, पोल्ट्री और अन्य चीजें अब भारत में आसानी से बिकेंगी, जिससे अमेरिकी ग्रामीण इलाकों में नकदी का बहाव बढ़ेगा।

ये बयान सुनकर भारत में कई लोगों को चौंक गया। क्योंकि भारत हमेशा से अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को संवेदनशील मानता आया है। यहां करोड़ों छोटे किसान और डेयरी वाले परिवार अपनी आजीविका चलाते हैं। अगर बड़े पैमाने पर सस्ते अमेरिकी उत्पाद आएंगे तो भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है।

भारत का साफ और मजबूत जवाब

भारत सरकार ने अमेरिकी सचिव के दावों पर तुरंत पलटवार किया। सरकारी सूत्रों और अधिकारियों ने कहा कि डील में कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को बाहर रखा गया है। भारत ने अपनी ‘रेड लाइन्स’ यानी लाल रेखाएं साफ कर दी हैं कि इन क्षेत्रों में कोई बड़ा बाजार नहीं खोला जाएगा।

एक अधिकारी ने बताया कि भारत ने कुछ कृषि उत्पादों पर सीमित पहुंच देने की बात मानी है, लेकिन डेयरी, प्रमुख अनाज और जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। भारत का स्टैंड है कि डेयरी सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की रोजी-रोटी है। इसलिए अमेरिकी दूध, पनीर या अन्य डेयरी उत्पादों को यहां डंप करने की इजाजत नहीं दी गई।

सरकार ने कहा कि ये डील मुख्य रूप से तकनीक, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण, पेट्रोलियम और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों पर फोकस है। कृषि में कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ है। भारत आत्मनिर्भरता और खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।

विपक्ष ने उठाए सवाल, किसानों की चिंता

विपक्षी पार्टियों ने इस डील पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या कृषि बाजार खोला गया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने किसानों के हितों को नजरअंदाज किया। सपा के अखिलेश यादव ने इसे किसान विरोधी बताया और कहा कि इससे भारतीय किसानों की आय घटेगी, कर्ज बढ़ेगा और जमीनें कॉरपोरेट्स को बेचनी पड़ेंगी।

कई विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिकी उत्पाद सस्ते आएंगे तो भारतीय किसानों को मुश्किल होगी। लेकिन सरकार का दावा है कि भारतीय किसान अमेरिकी बाजार में भी अपने चावल, मसाले, फल-सब्जी और ऑर्गेनिक उत्पाद बेच सकेंगे, जिससे उन्हें फायदा होगा।

दोनों देशों को क्या फायदा?

ये डील दोनों के लिए फायदेमंद हो सकती है। अमेरिका को भारत का बड़ा बाजार मिलेगा, खासकर ऊर्जा और तकनीक में। भारत को अमेरिकी टैरिफ कम होने से निर्यात बढ़ेगा, जैसे टेक्सटाइल, फार्मा और आईटी। लेकिन कृषि पर विवाद बना हुआ है। अमेरिका ज्यादा एक्सपोर्ट चाहता है, जबकि भारत अपने किसानों की रक्षा कर रहा है।

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