रायबरेली (Raebareli) जिले में विकास की बड़ी उम्मीदों के साथ करीब पांच वर्ष पहले तैयार की गई शहरी आवास विकास योजना आज बदहाली का शिकार नजर आ रही है। नगर पालिका क्षेत्र के बरखापुर गांव में रायबरेली विकास प्राधिकरण द्वारा करोड़ों-अरबों रुपये की लागत से निर्मित लगभग 300 आवासों की बहुमंजिला इमारतें समय से पहले ही जर्जर होती दिख रही हैं।
5 साल में खंडहर जैसी हालत

स्थानीय लोगों के अनुसार, इन सभी आवासों की बुकिंग तो हो चुकी है, लेकिन निर्माण के पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी इनमें कोई स्थायी रूप से रहने नहीं आया।कई खंभों में दरारें और टूट-फूट दिखाई दे रही है। सीढ़ियां उखड़ने लगी हैं। दीवारों पर प्लास्टर झड़ रहा है। जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा है। पहली नजर में ही इमारत वर्षों पुरानी और परित्यक्त प्रतीत होती है।
अवैध कब्जा और गोदाम में तब्दील फ्लैट सबसे गंभीर मामला यह है कि खाली पड़े कमरों मेलकड़ियां और अन्य सामान भरकर गोदाम बना दिए गए हैं। कुछ कमरों में बकरियां बांध दी गई हैं। खुले परिसर में अराजक तत्वों की आवाजाही बनी रहती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो अवैध कब्जा हटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाएगा।
अधिकारियों की अनदेखी पर सवाल

लोगों का आरोप है कि विकास प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर निरीक्षण करने नहीं आते। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद रखरखाव और सुरक्षा की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि, भवनों का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। अवैध कब्जा तत्काल हटाया जाए। सुरक्षा गार्ड और नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था की जाए। पात्र लाभार्थियों को शीघ्र आवास आवंटित कर बसाया जाए। यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो यह महत्वाकांक्षी योजना पूरी तरह से विफल होती नजर आएगी। करोड़ों की सार्वजनिक धनराशि से तैयार यह परियोजना वर्तमान में प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बनती जा रही है।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक इन जर्जर हो रही इमारतों को नई जिंदगी मिलती है।










